MR-11 परियोजना को झटका: 227 परिवारों की शिफ्टिंग अटकी, योजना 136 के फ्लैटों में नहीं मिलेगा पीएम आवास योजना का लाभ
केंद्र सरकार की मंजूरी नहीं मिलने से आईडीए की पुनर्वास योजना पर संकट
इंदौर। शहर की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल MR-11 के निर्माण कार्य को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। परियोजना के मार्ग में आने वाले 227 परिवारों को विस्थापित कर योजना क्रमांक 136 के अमलतास और गुलमोहर परिसर में शिफ्ट करने की इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) की योजना फिलहाल अधर में लटक गई है। केंद्र सरकार ने इन तैयार फ्लैटों में प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ देने से इंकार कर दिया है, जिसके चलते पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो गई है।
आईडीए ने एमआर-11 सड़क निर्माण में बाधा बन रहे परिवारों को हटाने के लिए एक वैकल्पिक योजना तैयार की थी। इसके तहत योजना 136 में बने खाली फ्लैटों में इन परिवारों को बसाने का प्रस्ताव था। लेकिन केंद्र सरकार की मंजूरी नहीं मिलने के कारण अब इस योजना पर अमल करना मुश्किल हो गया है।
MR-11 और MR-12 परियोजनाओं के सामने बड़ी चुनौती
इंदौर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एमआर-11 और एमआर-12 जैसी प्रमुख सड़क परियोजनाओं पर लंबे समय से काम चल रहा है। हालांकि इन परियोजनाओं के मार्ग में आने वाली बस्तियों और अन्य अवरोधों के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हो रहा है।
एमआर-11 परियोजना के एक हिस्से में 227 परिवार निवास कर रहे हैं, जिन्हें हटाए बिना सड़क निर्माण का कार्य पूरा नहीं किया जा सकता। दूसरी ओर कुछ प्रभावशाली पक्षों द्वारा न्यायालय से स्थगन आदेश भी प्राप्त किया गया है, जिससे परियोजना की गति पहले से ही प्रभावित है।
ऐसे में आईडीए के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की है ताकि सड़क निर्माण कार्य समय पर पूरा किया जा सके।
योजना 136 में शिफ्ट करने का बनाया गया था प्रस्ताव
प्राधिकरण ने हाल ही में निर्णय लिया था कि प्रभावित परिवारों को योजना क्रमांक 136 स्थित अमलतास और गुलमोहर परिसर की बहुमंजिला आवासीय इमारतों में बसाया जाए। इन परिसरों में बड़ी संख्या में फ्लैट खाली पड़े हुए हैं, जिन्हें पुनर्वास के लिए उपयोग करने की योजना बनाई गई थी।
प्राधिकरण के अनुसार, इन फ्लैटों की बाजार कीमत लगभग 15 से 16 लाख रुपए है। हालांकि विस्थापित परिवारों को इन्हें रियायती दर पर उपलब्ध कराने की योजना थी। प्रस्ताव के तहत प्रत्येक परिवार से केवल 2 लाख रुपए लिए जाने थे, जबकि शेष राशि का बड़ा हिस्सा प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत समायोजित किया जाना था।
इस मॉडल के अनुसार लगभग 4 लाख रुपए की सहायता प्रधानमंत्री आवास योजना से मिलती और बाकी राशि की प्रतिपूर्ति प्राधिकरण अपनी अन्य योजनाओं के माध्यम से करता।
केंद्र सरकार ने नहीं दी मंजूरी
आईडीए की इस योजना को उस समय बड़ा झटका लगा जब केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि योजना 136 के अमलतास और गुलमोहर परिसर में निर्मित फ्लैटों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शामिल नहीं किया जा सकता।
इस निर्णय के बाद पुनर्वास योजना का पूरा वित्तीय ढांचा प्रभावित हो गया है। अब सबसे बड़ी समस्या यह है कि प्रति परिवार मिलने वाली लगभग 4 लाख रुपए की सहायता राशि उपलब्ध नहीं होगी। इससे प्राधिकरण पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा और पुनर्वास की प्रक्रिया जटिल हो जाएगी।
अधिकारियों के सामने अब यह चुनौती है कि बिना केंद्रीय सहायता के प्रभावित परिवारों को किस प्रकार वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाए।
227 परिवारों की शिफ्टिंग फिलहाल अटकी
केंद्र से मंजूरी नहीं मिलने का सीधा असर उन 227 परिवारों पर पड़ा है जिन्हें एमआर-11 परियोजना के लिए विस्थापित किया जाना था। पुनर्वास की स्पष्ट व्यवस्था नहीं होने के कारण फिलहाल इन परिवारों की शिफ्टिंग की प्रक्रिया रोक दी गई है।
परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि जब तक पुनर्वास का कोई व्यवहारिक और वित्तीय रूप से संभव विकल्प नहीं मिलता, तब तक विस्थापन की कार्रवाई आगे बढ़ाना मुश्किल होगा।
इसका असर एमआर-11 सड़क निर्माण परियोजना की समयसीमा पर भी पड़ सकता है।
फ्लैटधारकों ने भी किया था विरोध
योजना 136 के अमलतास और गुलमोहर परिसर में रहने वाले फ्लैटधारकों ने भी इस प्रस्ताव का खुलकर विरोध किया था। उनका कहना था कि बड़ी संख्या में विस्थापित परिवारों को एक साथ बसाने से क्षेत्र की सामाजिक और बुनियादी व्यवस्थाओं पर असर पड़ सकता है।
विरोध दर्ज कराने के लिए रहवासी प्राधिकरण कार्यालय तक पहुंचे थे और अधिकारियों के सामने अपनी आपत्तियां रखी थीं। उनका तर्क था कि किसी भी पुनर्वास योजना को लागू करने से पहले मौजूदा निवासियों की राय और सुविधाओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
अब केंद्र सरकार की मंजूरी नहीं मिलने के बाद इन रहवासियों को भी राहत मिली है, क्योंकि फिलहाल विस्थापित परिवारों को वहां बसाए जाने की संभावना समाप्त होती दिखाई दे रही है।
सिंहस्थ और शहर की यातायात परियोजनाओं पर असर
एमआर-11 और एमआर-12 जैसी परियोजनाएं भविष्य में होने वाले बड़े आयोजनों और शहर के बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। विशेष रूप से आगामी सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए इन सड़कों का निर्माण प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।
यदि पुनर्वास प्रक्रिया में देरी होती है तो सड़क निर्माण की गति भी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में प्रशासन और प्राधिकरण दोनों के लिए यह आवश्यक हो गया है कि प्रभावित परिवारों के लिए जल्द से जल्द वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की जाए।
नए विकल्पों की तलाश में प्राधिकरण
केंद्र सरकार से मंजूरी नहीं मिलने के बाद अब आईडीए अन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत नई बहुमंजिला आवासीय परियोजनाओं का निर्माण भी एक विकल्प हो सकता है। हालांकि इस प्रक्रिया में समय लगेगा।
इसके अलावा अन्य वित्तीय मॉडल और वैकल्पिक पुनर्वास स्थलों पर भी विचार किया जा रहा है ताकि परियोजना प्रभावित परिवारों को उचित आवास उपलब्ध कराया जा सके और सड़क निर्माण कार्य भी आगे बढ़ सके।
फिलहाल एमआर-11 परियोजना के लिए पुनर्वास का मुद्दा सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। आने वाले दिनों में प्राधिकरण द्वारा लिए जाने वाले निर्णय पर न केवल प्रभावित परिवारों बल्कि शहर की महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजनाओं का भविष्य भी निर्भर करेगा।
