हाथी प्रभावित गांव मुआवजा MP को लेकर अनूपपुर के जैतहरी क्षेत्र में मांग तेज हो गई है। युवा नेता सत्यनारायण राठौर ने छत्तीसगढ़ की तर्ज पर 1.20 से 1.30 लाख रुपये तक मुआवजा लागू करने, मैपिया राशि का समयबद्ध भुगतान और हाथी प्रभावित गांवों के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग की है।
बड़ी मांग: हाथी प्रभावित गांव मुआवजा MP में छत्तीसगढ़ जैसा मुआवजा लागू करने की उठी आवाज
रिपोर्ट : राजेश कुमार चौधरी
स्थान : अनूपपुर / जैतहरी
हाथी प्रभावित गांव मुआवजा MP की मांग हुई तेज
अनूपपुर। हाथी प्रभावित गांव मुआवजा MP को लेकर अब अनूपपुर जिले के जैतहरी क्षेत्र से बड़ी मांग सामने आई है। पिछले कई वर्षों से हाथियों के आतंक से परेशान ग्रामीणों ने अब मध्य प्रदेश सरकार से छत्तीसगढ़ की तर्ज पर मुआवजा नीति लागू करने की मांग तेज कर दी है। ग्रामीणों का कहना है कि फसल, मकान और जान-माल का नुकसान लगातार बढ़ रहा है, लेकिन वर्तमान मुआवजा व्यवस्था उनकी वास्तविक क्षति की भरपाई नहीं कर पा रही है।
इसी मुद्दे को लेकर युवा नेता सत्यनारायण राठौर ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि मध्य प्रदेश में भी छत्तीसगढ़ सरकार की तरह मकान क्षति पर 1.20 लाख से 1.30 लाख रुपये तक की सहायता राशि लागू की जाए। साथ ही वन विभाग द्वारा मिलने वाली मैपिया राशि का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
जैतहरी के इन गांवों में सबसे ज्यादा हाथियों का आतंक
हाथी प्रभावित गांव मुआवजा MP की मांग इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि जैतहरी जनपद पंचायत के कई गांव वर्षों से हाथी कॉरिडोर का हिस्सा बने हुए हैं।सबसे अधिक प्रभावित गांवों में शामिल हैं—
- चोलना
- चोई
- पड़रिया
- लहरपुर
- बेलिया
- बरबसपुर
- खैरहा
- डोला
इन गांवों में हर वर्ष हाथियों के झुंड खेतों में घुसकर फसल बर्बाद कर देते हैं। कई बार कच्चे मकानों को भी नुकसान पहुंचता है, जिससे गरीब परिवारों के सामने दोहरी आर्थिक परेशानी खड़ी हो जाती है।
छत्तीसगढ़ में मकान क्षति पर कितना मिलता है मुआवजा
ग्रामीणों ने बताया कि 18 नवंबर 2024 को छत्तीसगढ़ शासन के वन विभाग द्वारा जारी आदेश के तहत मकान क्षति पर सहायता राशि बढ़ाई गई है।
सामान्य क्षेत्रों में
- 25 प्रतिशत क्षति – 30,000 रुपये
- 50 प्रतिशत क्षति – 60,000 रुपये
- 75 प्रतिशत क्षति – 90,000 रुपये
- 100 प्रतिशत क्षति – 1,20,000 रुपये
पहाड़ी क्षेत्रों में
पूर्ण क्षति होने पर 1,30,000 रुपये तक आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है।ग्रामीणों का कहना है कि जब सीमा से लगे छत्तीसगढ़ के गांवों को यह सुविधा मिल सकती है, तो मध्य प्रदेश के हाथी प्रभावित गांवों को भी समान राहत मिलनी चाहिए।
MP में क्यों उठ रही है समान मुआवजा नीति की मांग
