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धुम्मा Godri नदी में अवैध रेत खनन, प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठे।

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Published On: 18 February 2026
Illegal sand mining in Dhumma Godri river raises questions over administration’s inaction.Illegal sand mining in Dhumma Godri river raises questions over administration’s inaction.
— Illegal sand mining in Dhumma Godri river raises questions over administration’s inaction.

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धुम्मा Godri नदी में अवैध रेत खनन, प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

अनूपपुर जिले के भालूमाड़ा थाना और फुनगा चौकी क्षेत्र में धुम्मा Godri नदी में अवैध रेत उत्खनन का मामला लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेत माफिया लगभग हर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक सक्रिय रहते हैं और ट्रैक्टरों के माध्यम से नदी से रेत निकालकर विभिन्न स्थानों तक पहुंचाते हैं। इस गतिविधि ने न केवल स्थानीय लोगों की सुरक्षा और शांति को प्रभावित किया है, बल्कि नदी और इसके पारिस्थितिकी तंत्र पर भी गंभीर खतरे की घंटी बजा दी है।

ग्रामीणों की चिंता और अवैध खनन की कार्यप्रणाली

स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि रेत माफिया रात भर लगातार ट्रैक्टरों और ट्रकों के माध्यम से रेत निकालते हैं। माफिया नदी से रेत निकालकर मुख्य सड़क और आसपास के क्षेत्रों में ले जाते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय पुलिस प्रशासन और खनिज विभाग की शिथिलता के कारण माफिया खुलेआम खनन कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि इस पर समय रहते कड़ा कदम नहीं उठाया गया, तो न केवल नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी जल संकट उत्पन्न होने की संभावना है।

अवैध खनन के दौरान माफिया रणनीति के तहत काम करते हैं। नदी से मुख्य सड़क तक आने वाले तिराहों और रास्तों पर उनके लोग निगरानी में रहते हैं। किसी भी तरह की आशंका या खतरा महसूस होने पर माफिया तुरंत ट्रैक्टर लेकर मौके से फरार हो जाते हैं। इस तरह की गतिशीलता प्रशासन के लिए चुनौती बन चुकी है।

प्रशासन की भूमिका और सवाल

स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि रात्रि गश्त बढ़ाई जाए और अवैध खनन पर तुरंत और कड़ी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए प्रशासन का सक्रिय होना अनिवार्य है। वहीं, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि खनिज विभाग और पुलिस के सहयोग से ही इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है।

हालांकि, सूत्रों के अनुसार, प्रशासन द्वारा अब तक कोई प्रभावी रोकथाम या निगरानी तंत्र विकसित नहीं किया गया है। यही कारण है कि रेत माफिया खुलेआम काम कर पा रहे हैं और उनकी गतिविधियों में लगातार इजाफा हो रहा है।

पर्यावरण और नदी के पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव

अवैध रेत खनन केवल आर्थिक या सामाजिक समस्या नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा है। नदी की मिट्टी और रेत प्राकृतिक जल प्रवाह को नियंत्रित करती है। जब रेत का अवैध खनन होता है, तो नदी के तटबंध कमजोर हो जाते हैं, जिससे वर्षा के दौरान बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा मछली और अन्य जलजीवों का आवास प्रभावित होता है, जिससे जैव विविधता को नुकसान पहुंचता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अवैध खनन नदी के पारिस्थितिकी संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ सकता है। इससे न केवल स्थानीय जलस्तर प्रभावित होता है, बल्कि कृषि के लिए पानी की उपलब्धता भी कम हो सकती है। यही नहीं, रेत माफिया द्वारा नदी के किनारे पेड़-पौधों की कटाई और भूमि के अस्थिर होने की घटनाएं भी बढ़ रही हैं।

सामाजिक और आर्थिक पहलू

ग्रामीणों की आर्थिक गतिविधियां भी अवैध रेत खनन से प्रभावित हो रही हैं। नदी किनारे खेती करने वाले किसानों का भूमि कटाई और मिट्टी का नुकसान हो रहा है। इसके अलावा, नदी से पानी लेने वाले स्थानीय लोग पीने के पानी और सिंचाई के लिए संकट में पड़ रहे हैं।

स्थानीय लोग बताते हैं कि माफिया की उपस्थिति से उनका जीवन असुरक्षित महसूस होता है। रात्रि में रेत माफिया की गतिविधियों के कारण लोग अपने खेतों और घरों में डर के साए में रहते हैं।

संभावित समाधान और प्रशासनिक कदम

समस्या को स्थायी रूप से हल करने के लिए विशेषज्ञ कुछ उपाय सुझा रहे हैं:

  1. रात्रि गश्त और निगरानी बढ़ाना: पुलिस और खनिज विभाग को संयुक्त रूप से नदी और आसपास के इलाकों में गश्त बढ़ानी चाहिए।
  2. ड्रोन और कैमरों का इस्तेमाल: अवैध खनन की निगरानी के लिए ड्रोन और वीडियो कैमरे लगाए जा सकते हैं।
  3. वाहनों की चेकिंग: ट्रैक्टर और ट्रकों की नियमित जांच की जाए, जो नदी से रेत ले जा रहे हों।
  4. सख्त कानूनी कार्रवाई: पकड़ में आए रेत माफिया के खिलाफ तुरंत कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि अन्य लोग भी इससे डरें।
  5. स्थानीय समुदाय की भागीदारी: ग्रामीणों को जागरूक कर, उन्हें रेत खनन रोकने के अभियान में शामिल किया जा सकता है।

निष्कर्ष

धुम्मा Godri नदी में अवैध रेत खनन एक गंभीर सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय चुनौती बन चुका है। प्रशासन की सुस्ती और माफिया की रणनीतिक गतिविधियों के कारण नदी और आसपास के लोगों को खतरा बढ़ रहा है। आवश्यक है कि स्थानीय प्रशासन, पुलिस और खनिज विभाग मिलकर अवैध खनन रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाएं। नदी की सुरक्षा केवल पर्यावरण की रक्षा नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा के लिए भी जरूरी है।

स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन समय रहते कार्रवाई करेगा, वरना न केवल नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ेगा बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता पर भी असर पड़ेगा। यह मामला दिखाता है कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में समुदाय और प्रशासन का सामूहिक प्रयास कितना महत्वपूर्ण है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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