फर्जी IAS तृप्ति सिंह मामले में नया खुलासा, सिविल सेवा की सूची से छेड़छाड़ का आरोप
दूसरे अभ्यर्थी के स्थान पर अपना नाम जोड़कर गोविंदपुरा SDM बनने का कथित दस्तावेज बनाया, पुलिस जांच जारी
दैनिक स्वराज वाणी, भोपाल। खुद को भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी बताकर लोगों से कथित ठगी करने के मामले में गिरफ्तार तृप्ति सिंह से जुड़ा एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में कथित रूप से ऐसा दस्तावेज मिला है, जिसमें वर्ष 2025 की सिविल सेवा परीक्षा की अंतिम चयन सूची से छेड़छाड़ कर दूसरे अभ्यर्थी की जगह तृप्ति सिंह का नाम जोड़ा गया था।
आरोप है कि इस संपादित सूची के आधार पर तृप्ति ने अपने आपको आईएएस अधिकारी और भोपाल के गोविंदपुरा क्षेत्र की एसडीएम बताने के लिए एक कथित फर्जी दस्तावेज तैयार किया था। पुलिस अब दस्तावेज की डिजिटल और तकनीकी जांच कराने के साथ यह पता लगाने में जुटी है कि इसका उपयोग किन लोगों अथवा संस्थानों के सामने किया गया था।
मामले में आरोपों की जांच अभी जारी है। तृप्ति सिंह और उसके भाई से जुड़े कथित ठगी नेटवर्क तथा दस्तावेज तैयार करने में शामिल संभावित अन्य लोगों की भूमिका भी पुलिस की जांच के दायरे में है।
नमन गोयल की जगह अपना नाम जोड़ने का आरोप
पुलिस को मिले कथित दस्तावेज के अनुसार, वर्ष 2025 की सिविल सेवा परीक्षा की अंतिम सूची में चयनित अभ्यर्थी नमन गोयल के नाम के स्थान पर तृप्ति सिंह का नाम दर्ज किया गया था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, मूल सूची को डिजिटल माध्यम से संपादित करने के बाद ऐसा दस्तावेज तैयार किया गया, जिससे यह प्रतीत हो कि तृप्ति सिविल सेवा परीक्षा में चयनित हुई थी।
पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि सूची को किस उपकरण या सॉफ्टवेयर की सहायता से बदला गया और इसे तैयार करने में किसी अन्य व्यक्ति ने सहयोग किया था या नहीं। दस्तावेज की सत्यता जांचने के लिए मूल चयन सूची से तुलना किए जाने की बात सामने आई है।
गोविंदपुरा SDM बनने का बनाया था कथित आदेश
जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि संपादित चयन सूची के बाद तृप्ति ने अपने आपको गोविंदपुरा एसडीएम बताने वाला कथित फर्जी दस्तावेज तैयार किया। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस आदेश पर किन अधिकारियों के नाम, हस्ताक्षर, मुहर अथवा शासकीय प्रतीकों का उपयोग किया गया था।
किसी सरकारी पद अथवा नियुक्ति आदेश से जुड़े दस्तावेज की नकल तैयार करना गंभीर मामला माना जाता है। जांच में यदि सरकारी मुहर, पदनाम या अधिकारी के हस्ताक्षर के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो संबंधित धाराओं के अंतर्गत आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
खुद को IAS अधिकारी बताने का आरोप
तृप्ति सिंह पर आरोप है कि उसने विभिन्न लोगों के सामने खुद को मध्यप्रदेश कैडर की आईएएस अधिकारी और पर्यटन विभाग में पदस्थ अधिकारी के रूप में प्रस्तुत किया। पुलिस जांच में उसके द्वारा सरकारी पहचान और पद का कथित इस्तेमाल कर लोगों का भरोसा जीतने की जानकारी सामने आई है।
बताया जा रहा है कि वह उच्च पदस्थ अधिकारियों से संपर्क होने और शासकीय कार्य कराने की क्षमता होने का दावा करती थी। इसी कथित पहचान के आधार पर उसने लोगों को सरकारी नौकरी, व्यावसायिक अवसर और पर्यटन विभाग के होटलों की लीज दिलाने जैसे प्रलोभन दिए।
