केंद्र सरकार ने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) को और अधिक प्रभावी और समयबद्ध बनाने के लिए महत्वपूर्ण संशोधनों का प्रस्ताव रखा है। संसद में वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने स्पष्ट किया कि IBC प्रक्रिया में हो रही देरी का मुख्य कारण अत्यधिक मुकदमेबाजी और कानून का दुरुपयोग है। सरकार अब इस समस्या को दूर करने के लिए सख्त कदम उठाने जा रही है, जिसमें दुरुपयोग करने वालों पर जुर्माना लगाने का प्रावधान भी शामिल है।
वित्त मंत्री ने लोकसभा में कहा कि IBC का उद्देश्य कंपनियों के दिवालिया मामलों का समयबद्ध समाधान करना है, लेकिन कुछ मामलों में जानबूझकर कानूनी अड़चनें पैदा कर प्रक्रिया को लंबा किया जाता है। इससे न केवल बैंकों और निवेशकों को नुकसान होता है, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था पर इसका नकारात्मक असर पड़ता है। इसी कारण सरकार ने इस कानून में सुधार की आवश्यकता महसूस की है।
14 दिनों में अनिवार्य फैसला
प्रस्तावित संशोधनों के तहत, यदि किसी कंपनी द्वारा डिफॉल्ट स्थापित हो जाता है, तो इन्सॉल्वेंसी आवेदन को 14 दिनों के भीतर स्वीकार करना अनिवार्य होगा। वर्तमान में कई मामलों में आवेदन की स्वीकृति में काफी समय लग जाता है, जिससे पूरी प्रक्रिया प्रभावित होती है। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से मामलों के निपटान में तेजी आएगी और न्यायिक प्रणाली पर दबाव भी कम होगा।
दुरुपयोग पर लगेगा जुर्माना
सरकार ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि IBC का दुरुपयोग करने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा। कई बार कंपनियां या अन्य पक्ष जानबूझकर गलत या भ्रामक आवेदन दाखिल करते हैं, जिससे प्रक्रिया में अनावश्यक देरी होती है। अब ऐसे मामलों में दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी ताकि कानून का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
श्रमिकों और कर्मचारियों के हित सुरक्षित
12 बड़े संशोधनों का प्रस्ताव
सरकार ने IBC में कुल 12 संशोधन प्रस्तावित किए हैं। इनमें ग्रुप इन्सॉल्वेंसी और क्रॉस-बॉर्डर इन्सॉल्वेंसी जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। इन प्रावधानों के लागू होने से बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मामलों को सुलझाने में आसानी होगी और विभिन्न देशों के कानूनों के बीच समन्वय स्थापित किया जा सकेगा।
क्रॉस-बॉर्डर इन्सॉल्वेंसी विशेष रूप से उन कंपनियों के लिए उपयोगी होगी जिनका कारोबार कई देशों में फैला हुआ है। इससे विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और भारत में निवेश का माहौल और बेहतर होगा।
बैंकिंग सेक्टर को मिलेगा लाभ
वित्त मंत्री ने बताया कि IBC ने देश के बैंकिंग सेक्टर को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है। इस कानून के जरिए बैंकों ने अपने गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) का बड़ा हिस्सा वसूल किया है। इससे बैंकों की वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है और वे अधिक प्रभावी ढंग से ऋण देने में सक्षम हुए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि IBC का उद्देश्य केवल कर्ज वसूली नहीं है, बल्कि संकट में फंसी कंपनियों को पुनर्जीवित करना और आर्थिक गतिविधियों को बनाए रखना भी है। इस कानून के जरिए कई कंपनियों को नया जीवन मिला है और रोजगार के अवसर भी सुरक्षित रहे हैं।
पहले भी हो चुके हैं कई संशोधन
सरकार पहले भी IBC में कई बार बदलाव कर चुकी है और अब तक इसमें सात संशोधन किए जा चुके हैं। 12 अगस्त 2025 को सरकार ने इस कानून में संशोधन के लिए एक विधेयक लोकसभा में पेश किया था, जिसे बाद में एक चयन समिति को भेजा गया। समिति ने दिसंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसके आधार पर अब नए संशोधन प्रस्तावित किए जा रहे हैं।
न्यायिक प्रक्रिया में आएगी तेजी
इन संशोधनों के लागू होने से न केवल मामलों के निपटान में तेजी आएगी, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। इससे अदालतों में लंबित मामलों की संख्या कम होगी और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा।
अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि IBC में प्रस्तावित ये बदलाव देश की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक साबित होंगे। इससे निवेश का माहौल बेहतर होगा, कंपनियों को समय पर समाधान मिलेगा और बैंकिंग सिस्टम की स्थिति और मजबूत होगी।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, सरकार द्वारा IBC में प्रस्तावित संशोधन आर्थिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। इससे कानून का दुरुपयोग रोका जा सकेगा, मामलों का तेजी से निपटान होगा और देश के कॉरपोरेट सेक्टर को नई मजबूती मिलेगी। आने वाले समय में ये बदलाव भारत की अर्थव्यवस्था को और अधिक स्थिर और सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
