अनूपपुर का जागृति दुर्गा पूजा महोत्सव 43वें वर्ष में पहुंचा। स्व. प्रभाकर मिश्र ‘गुरुजी’ द्वारा शुरू की गई परंपरा आज भी आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता की मिसाल
अनूपपुर में जागृति दुर्गा पूजा महोत्सव के 43 वर्ष पूरे, आस्था और संस्कारों की परंपरा आज भी जीवंत
स्वर्गीय प्रभाकर मिश्र ‘गुरुजी’ ने रखी थी महोत्सव की नींव, वरिष्ठ सदस्यों और नई पीढ़ी के सहयोग से आगे बढ़ रही धार्मिक विरासत
अनूपपुर। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में आयोजित होने वाला जागृति दुर्गा पूजा महोत्सव इस वर्ष अपने 43वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। चार दशकों से अधिक समय से चली आ रही यह धार्मिक परंपरा आज नगर की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक एकता और मां दुर्गा के प्रति अटूट श्रद्धा का प्रतीक बन गई है।
इस महोत्सव की स्थापना का श्रेय स्वर्गीय प्रभाकर मिश्र ‘गुरुजी’ को जाता है। उनके प्रयासों से प्रारंभ हुआ यह आयोजन आज भी नगरवासियों के सहयोग और समिति सदस्यों के समर्पण से निरंतर आगे बढ़ रहा है।
स्वर्गीय प्रभाकर मिश्र ‘गुरुजी’ ने रखी थी महोत्सव की नींव
जागृति दुर्गा पूजा महोत्सव को स्थापित करने और पहचान दिलाने में स्वर्गीय प्रभाकर मिश्र ‘गुरुजी’ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सहभागिता को जोड़ते हुए इस आयोजन की शुरुआत की थी।
उनके द्वारा स्थापित परंपरा ने समय के साथ व्यापक स्वरूप प्राप्त किया। आज यह महोत्सव नई पीढ़ी को धार्मिक संस्कारों, भारतीय संस्कृति और सामूहिक एकता से जोड़ने का माध्यम बन रहा है।
दिवंगत सदस्यों का योगदान आज भी स्मरणीय
महोत्सव की 43 वर्षों की यात्रा में कई दिवंगत सदस्यों का विशेष योगदान रहा है। स्वर्गीय गिरिजा प्रसाद मिश्र ने प्रारंभिक दौर में मार्गदर्शन प्रदान किया। स्वर्गीय लक्षपत प्रसाद त्रिपाठी ‘मददगार’ ने संरक्षक के रूप में समिति को सहयोग दिया।
इसी प्रकार स्वर्गीय पुरुषोत्तम दास मिश्र ने अपनी कर्मठता और समर्पण से आयोजन को मजबूती प्रदान की। स्वर्गीय एच.एस. दास ने पूजा कार्यक्रमों को व्यवस्थित और भव्य स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इन सभी सदस्यों के योगदान को महोत्सव की ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
वरिष्ठ सदस्यों के सहयोग से आगे बढ़ रही परंपरा
जागृति दुर्गा पूजा महोत्सव को निरंतर संचालित करने में समिति के वरिष्ठ सदस्यों का भी उल्लेखनीय योगदान रहा है।
कन्हैयालाल मिश्र, उमेश सिंह, घनश्याम राजपूत, अरुण कुमार मिश्र, डॉ. चंद्रकांत गर्ग, मुख्य कार्यकारी सदस्य राजेंद्र वर्मन, भरत रैकवार तथा विद्युत सुरक्षा विभाग से जुड़े अरुण कर्मकार सहित अन्य सदस्यों ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग दिया है।
समिति के सदस्यों का समर्पण और सामूहिक प्रयास इस धार्मिक आयोजन की निरंतरता का प्रमुख आधार रहा है।
नई पीढ़ी को सौंपी जा रही सांस्कृतिक विरासत
जागृति दुर्गा पूजा महोत्सव की विशेषता यह है कि इसमें वरिष्ठ पीढ़ी के अनुभव और युवाओं के उत्साह का समन्वय दिखाई देता है।
समय के साथ आयोजन का स्वरूप विकसित हुआ है, लेकिन मां भगवती के प्रति श्रद्धा और सामूहिक सहभागिता की भावना आज भी कायम है।
यह महोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि नगरवासियों के बीच पारिवारिक जुड़ाव, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक समरसता को भी प्रोत्साहित करता है।
43वें वर्ष में विशेष पूजा-अर्चना की तैयारी
महोत्सव के 43वें वर्ष के अवसर पर पूजा पंडाल में मां जगदंबा की पारंपरिक विधि-विधान से आराधना और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारी की गई है।
समिति ने समस्त धर्मप्रेमी नगरवासियों से महोत्सव में शामिल होकर मां भगवती के दर्शन एवं पूजा-अर्चना करने की अपील की है।
जागृति दुर्गा पूजा महोत्सव की 43 वर्षों की यात्रा उन सभी संस्थापक सदस्यों, दिवंगत विभूतियों और वर्तमान सहयोगियों के समर्पण की कहानी है, जिन्होंने अनूपपुर की इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत बनाए रखा है।
