भोपाल एम्स में आउटसोर्स कर्मचारियों का ट्रांसफर आदेश निरस्त, पुरानी पोस्टिंग पर ड्यूटी के निर्देश
भोपाल। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल में आउटसोर्स कर्मचारियों के स्थानांतरण और कार्यमुक्ति से संबंधित आदेश को निरस्त कर दिया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एम्स प्रबंधन ने 1 अक्टूबर 2026 को नया कार्यालय आदेश जारी कर यह निर्णय लिया। इसके तहत 30 सितंबर को जारी ट्रांसफर और रिलीविंग का आदेश तत्काल प्रभाव से रद्द किया गया है। संबंधित कर्मचारियों को अपनी पुरानी पोस्टिंग पर ड्यूटी करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस निर्णय के बाद जिन कर्मचारियों पर पिछला आदेश लागू था, उनके लिए उसी आदेश के आधार पर स्थानांतरण और कार्यमुक्ति की व्यवस्था प्रभावी नहीं रहेगी। नई सूचना में कर्मचारियों की ड्यूटी का स्थान स्पष्ट करते हुए पुरानी तैनाती पर काम करने को कहा गया है।
30 सितंबर को जारी किया गया था पिछला आदेश
आउटसोर्स कर्मचारियों के ट्रांसफर और रिलीविंग को लेकर एम्स भोपाल में 30 सितंबर 2026 को आदेश जारी किया गया था। इसके अगले दिन, 1 अक्टूबर को प्रबंधन ने नया कार्यालय आदेश जारी कर पिछले निर्णय को निरस्त कर दिया। इस तरह एक दिन के भीतर संबंधित कर्मचारियों की तैनाती को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था बदल गई।
उपलब्ध विवरण में पुराने आदेश से प्रभावित कर्मचारियों की संख्या, उनके नाम और विभागों की सूची नहीं दी गई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि कर्मचारियों का स्थानांतरण किन स्थानों या विभागों में किया जाना था। फिलहाल सामने आई जानकारी आदेश जारी होने, उसके निरस्त होने और पुरानी पोस्टिंग पर ड्यूटी के निर्देश तक सीमित है।
तत्काल प्रभाव से रद्द हुआ ट्रांसफर और रिलीविंग आदेश
नए कार्यालय आदेश में पिछले ट्रांसफर और रिलीविंग आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की जानकारी दी गई है। इसका अर्थ है कि संबंधित कर्मचारियों की तैनाती के मामले में अब निरस्त आदेश के बजाय नए निर्देश लागू होंगे। कर्मचारियों को अपनी पूर्व पोस्टिंग पर ड्यूटी करने के लिए कहा गया है।
स्थानांतरण और कार्यमुक्ति किसी कर्मचारी की तैनाती से जुड़े अलग-अलग प्रशासनिक कदम होते हैं। स्थानांतरण में ड्यूटी का स्थान बदला जाता है, जबकि कार्यमुक्ति के माध्यम से कर्मचारी को पिछली जिम्मेदारी से मुक्त किया जाता है। यहां इन दोनों विषयों से संबंधित पुराने आदेश को रद्द किए जाने की जानकारी सामने आई है।
कर्मचारियों को पुरानी पोस्टिंग पर काम करने के निर्देश
इस पूरे निर्णय का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा कर्मचारियों को पुरानी पोस्टिंग पर ड्यूटी करने का निर्देश है। जिन आउटसोर्स कर्मचारियों की तैनाती पिछले आदेश से प्रभावित हो रही थी, उनके लिए अब पूर्व कार्यस्थल पर ड्यूटी की व्यवस्था बताई गई है।
हालांकि, उपलब्ध विवरण में ड्यूटी पर रिपोर्ट करने की अलग समयसीमा, उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया या विभागीय समन्वय से जुड़ी जानकारी नहीं है। इसलिए इन विषयों पर अतिरिक्त निर्देश होने का दावा नहीं किया जा सकता। कर्मचारियों के लिए जारी नए कार्यालय आदेश में दर्ज वास्तविक निर्देश ही उनकी ड्यूटी की व्यवस्था का आधार होंगे।
आउटसोर्स कर्मचारियों से संबंधित है फैसला
एम्स भोपाल का यह निर्णय आउटसोर्स कर्मचारियों के स्थानांतरण और कार्यमुक्ति के मामले से जुड़ा है। उपलब्ध सामग्री में संस्थान के नियमित कर्मचारियों की तैनाती में बदलाव का उल्लेख नहीं है। इसलिए इस फैसले को सभी श्रेणियों के कर्मचारियों पर लागू सामान्य स्थानांतरण नीति के रूप में नहीं देखा जा सकता।
इसी तरह, आदेश निरस्त होने से कर्मचारियों के वेतन, अनुबंध की अवधि, सेवा शर्तों या स्थायी नियुक्ति में बदलाव की जानकारी भी नहीं दी गई है। पुरानी पोस्टिंग पर ड्यूटी करने का निर्देश तैनाती से संबंधित है। इसके आधार पर नियमितीकरण या किसी अन्य सेवा लाभ की घोषणा का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
नया कार्यालय आदेश बना तैनाती का आधार
1 अक्टूबर 2026 को जारी कार्यालय आदेश ने 30 सितंबर के आदेश की स्थिति स्पष्ट कर दी है। संबंधित कर्मचारियों के लिए अब यह महत्वपूर्ण है कि उनकी ड्यूटी पुरानी पोस्टिंग पर जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक स्तर पर भी तैनाती की व्यवस्था नए आदेश के अनुरूप होगी।
उपलब्ध विवरण में आदेश निरस्त करने का विस्तृत कारण या प्रबंधन का अलग बयान शामिल नहीं है। कर्मचारियों की प्रतिक्रिया भी नहीं दी गई है। ऐसे में निर्णय के पीछे विरोध, बातचीत, शिकायत या किसी विशेष हस्तक्षेप को कारण बताने के लिए अतिरिक्त पुष्टि आवश्यक होगी।
एक दिन में बदला प्रशासनिक निर्णय
भोपाल एम्स में 30 सितंबर को जारी ट्रांसफर और रिलीविंग आदेश को 1 अक्टूबर को निरस्त किए जाने से संबंधित कर्मचारियों की पोस्टिंग की स्थिति स्पष्ट हुई है। नए निर्देशों के अनुसार उन्हें पूर्व तैनाती वाले स्थान पर ड्यूटी करनी है।
फिलहाल पुष्ट रूप से उपलब्ध विवरण का मुख्य बिंदु यही है कि पुराने आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द किया गया है। प्रभावित कर्मचारियों की संख्या, विभागवार विवरण और निर्णय के कारण से जुड़ी जानकारी उपलब्ध सामग्री में नहीं है। इन तथ्यों के सामने आने पर मामले की अधिक विस्तृत तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
