मध्य प्रदेश में ऑनलाइन स्वगणना शुरू: घर बैठे नागरिक भर सकेंगे अपनी जानकारी, CM मोहन यादव ने खुद किया पंजीकरण
मध्य प्रदेश सरकार ने जनगणना 2027 की तैयारी के तहत एक बड़ा और ऐतिहासिक डिजिटल कदम उठाया है। राज्य में 16 अप्रैल से “स्वगणना पोर्टल” की शुरुआत कर दी गई है, जिसके माध्यम से अब नागरिक अपने घर बैठे ही अपनी और अपने परिवार की पूरी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। यह व्यवस्था भारत में जनगणना प्रक्रिया को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
इस नई व्यवस्था के तहत नागरिकों को अब जनगणना कर्मचारियों के आने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, बल्कि वे स्वयं पोर्टल पर लॉगिन करके अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी गुरुवार को भोपाल स्थित अपने सरकारी आवास पर जनगणना निदेशालय के स्वगणना पोर्टल पर पंजीकरण किया और स्वयं एवं अपने परिवार की जानकारी ऑनलाइन दर्ज की।
मुख्यमंत्री का यह कदम न केवल प्रशासनिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि यह आम नागरिकों को डिजिटल माध्यम से जुड़ने के लिए प्रेरित करने वाला भी है।
डिजिटल जनगणना की ओर बड़ा कदम
भारत में जनगणना एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है, जो हर दस साल में देश की जनसंख्या, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और विभिन्न वर्गों की स्थिति का व्यापक आंकलन करती है। इसी क्रम में मध्य प्रदेश ने इस बार तकनीक का उपयोग करते हुए जनगणना को डिजिटल स्वरूप देने की पहल की है।
स्वगणना पोर्टल के माध्यम से नागरिक अपनी व्यक्तिगत जानकारी, परिवार की स्थिति, आवासीय विवरण, शिक्षा, रोजगार और अन्य आवश्यक जानकारी ऑनलाइन भर सकते हैं। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य डेटा संग्रह को अधिक तेज, सटीक और पारदर्शी बनाना है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह देश की नीतियों और भविष्य की विकास योजनाओं की नींव है। उन्होंने कहा कि सही और सटीक डेटा के आधार पर ही सरकार प्रभावी योजनाएं बना सकती है और समाज के हर वर्ग तक लाभ पहुंचा सकती है।
राज्यपाल ने भी भरा स्वगणना फॉर्म
इस डिजिटल अभियान की शुरुआत को और अधिक महत्वपूर्ण बनाते हुए राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने भी स्वगणना पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज की। यह दर्शाता है कि राज्य का शीर्ष प्रशासन भी इस पहल को गंभीरता से अपना रहा है।
सरकार का मानना है कि जब शीर्ष स्तर के अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस प्रक्रिया में भाग लेते हैं, तो इससे आम नागरिकों में जागरूकता और विश्वास दोनों बढ़ता है।
33 प्रश्नों के माध्यम से होगी पूरी जानकारी दर्ज
स्वगणना पोर्टल पर नागरिकों को कुल 33 प्रश्नों का उत्तर देना होगा। इन प्रश्नों में परिवार से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल हैं, जैसे—
- परिवार के सदस्यों की संख्या
- आयु और लिंग संबंधी विवरण
- शिक्षा का स्तर
- रोजगार और व्यवसाय
- आवास की स्थिति
- सामाजिक और आर्थिक वर्ग
- अन्य आवश्यक जनसांख्यिकीय जानकारी
सरकार ने इस प्रक्रिया को इस तरह डिजाइन किया है कि नागरिक आसानी से और सरल भाषा में अपनी जानकारी भर सकें।
समय सीमा और प्रक्रिया
सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्वगणना पोर्टल 30 अप्रैल तक खुला रहेगा। इस अवधि में नागरिक सुबह 6 बजे से रात 12 बजे तक कभी भी अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं।
इसके बाद 1 मई से जनगणना का दूसरा चरण शुरू होगा, जिसमें जनगणना कर्मचारी यानी प्रगणक (census enumerators) घर-घर जाकर मकानों की सूची तैयार करेंगे और आवश्यक सत्यापन करेंगे।
इसके बाद फरवरी 2027 से वास्तविक जनगणना की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें अंतिम आंकड़े तैयार किए जाएंगे।
1.60 लाख कर्मचारियों की तैनाती
राज्य सरकार ने इस विशाल कार्य के लिए लगभग 1 लाख 60 हजार कर्मचारियों को तैनात किया है। ये कर्मचारी पूरे राज्य में जनगणना प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराने में सहायता करेंगे।
इन कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है ताकि वे डिजिटल और फील्ड दोनों स्तर पर सही तरीके से डेटा संग्रह कर सकें।
गलत जानकारी देने पर सख्त सजा का प्रावधान
सरकार ने इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सख्त नियम भी लागू किए हैं। यदि कोई व्यक्ति गलत या भ्रामक जानकारी देता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर 3 साल तक की सजा का प्रावधान रखा गया है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि जनगणना डेटा पूरी तरह से सही और विश्वसनीय रहे।
ई-गवर्नेंस की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
यह स्वगणना पोर्टल केवल जनगणना का एक माध्यम नहीं है, बल्कि इसे ई-गवर्नेंस की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक सेवाएं डिजिटल माध्यम से नागरिकों तक पहुंचाई जाएं।
इस प्रणाली से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि डेटा संग्रह में मानवीय त्रुटियों की संभावना भी कम होगी। साथ ही, ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में समान रूप से डेटा एकत्र करना आसान होगा।
CM का संदेश
CM डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह पहल मध्य प्रदेश को डिजिटल प्रशासन के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाएगी। उन्होंने कहा कि जब हर नागरिक अपनी जानकारी स्वयं दर्ज करेगा, तो इससे डेटा की गुणवत्ता में सुधार होगा और योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रक्रिया जनता और सरकार के बीच विश्वास को और मजबूत करेगी।
जनगणना का महत्व
जनगणना किसी भी देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इससे देश की जनसंख्या, सामाजिक संरचना और आर्थिक स्थिति का विस्तृत विवरण प्राप्त होता है। इसी डेटा के आधार पर सरकारें बजट, योजनाएं और नीतियां बनाती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जनगणना सटीक होती है, तो विकास योजनाएं अधिक प्रभावी बनती हैं और संसाधनों का सही वितरण संभव होता है।
नागरिकों में उत्साह
स्वगणना पोर्टल शुरू होने के बाद नागरिकों में उत्साह देखा जा रहा है। कई लोग इसे एक आसान और सुविधाजनक तरीका मान रहे हैं, जिससे उन्हें सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
डिजिटल माध्यम से डेटा भरने की यह सुविधा विशेष रूप से युवाओं और शहरी आबादी के लिए उपयोगी साबित हो रही है।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश में शुरू की गई यह स्वगणना पहल राज्य को डिजिटल प्रशासन की दिशा में एक नए युग में ले जाती है। मुख्यमंत्री मोहन यादव और राज्यपाल मंगुभाई पटेल की सक्रिय भागीदारी ने इस अभियान को और अधिक मजबूत बनाया है।
यह व्यवस्था न केवल जनगणना को आसान बनाएगी, बल्कि देश में ई-गवर्नेंस और डिजिटल इंडिया मिशन को भी नई गति देगी। आने वाले समय में यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।
