हरदोई ब्रिज हादसा: NH-731 पर निर्माणाधीन पुल का 70 फीट लंबा स्लैब गिरा, कई मजदूर गंभीर रूप से घायल
उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में सोमवार, 22 जून 2026 की सुबह एक बड़ा और गंभीर हादसा हो गया। लखनऊ–पलिया राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-731) पर शारदा नहर के ऊपर निर्माणाधीन पुल का एक विशालकाय स्लैब अचानक गिर गया। यह स्लैब करीब 70 फीट लंबा और भारी वजन का था, जो निर्माण कार्य के दौरान क्रेन की मदद से उठाया जा रहा था। इस दुर्घटना में कई मजदूर मलबे की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया।
यह पूरा निर्माण कार्य आरसीएल (RCL) कंपनी द्वारा किया जा रहा था। सुबह के समय पुल पर स्लैब चढ़ाने का कार्य चल रहा था, जिसे अत्यंत सावधानीपूर्वक पूरा किया जाना था। लेकिन इसी दौरान हुई एक चूक या तकनीकी असंतुलन ने पूरे कार्य को एक बड़े हादसे में बदल दिया। घटना के तुरंत बाद राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया।
कैसे हुआ पूरा हादसा?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उस समय पुल निर्माण स्थल पर दो बड़ी क्रेनों की मदद से 70 फीट लंबे सीमेंट के भारी स्लैब को ऊपर उठाया जा रहा था। यह प्रक्रिया अत्यंत संवेदनशील मानी जाती है क्योंकि इसमें वजन का संतुलन और क्रेन की सटीक पकड़ सबसे महत्वपूर्ण होती है।
जब दोनों क्रेनें स्लैब को धीरे-धीरे ऊपर उठा रही थीं, तभी अचानक एक तरफ का संतुलन बिगड़ गया। बताया जा रहा है कि या तो रस्सी का तनाव असमान हो गया या क्रेन की पकड़ में तकनीकी गड़बड़ी आ गई, जिससे भारी स्लैब अपना संतुलन खो बैठा। कुछ ही सेकंड में विशाल स्लैब नीचे की ओर गिर गया और सीधे नीचे काम कर रहे मजदूरों पर आ गिरा।
इस अचानक हुए हादसे से वहां मौजूद मजदूरों को संभलने का भी मौका नहीं मिला। कई मजदूर स्लैब और मलबे के नीचे दब गए, जबकि कुछ गंभीर रूप से घायल होकर दूर जा गिरे।
मौके पर मची अफरा-तफरी
जैसे ही स्लैब नीचे गिरा, पूरे निर्माण स्थल पर अफरा-तफरी मच गई। वहां मौजूद अन्य मजदूरों और कर्मचारियों में चीख-पुकार मच गई। लोग इधर-उधर भागने लगे और तुरंत घायलों को निकालने की कोशिश शुरू कर दी गई।
कई मजदूरों ने बिना समय गंवाए मलबा हटाने का प्रयास किया ताकि फंसे हुए साथियों को बाहर निकाला जा सके। लेकिन स्लैब का वजन इतना अधिक था कि इसे हटाना बेहद मुश्किल हो रहा था। इसी बीच किसी ने तुरंत प्रशासन को सूचना दी, जिसके बाद राहत एवं बचाव दल को मौके पर भेजा गया।
प्रशासन और पुलिस की त्वरित कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन हरकत में आ गया। कुछ ही समय में जिलाधिकारी अनुनय झा, पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा और शाहाबाद के उपजिलाधिकारी सुशील कुमार मिश्रा भारी पुलिस बल और राहत टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे।
अधिकारियों ने पहुंचते ही स्थिति का जायजा लिया और राहत कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए। मौके पर जेसीबी मशीनों और अन्य भारी उपकरणों को बुलाकर मलबा हटाने का काम शुरू किया गया। प्रशासन की प्राथमिकता तुरंत घायलों को सुरक्षित निकालकर अस्पताल पहुंचाने की रही।
रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी टीमें
घटना के बाद राहत और बचाव कार्य तेजी से शुरू किया गया। मलबे में फंसे मजदूरों को निकालने के लिए जेसीबी मशीनों और क्रेनों की मदद ली जा रही है। स्थानीय लोग भी बचाव कार्य में सहयोग करते नजर आए।
रेस्क्यू टीम लगातार यह सुनिश्चित करने में लगी हुई है कि मलबे के नीचे कोई भी मजदूर दबा न रह जाए। कई घायलों को पहले ही नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया जा चुका है, जहां उनका इलाज चल रहा है। कुछ मजदूरों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिससे प्रशासन की चिंता और बढ़ गई है।
निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर उठे सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इतने भारी स्लैब को उठाने और स्थापित करने की प्रक्रिया में अत्यंत सावधानी, प्रशिक्षित स्टाफ और पूरी सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य होती है।
यदि क्रेन संचालन या स्लैब संतुलन में थोड़ी भी चूक होती है, तो ऐसे बड़े हादसे हो सकते हैं। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों ने भी निर्माण कार्य की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं।
तकनीकी खामी या लापरवाही?
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि हादसा तकनीकी खराबी के कारण हुआ या फिर किसी प्रकार की मानवीय लापरवाही इसका कारण बनी। प्रारंभिक जांच में क्रेन से स्लैब उठाते समय संतुलन बिगड़ने की बात सामने आ रही है, लेकिन प्रशासन ने अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है।
संभावना जताई जा रही है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी, जिसमें यह देखा जाएगा कि निर्माण कंपनी ने सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया था या नहीं।
स्थानीय लोगों में आक्रोश और चिंता
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी काफी आक्रोश देखा गया। लोगों का कहना है कि बड़े निर्माण प्रोजेक्ट्स में अक्सर सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जाती है, जिससे मजदूरों की जान जोखिम में पड़ जाती है।
कई लोगों ने मांग की है कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।
प्रशासन की प्राथमिकता: राहत और इलाज
फिलहाल जिला प्रशासन की पूरी कोशिश घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने और रेस्क्यू ऑपरेशन को जल्द से जल्द पूरा करने पर केंद्रित है। अस्पतालों में डॉक्टरों की अतिरिक्त टीमों को तैनात किया गया है ताकि घायलों का तुरंत उपचार हो सके।
स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद हैं। जैसे-जैसे राहत कार्य आगे बढ़ेगा, मृतकों या घायलों की संख्या में बदलाव संभव है, हालांकि अभी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।
निष्कर्ष
हरदोई में हुआ यह भीषण हादसा एक बार फिर यह दिखाता है कि बड़े निर्माण प्रोजेक्ट्स में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है। एक 70 फीट लंबे स्लैब का अचानक गिरना न केवल निर्माण व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि मजदूरों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करता है।
अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच पर है, जो यह तय करेगी कि यह हादसा तकनीकी खराबी का नतीजा था या फिर किसी स्तर पर लापरवाही की वजह से यह बड़ा दुर्घटना हुई। फिलहाल राहत और बचाव कार्य जारी है और घायलों की स्थिति पर प्रशासन पूरी तरह नजर बनाए हुए है।