हालांकि, ये सभी आरोप पुलिस जांच का हिस्सा हैं। प्रत्येक शिकायत और लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की अलग-अलग जांच की जा रही है।
कथित ठगी नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस
पुलिस रिमांड के दौरान जांच अधिकारियों का मुख्य फोकस कथित ठगी के पूरे नेटवर्क का पता लगाने पर रहा। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि तृप्ति सिंह और उसके भाई के संपर्क में कौन-कौन लोग थे तथा कथित फर्जी आईएएस पहचान का उपयोग कितने मामलों में किया गया।
जांच एजेंसी संभावित पीड़ितों की जानकारी भी जुटा रही है। जिन लोगों ने नौकरी, होटल लीज, सरकारी अनुमति या अन्य काम कराने के नाम पर रुपये देने की शिकायत की है, उनके बयान दर्ज कर लेन-देन का रिकॉर्ड जांचा जा सकता है।
पुलिस बैंक खातों, मोबाइल फोन, डिजिटल चैट, ईमेल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच के माध्यम से कथित ठगी की रकम तथा उससे लाभान्वित व्यक्तियों की पहचान करने का प्रयास कर रही है। यह भी देखा जा रहा है कि अलग-अलग लोगों से संपर्क करते समय किन मोबाइल नंबरों और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग हुआ।
भाई की भूमिका भी जांच के दायरे में
मामले में तृप्ति सिंह के भाई की कथित भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिस यह पता लगा रही है कि लोगों से संपर्क करने, दस्तावेज उपलब्ध कराने, रुपये लेने या अन्य गतिविधियों में उसकी क्या भूमिका थी। दोनों आरोपियों के संपर्कों और कथित लेन-देन की अलग-अलग जांच की जा रही है।
पुलिस यह भी जांच रही है कि कहीं सरकारी अधिकारी, कर्मचारी या किसी निजी संस्था से जुड़ा व्यक्ति इस कथित नेटवर्क की मदद तो नहीं कर रहा था। अब तक सामने आए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और न्यायिक परीक्षण होना शेष है।
अदालत में पेशी के बाद रिमांड पर फैसला
पुलिस रिमांड की अवधि पूरी होने पर दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया जाना था। पेशी के बाद अदालत यह तय करेगी कि जांच के लिए पुलिस को आगे रिमांड दी जाए या आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा जाए।
यदि पुलिस को नए दस्तावेजों और संभावित पीड़ितों के संबंध में पूछताछ के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता होती है तो वह अदालत से रिमांड बढ़ाने का अनुरोध कर सकती है। इसका अंतिम फैसला न्यायालय द्वारा केस डायरी और जांच अधिकारी के तर्कों को ध्यान में रखते हुए लिया जाएगा।
फर्जी दस्तावेजों की तकनीकी जांच महत्वपूर्ण
मामले में मिले कंप्यूटर, मोबाइल फोन और कथित फर्जी दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच से कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। डिजिटल फाइल कब बनाई गई, उसमें कब बदलाव हुआ और उसे किन लोगों को भेजा गया—इन प्रश्नों के उत्तर जांच की दिशा तय कर सकते हैं।
पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि चयन सूची और एसडीएम पदस्थापना से जुड़े कथित दस्तावेज केवल प्रभाव जमाने के लिए बनाए गए थे या इनका इस्तेमाल लोगों से रुपये लेने में भी किया गया। जांच पूरी होने और आरोपपत्र प्रस्तुत किए जाने के बाद ही पूरे मामले की कानूनी तस्वीर स्पष्ट होगी। आरोपियों को दोषी या निर्दोष ठहराने का अंतिम अधिकार न्यायालय का है।
