बारिश ने रोकी चारधाम यात्रा, 15 हजार से ज्यादा तीर्थयात्री सुरक्षित स्थानों पर रोके गए; 128 सड़कें बंद
केदारनाथ, गंगोत्री-यमुनोत्री और हेमकुंड साहिब यात्रा प्रभावित, भूस्खलन और मलबे से कई मार्ग बाधित; मौसम देखकर आगे की यात्रा पर होगा फैसला
देहरादून। उत्तराखंड में लगातार बारिश और खराब मौसम के कारण चारधाम यात्रा प्रभावित हुई है। तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने केदारनाथ, गंगोत्री-यमुनोत्री और हेमकुंड साहिब की ओर जाने वाले 15 हजार से अधिक यात्रियों को अलग-अलग सुरक्षित स्थानों पर रोक दिया। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के कारण भूस्खलन, मलबा और बोल्डर गिरने से करीब 128 सड़कें बंद होने की खबर है। कई राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी यातायात प्रभावित हुआ।
केदारनाथ के करीब 5 हजार यात्री रोके
केदारनाथ धाम की ओर जाने वाले करीब पांच हजार यात्रियों को सोनप्रयाग, गौरीकुंड और गुप्तकाशी सहित विभिन्न स्थानों पर रोका गया है। करीब एक हजार यात्री केदारनाथ धाम में भी ठहरे हुए बताए गए हैं।
सोनप्रयाग और गौरीकुंड में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। खराब मौसम और यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए केदारनाथ पैदल मार्ग पर आवाजाही रोक दी गई। मौसम की स्थिति की समीक्षा के बाद यात्रा दोबारा शुरू करने पर निर्णय लिया जाएगा।
गंगोत्री-यमुनोत्री के 7 हजार यात्री रुके
गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा पर निकले करीब सात हजार तीर्थयात्रियों को बड़कोट, दोबाटा और खराड़ी सहित अन्य स्थानों पर रोका गया। बारिश के कारण गंगोत्री और यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग भी कई स्थानों पर बाधित हुआ।
प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि मौसम सामान्य होने और मार्ग सुरक्षित घोषित किए जाने तक आगे की यात्रा न करें।
हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी की यात्रा भी प्रभावित
खराब मौसम का असर हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी की यात्रा पर भी पड़ा। करीब 1100 तीर्थयात्री घांघरिया गुरुद्वारे में ठहरे हुए बताए गए, जबकि 200 से 300 यात्री आसपास के होटलों में रुके हैं। करीब 1200 यात्रियों को गोविंदघाट में रोका गया।
फूलों की घाटी की ओर जाने वाले करीब 200 पर्यटकों को भी सुरक्षा कारणों से आगे नहीं जाने दिया गया।
कालिंदी ट्रैक पर 18 ट्रैकर सुरक्षित
उत्तरकाशी के कालिंदी ट्रैक पर खराब मौसम के बीच 18 ट्रैकरों के फंसे होने की सूचना के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के मुताबिक सभी ट्रैकर बेस कैंप में सुरक्षित हैं और प्रशासन उनके संपर्क में है।
मौसम साफ होने की स्थिति में हेलीकॉप्टर से क्षेत्र की रेकी की तैयारी की गई है। संभावित रेस्क्यू पॉइंट के आसपास हेलीपैड भी चिह्नित किए गए हैं। आपात स्थिति से निपटने के लिए हेलीकॉप्टर के साथ एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को तैयार रखा गया है।
बागेश्वर में 43 ट्रैकर रोके
बागेश्वर जिले में भी खराब मौसम के कारण 43 ट्रैकरों को सुरक्षित स्थानों पर रोका गया। प्रशासन ने लोगों से मौसम की स्थिति सामान्य होने तक पहाड़ी क्षेत्रों में अनावश्यक ट्रैकिंग से बचने की सलाह दी है।
पौड़ी में मलबे की चपेट में आने से ग्रामीण की मौत
पौड़ी जिले की थलीसैंण तहसील के ग्वारी मल्ली गांव में एक मकान के पीछे चट्टान टूटने से आए मलबे में दबकर 50 वर्षीय बलवीर सिंह की मौत हो गई। बताया गया कि वह घर के पीछे बरसाती पानी की स्थिति देखने गए थे, इसी दौरान चट्टान टूटने से मलबे की चपेट में आ गए।
पुलिस और स्थानीय लोगों ने उन्हें बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान चलाया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
पिथौरागढ़-घाट हाईवे पर भी यातायात प्रभावित
पिथौरागढ़-घाट राष्ट्रीय राजमार्ग पर पहाड़ियों से पत्थर और बोल्डर गिरने के कारण करीब 29 घंटे तक यातायात बाधित रहने की खबर है। सड़क खोलने के लिए मशीनें लगाई गईं, जिसके बाद यातायात बहाल किया गया। एसडीआरएफ ने बड़ी संख्या में यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग से सुरक्षित निकालने में मदद की।
इधर श्रीनगर में भी बारिश और बदरीनाथ हाईवे के बाधित होने के कारण बदरीनाथ और केदारनाथ की ओर जाने वाले यात्रियों को आगे बढ़ने से रोका गया।
लगातार बदलते मौसम को देखते हुए प्रशासन ने तीर्थयात्रियों और पर्यटकों से मौसम तथा सड़क की आधिकारिक जानकारी लेने के बाद ही यात्रा शुरू करने और प्रशासन के सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