हाथी प्रभावित गांव मुआवजा MP को लेकर ग्रामीणों का आरोप है कि वर्तमान व्यवस्था में मुआवजा राशि बहुत कम है। इसके अलावा सर्वे, स्वीकृति और भुगतान की प्रक्रिया भी काफी लंबी होती है।इस कारण पीड़ित परिवारों को समय पर राहत नहीं मिल पाती। कई बार लोग कर्ज लेकर अपने मकान दोबारा बनाते हैं।ग्रामीणों का कहना है कि यदि छत्तीसगढ़ जैसी नीति लागू हो जाए तो प्रभावित परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।
सत्यनारायण राठौर ने क्या कहा
युवा नेता सत्यनारायण राठौर ने कहा—
“सीमा से लगे हमारे गांवों की स्थिति छत्तीसगढ़ से अलग नहीं है। जब वहां 1.20 लाख से 1.30 लाख रुपये तक मुआवजा दिया जा सकता है तो मध्य प्रदेश में क्यों नहीं? वन विभाग से मैपिया के नाम पर मिलने वाली राशि भी यहां के किसानों को समय पर नहीं मिल रही। शासन को चाहिए कि वह छत्तीसगढ़ के आदेश को आधार बनाकर मध्य प्रदेश में भी समान मुआवजा नीति लागू करे।”
उन्होंने कलेक्टर अनूपपुर, वन विभाग और राजस्व विभाग से इस विषय पर तत्काल बैठक बुलाकर प्रभावित परिवारों को राहत देने की मांग की।
ग्रामीणों की पीड़ा
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों का भय अब उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है।रातभर खेतों की रखवाली करनी पड़ती है। कई बार पूरा सीजन बर्बाद हो जाता है। फसल के साथ मकानों को भी नुकसान होता है।ग्रामीणों के अनुसार मुआवजा मिलने में महीनों लग जाते हैं और कई मामलों में पूरी क्षति की भरपाई भी नहीं हो पाती।इसी कारण अब हाथी प्रभावित गांव मुआवजा MP की मांग लगातार तेज होती जा रही है।
प्रमुख मांगें
ग्रामीणों और युवा नेता सत्यनारायण राठौर ने शासन से निम्न मांगें की हैं—
1. छत्तीसगढ़ जैसी मुआवजा नीति
वन्यप्राणियों द्वारा मकान क्षति पर 1.20 लाख से 1.30 लाख रुपये तक आर्थिक सहायता मध्य प्रदेश में भी लागू की जाए।
2. मैपिया राशि का समयबद्ध भुगतान
वन विभाग द्वारा प्रभावित किसानों को मिलने वाली मैपिया राशि निर्धारित समय सीमा में दी जाए।
3. विशेष राहत पैकेज
जैतहरी सहित हाथी प्रभावित क्षेत्रों को विशेष राहत पैकेज में शामिल कर किसानों और ग्रामीणों को अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराई जाए।
प्रशासन से बड़ी उम्मीद
ग्रामीणों का कहना है कि यदि शासन इस मांग पर सकारात्मक निर्णय लेता है तो हजारों प्रभावित परिवारों को राहत मिलेगी।अब सभी की नजर जिला प्रशासन और मध्य प्रदेश शासन के अगले कदम पर टिकी हुई है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी आवाज भोपाल तक पहुंचेगी और उन्हें भी छत्तीसगढ़ की तरह समान मुआवजा और समय पर सहायता मिल सकेगी।
निष्कर्ष
हाथी प्रभावित गांव मुआवजा MP का मुद्दा अब केवल आर्थिक सहायता का नहीं बल्कि प्रभावित परिवारों की सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन से जुड़ा विषय बन चुका है। सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष को देखते हुए विशेषज्ञ भी समय पर मुआवजा, प्रभावी राहत व्यवस्था और दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं। यदि मध्य प्रदेश सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाती है तो अनूपपुर सहित हाथी प्रभावित क्षेत्रों के हजारों ग्रामीणों को बड़ी राहत मिल सकती है।
