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रफ़ी की याद में गूंजे अमर तराने: महेश्वर में सुरों की महफिल ने बांधा समां, संगीत प्रेमियों ने दी भावभीनी गीतांजलि

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Published On: 1 August 2026
Artists perform timeless Mohammed Rafi songs during a musical tribute program at Sharda Sadan Library and Tourism Facilitation Centre in Maheshwar, commemorating the legendary singer's death anniversary
— Artists perform timeless Mohammed Rafi songs during a musical tribute program at Sharda Sadan Library and Tourism Facilitation Centre in Maheshwar, commemorating the legendary singer's death anniversary

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रफ़ी की याद में गूंजे अमर तराने: महेश्वर में सुरों की महफिल ने बांधा समां, संगीत प्रेमियों ने दी भावभीनी गीतांजलि

स्वराज वाणी जिला ब्यूरो चीफ संवाददाता: गौतम साल्वे
स्थान: महेश्वर (खरगोन)

महान पार्श्व गायक मोहम्मद रफ़ी को संगीतमय श्रद्धांजलि

संगीत की दुनिया में अपनी मधुर और अमर आवाज़ से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले महान पार्श्व गायक मोहम्मद रफ़ी की पुण्यतिथि पर शुक्रवार रात महेश्वर में सुरों से सजी एक यादगार संगीतमय शाम का आयोजन किया गया। गांधी चौक स्थित शारदा सदन ग्रंथालय एवं पर्यटन सुविधा केंद्र में मां रेवा सुर संगम मंच के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य गीतांजलि कार्यक्रम में रफ़ी साहब के सदाबहार गीतों ने ऐसा समां बांधा कि देर रात तक पूरा सभागार संगीत की मधुर स्वर लहरियों से गूंजता रहा।

कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों ने रफ़ी साहब के लोकप्रिय और कालजयी गीतों की शानदार प्रस्तुतियां देकर न केवल उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की, बल्कि उपस्थित संगीत प्रेमियों को स्वर्णिम फिल्म संगीत के उस दौर की याद भी दिला दी, जब मोहम्मद रफ़ी की आवाज़ हर दिल की धड़कन हुआ करती थी।

मां सरस्वती के पूजन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ


संगीतमय संध्या का शुभारंभ भारतीय संस्कृति की परंपरा के अनुसार मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। एडवोकेट जितेंद्र नेगी ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

इसके बाद मंच पर उपस्थित कलाकारों ने एक-एक कर रफ़ी साहब के अमर गीतों की प्रस्तुति देना शुरू किया और देखते ही देखते पूरा सभागार संगीत की मधुर धुनों में खो गया।

रफ़ी के गीतों ने ताजा कर दी स्वर्णिम दौर की यादें

कार्यक्रम में प्रस्तुत किए गए गीतों ने श्रोताओं को हिंदी सिनेमा के उस स्वर्णिम युग में पहुंचा दिया, जब मोहम्मद रफ़ी की आवाज़ हर फिल्म की पहचान हुआ करती थी।

हर प्रस्तुति के साथ दर्शक कभी गुनगुनाते दिखाई दिए तो कभी तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ाते रहे। कई गीतों के दौरान श्रोताओं ने कलाकारों के साथ सुर मिलाकर कार्यक्रम को और भी यादगार बना दिया।

सुनील गाडगे ने की शानदार शुरुआत

कार्यक्रम का आगाज वरिष्ठ कलाकार सुनील गाडगे ने रफ़ी साहब के बेहद लोकप्रिय गीत “छू लेने दो नाजुक होठों को” की मधुर प्रस्तुति से किया।

इसके बाद उन्होंने “चलो रे डोली उठाओ कहारो” सहित कई अन्य गीत प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति ने कार्यक्रम के प्रारंभ से ही ऐसा माहौल बना दिया कि पूरा सभागार तालियों की गूंज से भर उठा।

मुकेश हिरवे ने दी भावपूर्ण गीतांजलि

कार्यक्रम में मुकेश हिरवे ने विशेष रूप से मोहम्मद रफ़ी को समर्पित गीत “मोहम्मद रफ़ी तू बहुत याद आया” प्रस्तुत किया।

इस गीत ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया और अनेक संगीत प्रेमियों ने खड़े होकर तालियों के माध्यम से अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।

कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों ने जीता दिल

कार्यक्रम में एक के बाद एक कलाकार मंच पर आए और रफ़ी साहब के लोकप्रिय गीतों की शानदार प्रस्तुति देकर वातावरण को सुरमय बनाए रखा।

रेखा रंसोरे ने “आदमी मुसाफिर है” गीत प्रस्तुत कर जीवन दर्शन का सुंदर संदेश दिया।

सुरेश शिंदे ने “तेरी आंखों के सिवा दुनिया में रखा क्या है” की प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

ममता खरे ने “प्यार का बंधन छूटे ना” गीत गाकर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।

हर्षित शर्मा ने रफ़ी साहब के चर्चित गीत “दर्द-ए-दिल” की प्रभावशाली प्रस्तुति दी, जबकि मनोज शर्मा ने “दिल की आवाज़ भी सुन” गाकर खूब तालियां बटोरीं।

