खिरकिया से कुड़ावा सड़क बदहाल: गड्ढों में तब्दील हुई प्रधानमंत्री ग्राम सड़क, ग्रामीणों ने सीएम हेल्पलाइन में की शिकायत
मरम्मत के दावों के बावजूद नहीं सुधरे हालात, आवागमन में हो रही भारी परेशानी
संवाददाता दिनेश देवड़ा
हरदा। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत निर्मित खिरकिया से ग्राम कुड़ावा तक की सड़क इन दिनों अपनी बदहाल स्थिति को लेकर चर्चा का विषय बनी हुई है। कभी ग्रामीणों को बेहतर आवागमन की सुविधा देने के उद्देश्य से बनाई गई यह सड़क अब जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। सड़क की खराब हालत के कारण रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले ग्रामीणों, किसानों, विद्यार्थियों और वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
लगातार शिकायतों के बावजूद सड़क की स्थिति में कोई सुधार नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। अब परेशान होकर स्थानीय निवासी पवन विश्वकर्मा ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (CM Helpline) पर शिकायत दर्ज कराते हुए सड़क की तत्काल मरम्मत और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी थी सड़क
खिरकिया से कुड़ावा तक का यह सड़क मार्ग प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत बनाया गया था। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क प्रदान करना और गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़ना है, ताकि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और व्यापार जैसी आवश्यक सेवाओं तक लोगों की आसान पहुंच सुनिश्चित हो सके।
लेकिन समय के साथ सड़क की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि अब यह सुविधा की बजाय परेशानी का कारण बन गई है। कई स्थानों पर सड़क की ऊपरी परत पूरी तरह उखड़ चुकी है और बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं।
गड्ढों के कारण बढ़ रहा हादसों का खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर बने गहरे गड्ढों के कारण वाहन चालकों को काफी सावधानी से गुजरना पड़ता है। विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मार्ग बेहद जोखिम भरा बन चुका है।
बरसात के मौसम में गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका और अधिक बढ़ जाती है।
रोजाना इस मार्ग से स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र, किसान, मजदूर और अन्य ग्रामीण इसी सड़क का उपयोग करते हैं। खराब सड़क के कारण यात्रा में अधिक समय लगता है और वाहनों की मरम्मत पर अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ता है।
ग्रामीणों का आरोप: हर साल मरम्मत के नाम पर खर्च, लेकिन सड़क जस की तस
शिकायतकर्ता पवन विश्वकर्मा का आरोप है कि सड़क की देखरेख और मरम्मत की जिम्मेदारी ‘अमृत श्री इंफ्रा डेवलपर, हरदा’ नामक कंपनी के पास है।
ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष सड़क की मरम्मत के नाम पर राशि खर्च किए जाने की बात सामने आती है, लेकिन धरातल पर कोई प्रभावी कार्य दिखाई नहीं देता।
उनका आरोप है कि यदि नियमित और गुणवत्तापूर्ण मरम्मत कार्य किया गया होता तो सड़क की यह स्थिति नहीं होती।
हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पहले भी दिए गए थे आवेदन, नहीं हुई कार्रवाई

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब सड़क की खराब स्थिति को लेकर शिकायत की गई हो।
ग्रामीणों के अनुसार, इससे पहले भी कई बार संबंधित विभाग और अधिकारियों को लिखित आवेदन दिए गए थे। स्थानीय स्तर पर समस्या से अवगत कराने के बावजूद सड़क की मरम्मत के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
लगातार अनदेखी के कारण ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता गया और अंततः उन्हें मुख्यमंत्री हेल्पलाइन का सहारा लेना पड़ा।
सीएम हेल्पलाइन में दर्ज हुई शिकायत
