उज्जैन के ऐतिहासिक ‘दर्शनगिरी तीर्थ’ का होगा भव्य कायाकल्प: युवा शक्ति ने संभाली विकास की कमान | Ujjain Darshangiri Teerth Development News
उज्जैन, मध्यप्रदेश — धर्म नगरी उज्जैन के प्राचीन एवं ऐतिहासिक ‘दर्शनगिरी तीर्थ’ के सुनहरे भविष्य की शुरुआत हो गई है।
सदियों से अपनी आध्यात्मिक पहचान को संजोए यह तीर्थ अब नई ऊर्जा, नई सोच और युवा शक्ति के नेतृत्व में अपने सम्पूर्ण कायाकल्प की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जैन समाज के प्रमुख धर्म प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने जानकारी दी कि तीर्थ के विकास और जीर्णोद्धार की जिम्मेदारी अब समाज के युवाओं को सौंप दी गई है, जो इस पुनीत कार्य को मिशन भावना से आगे बढ़ा रहे हैं।
आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज का आशीर्वाद — नए युग की शुरुआत
श्रंमण संस्कृति के महामहिम पट्टाचार्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज तथा आचार्य संघ के मुनि श्री प्रणुत सागर जी के मंगल आशीर्वाद से यह परिवर्तन संभव हुआ है।
उनके मार्गदर्शन में पुरानी कमेटी ने यह ऐतिहासिक निर्णय लिया कि तीर्थ की जिम्मेदारियां युवा पीढ़ी को सौंपी जाएँ, ताकि आधुनिक दृष्टिकोण के साथ तीर्थ का विकास तेजी से और योजनाबद्ध ढंग से हो सके।
इस निर्णय को जैन समाज में “ऐतिहासिक पहल” कहा जा रहा है।
विश्व जैन संगठन और मयंक जैन की निर्णायक भूमिका
तीर्थ के कायाकल्प की पृष्ठभूमि में विश्व जैन संगठन और युवा सामाजिक कार्यकर्ता मयंक जैन का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।
कुछ समय पूर्व उन्होंने अपनी पूरी टीम के साथ दर्शनगिरी तीर्थ की बदहाल स्थिति को सामने लाते हुए बड़ी जिम्मेदारी निभाई—
- जर्जर स्थिति को सोशल मीडिया और समाज के मंचों पर प्रमुखता से उठाया
- स्वयं श्रमदान करते हुए सफाई अभियान चलाया
- क्षेत्र में व्यापक स्वच्छता और जागरूकता कार्य किया
- समाज को यह सोचने पर मजबूर किया कि तीर्थ का वैभव वापस लाने का समय आ चुका है
उनके इस प्रयास ने समाज में एक नई चेतना जगाई, जिसके परिणामस्वरूप आज ‘नवीन ट्रस्ट मंडल’ का गठन संभव हो पाया है।
नवीन ट्रस्ट मंडल का गठन — युवा नेतृत्व की मजबूत टीम
दर्शनगिरी तीर्थ के विकास के लिए बनाई गई नई समिति में समाज के ऊर्जावान और कर्मठ युवा शामिल किए गए हैं।
ये वे युवा हैं जो वर्षों से सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते आए हैं।
नवीन ट्रस्ट मंडल के नवनिर्वाचित पदाधिकारी:
- श्री अश्विन कासलीवाल
- श्री अभिषेक विनायका
- श्री चेतन राणा
- श्री हितेष जैन
- श्री नीरज सोगानी
- श्री अन्तिम जैन
- श्री गौरव लुहाड़िया
यह टीम आधुनिक योजना, पारदर्शिता, सामाजिक भागीदारी और तकनीकी दृष्टिकोण के साथ तीर्थ के संपूर्ण कायाकल्प का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है।
चेतन राणा और अभिषेक राणा की विशेष भूमिका
जैन समाज की ओर से चेतन राणा और अभिषेक राणा को विशेष रूप से सराहा गया है।
इन दोनों ने–
- समाज को संगठित किया
- युवाओं को एकजुट किया
- विकास मॉडल को जमीन पर उतारने में अहम भूमिका निभाई
- स्वयं श्रमदान से लेकर प्रोजेक्ट प्लानिंग तक सक्रिय योगदान दिया
समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों का मानना है कि इन युवाओं का समर्पण आगामी दिनों में दर्शनगिरी तीर्थ की तस्वीर बदलकर रख देगा।
एक नई उम्मीद—आस्था का भव्य केंद्र बनने की ओर कदम
जैन समाज के वरिष्ठजनों का विश्वास है कि युवा शक्ति के नेतृत्व में:
दर्शनगिरी तीर्थ का सौंदर्यीकरण होगा
पर्यटक सुविधाएँ बढ़ेंगी
ऐतिहासिक संरचनाओं का संरक्षण सुनिश्चित होगा
सफाई, व्यवस्था और सुरक्षा को उच्च स्तर मिलेगा
तीर्थ राष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन और आस्था का प्रमुख केंद्र बनेगा
राजेश जैन दद्दू ने कहा,
“युवाओं में जो उत्साह और संकल्प है, वह यह विश्वास दिलाता है कि दर्शनगिरी तीर्थ जल्द ही अपने गौरवशाली अतीत को पुनः प्राप्त करेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक दिव्य विरासत बनकर उभरेगा।”
समाज के शीर्ष पदाधिकारियों की शुभकामनाएँ
नवगठित टीम को जैन समाज के इन शीर्ष नेताओं ने शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह निर्णय ऐतिहासिक है और समाज को नई दिशा देगा—
- फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोहर झांझरी
- महावीर ट्रस्ट के अध्यक्ष अमित कासलीवाल
- हंसमुख गांधी
- टीके वेद
- डॉ. जैनेन्द्र जैन
- अनिल गंगवाल
- नवीन जैन
- राष्ट्रीय शिरोमणि संरक्षिका श्रीमती पुष्पा कासलीवाल
सभी ने उम्मीद जताई कि यह युवा टीम दर्शनगिरी तीर्थ को आधुनिकता और आध्यात्मिकता का श्रेष्ठ संगम बनाकर समाज को एक अनमोल धरोहर सौंपेगी।
निष्कर्ष: जैन समाज की नई पहल का ऐतिहासिक क्षण
दर्शनगिरी तीर्थ का कायाकल्प केवल एक विकास परियोजना नहीं, बल्कि समाज की भावनाओं, आस्था और एकता का प्रतीक बन चुका है।
युवा शक्ति के हाथों में आई बागडोर इस बात का संदेश देती है कि—
“जब समाज संगठित हो, संकल्प मजबूत हो और दिशा सही हो, तो इतिहास बदलने में समय नहीं लगता।”
दर्शनगिरी तीर्थ के इस नवीन अध्याय से न केवल उज्जैन बल्कि पूरे भारत का जैन समाज गर्व महसूस कर रहा है।