‘बदन पर सितारे’ से गूंज उठा सभागार

कार्यक्रम के दौरान विनोद चौरे ने रफ़ी साहब का सुपरहिट गीत “बदन पर सितारे लपेटे हुए” प्रस्तुत किया।

इस प्रस्तुति के दौरान पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा और अनेक दर्शक गीत के साथ गुनगुनाते नजर आए।

इसी क्रम में मनीष बजाज ने भी रफ़ी साहब के कई सदाबहार गीतों की शानदार प्रस्तुति देकर संगीत प्रेमियों का भरपूर मनोरंजन किया।

‘ईश्वर अल्लाह तेरो नाम’ ने दिया एकता का संदेश

कार्यक्रम की विशेष प्रस्तुतियों में फतेह सिंह परमार ‘राही’ द्वारा प्रस्तुत “ईश्वर अल्लाह तेरो नाम” गीत भी शामिल रहा।

उनकी प्रभावशाली प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों को राष्ट्रीय एकता, सद्भाव और भाईचारे का संदेश दिया। गीत समाप्त होते ही पूरा सभागार देर तक तालियों की गूंज से गूंजता रहा।

बांसुरी वादन ने कार्यक्रम में लगाए चार चांद

कार्यक्रम के दौरान प्रसिद्ध कलाकार अंबाराम भालेकर ने अपनी मधुर बांसुरी की प्रस्तुति देकर संगीत संध्या को और अधिक यादगार बना दिया।

बांसुरी की सुरमयी धुनों ने उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरे सभागार में कुछ देर के लिए एक अद्भुत आध्यात्मिक वातावरण बन गया।

देर रात तक गूंजती रहीं रफ़ी की मधुर स्वर लहरियां

कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा। प्रत्येक कलाकार ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से रफ़ी साहब की गायकी को जीवंत कर दिया।

पूरे आयोजन के दौरान दर्शक अपने पसंदीदा गीतों के साथ गुनगुनाते रहे और हर प्रस्तुति पर कलाकारों का जोरदार तालियों से स्वागत करते रहे।

कई वरिष्ठ संगीत प्रेमियों ने कहा कि वर्षों बाद उन्हें ऐसा लगा मानो स्वयं रफ़ी साहब की आवाज़ फिर से जीवंत हो उठी हो।

नई पीढ़ी को संगीत विरासत से जोड़ने का प्रयास

आयोजकों ने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं होते, बल्कि वे भारतीय संगीत की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य भी करते हैं।

उन्होंने कहा कि मोहम्मद रफ़ी जैसे महान कलाकारों का योगदान केवल फिल्म संगीत तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने अपनी गायकी के माध्यम से भारतीय संस्कृति, प्रेम, देशभक्ति, अध्यात्म और मानवीय भावनाओं को स्वर दिया है।

इसी उद्देश्य से प्रतिवर्ष इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं ताकि युवा पीढ़ी भारतीय फिल्म संगीत के स्वर्णिम इतिहास से परिचित हो सके।

रफ़ी साहब का योगदान आज भी अमर

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने मोहम्मद रफ़ी के जीवन और संगीत यात्रा का भी उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि रफ़ी साहब को वर्ष 1967 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया था। उन्होंने हिंदी के अलावा पंजाबी, मराठी, गुजराती, बंगाली, भोजपुरी, कन्नड़, तेलुगु, तमिल और अन्य भारतीय भाषाओं में हजारों गीत गाए।

उनकी मधुर आवाज़, स्पष्ट उच्चारण और भावपूर्ण गायकी के कारण आज भी उनके गीत हर पीढ़ी के लोगों के बीच समान रूप से लोकप्रिय हैं।

संगीत प्रेमियों की रही बड़ी उपस्थिति

इस भव्य आयोजन में एडवोकेट जितेंद्र नेगी, विशाल गीते, मनोज गौड़, मनोज पाटीदार, हरि नारायण पाटीदार, संजय वर्मा, डॉ. एम.एल. सोनी सहित बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता, सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं नगर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

सभी ने कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए कार्यक्रम की सराहना की और कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करते हैं।

रफ़ी साहब की अमर गायकी को किया नमन

कार्यक्रम के समापन पर सभी कलाकारों एवं उपस्थित नागरिकों ने महान गायक मोहम्मद रफ़ी को सामूहिक रूप से श्रद्धांजलि अर्पित की।

आयोजकों ने कहा कि संगीत की दुनिया में रफ़ी साहब का स्थान सदैव सर्वोच्च रहेगा। उनकी आवाज़ आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करती रहेगी और उनके गीत भारतीय संगीत की अमूल्य धरोहर के रूप में हमेशा जीवित रहेंगे।

महेश्वर में आयोजित यह संगीतमय गीतांजलि केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय संगीत के स्वर्णिम युग को याद करने और महान गायक मोहम्मद रफ़ी के प्रति सामूहिक सम्मान व्यक्त करने का एक भावपूर्ण अवसर बन गया। देर रात तक गूंजते अमर तरानों ने यह साबित कर दिया कि रफ़ी साहब की आवाज़ समय की सीमाओं से परे आज भी करोड़ों दिलों में जीवित है।

 

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