जब स्थानीय स्तर पर समाधान नहीं मिला, तब ग्रामीण पवन विश्वकर्मा ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत में सड़क की बदहाल स्थिति, मरम्मत कार्य में कथित लापरवाही और आम लोगों को हो रही परेशानियों का उल्लेख किया गया है।
वर्तमान में शिकायत को निराकरण अधिकारी (L1 स्तर) पर भेजा गया है, जहां संबंधित विभाग से प्रगति रिपोर्ट मांगी गई है।
अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि हेल्पलाइन के माध्यम से मामले का शीघ्र समाधान होगा।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से कई मांगें रखी हैं। उनका कहना है कि केवल औपचारिक कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि सड़क का स्थायी और गुणवत्तापूर्ण सुधार आवश्यक है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें हैं—
- सड़क की तत्काल मरम्मत कराई जाए।
- सभी गड्ढों को गुणवत्तापूर्ण तरीके से भरा जाए।
- सड़क की तकनीकी जांच कराई जाए।
- यदि रखरखाव में लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार ठेकेदार पर कार्रवाई की जाए।
- भविष्य में नियमित निगरानी की व्यवस्था की जाए।
किसानों और विद्यार्थियों को सबसे अधिक परेशानी
खिरकिया से कुड़ावा मार्ग ग्रामीण क्षेत्र की जीवनरेखा माना जाता है।
इस सड़क का उपयोग बड़ी संख्या में किसान अपनी कृषि उपज मंडी तक पहुंचाने के लिए करते हैं। खराब सड़क के कारण परिवहन लागत बढ़ जाती है और समय भी अधिक लगता है।
इसके अलावा छात्र-छात्राओं को स्कूल और कॉलेज पहुंचने में कठिनाई होती है। बारिश के दौरान सड़क की स्थिति और अधिक खराब हो जाती है, जिससे कई बार आवागमन बाधित होने जैसी स्थिति बन जाती है।
वाहन चालकों पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ
खराब सड़क का असर केवल यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि वाहन चालकों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।
लगातार गड्ढों से गुजरने के कारण वाहनों के टायर, सस्पेंशन और अन्य पुर्जों को नुकसान पहुंचता है। इससे वाहन मालिकों को बार-बार मरम्मत करानी पड़ती है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत कर दी जाए तो लोगों को इस अतिरिक्त खर्च से राहत मिल सकती है।
ग्रामीणों में बढ़ता जा रहा आक्रोश
सड़क की लगातार अनदेखी से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि विकास योजनाओं का उद्देश्य लोगों को बेहतर सुविधाएं देना है, लेकिन यदि सड़कें ही उपयोग लायक नहीं रहेंगी तो योजनाओं का लाभ अधूरा रह जाएगा।
ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द कार्रवाई की जाए और सड़क को फिर से सुरक्षित एवं सुगम बनाया जाए।
प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज होने के बाद अब लोगों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है।
यदि संबंधित विभाग समय रहते सड़क की मरम्मत कराता है, तो इससे न केवल आवागमन आसान होगा बल्कि दुर्घटनाओं की संभावना भी कम होगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की मरम्मत केवल अस्थायी रूप से गड्ढे भरने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि पूरी सड़क का गुणवत्तापूर्ण पुनर्निर्माण या सुदृढ़ीकरण किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में बार-बार ऐसी समस्या उत्पन्न न हो।
समय 0पर कार्रवाई से लौट सकता है ग्रामीणों का विश्वास
खिरकिया से कुड़ावा तक की सड़क की खराब स्थिति ने ग्रामीणों की परेशानियों को बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज होने के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि संबंधित विभाग शीघ्र कार्रवाई करेगा और सड़क की मरम्मत का कार्य शुरू कराया जाएगा।
यदि प्रशासन समयबद्ध तरीके से इस समस्या का समाधान करता है, तो इससे न केवल ग्रामीणों को राहत मिलेगी बल्कि सरकारी योजनाओं और प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा। वहीं, यदि लापरवाही जारी रही तो ग्रामीणों का आक्रोश और बढ़ सकता है।
