मांडवगढ़ जैन तीर्थ की प्रतिष्ठा महोत्सव को लेकर चर्चा तेज, हार्दिक हुंडिया और रमेश मुथा ने रखे अपने-अपने पक्ष
प्रतिष्ठा महोत्सव की तैयारियों के बीच समाज में उठे सवाल, तीर्थ समिति अध्यक्ष ने दी सफाई
मांडू (धार)। मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक और प्राचीन श्री मांडवगढ़ जैन तीर्थ में प्रस्तावित प्रतिष्ठा महोत्सव को लेकर समाज के भीतर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। प्रतिष्ठा महोत्सव के आयोजन, उसकी धार्मिक मर्यादाओं, पारदर्शिता और कुछ व्यक्तियों की कथित भूमिका को लेकर समाज के अलग-अलग वर्गों की ओर से अपनी-अपनी राय सामने आ रही है। इसी क्रम में समाज के वरिष्ठ पत्रकार हार्दिक हुंडिया ने तीर्थ की प्रतिष्ठा और आयोजन को लेकर कई सुझाव एवं मांगें सार्वजनिक रूप से रखी हैं। वहीं श्री मांडवगढ़ जैन तीर्थ के अध्यक्ष रमेश मुथा ने भी इन सभी मुद्दों पर अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रतिष्ठा महोत्सव पूरी तरह धार्मिक परंपराओं और समाज की भावनाओं के अनुरूप आयोजित किया जाएगा।
हार्दिक हुंडिया ने धार्मिक मर्यादा बनाए रखने की अपील की
हार्दिक हुंडिया ने अपने संदेश में कहा कि मांडवगढ़ जैन तीर्थ केवल मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश के प्राचीन और ऐतिहासिक जैन तीर्थों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इस कारण यहां आयोजित होने वाला प्रतिष्ठा महोत्सव समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन की गरिमा बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने आग्रह किया कि जिन व्यक्तियों को लेकर समाज में विवाद या आपत्तियां हैं, उन्हें इस आयोजन से दूर रखा जाए। उनके अनुसार प्रतिष्ठा महोत्सव पूरी तरह शास्त्रसम्मत, धार्मिक परंपराओं और जैन शासन की मर्यादाओं के अनुरूप संपन्न होना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज की आस्था सर्वोपरि है और किसी भी प्रकार का विवाद इस आयोजन की पवित्रता को प्रभावित नहीं करना चाहिए।
सागर चंद्र को लेकर उठाई आपत्ति
हार्दिक हुंडिया ने अपने वक्तव्य में सागर चंद्र का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे व्यक्तियों को मांडवगढ़ जैसे ऐतिहासिक और पवित्र तीर्थ के प्रतिष्ठा महोत्सव से दूर रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह तीर्थ जैन समाज की अमूल्य धरोहर है और यहां केवल धार्मिक परंपराओं के अनुरूप ही कार्यक्रम आयोजित होने चाहिए।
उन्होंने कहा कि समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए आयोजन समिति को इस विषय पर पूरी स्पष्टता बनाए रखनी चाहिए ताकि किसी प्रकार का भ्रम या विवाद उत्पन्न न हो।

रमेश मुथा ने आरोपों पर दी स्पष्ट प्रतिक्रिया
श्री मांडवगढ़ जैन तीर्थ के अध्यक्ष रमेश मुथा ने इन सभी चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि सागर चंद्र का प्रतिष्ठा महोत्सव, जीर्णोद्धार कार्य अथवा तीर्थ के किसी भी आधिकारिक कार्यक्रम से कोई संबंध नहीं है।
उन्होंने कहा कि संबंधित व्यक्ति को न तो प्रतिष्ठा महोत्सव में आमंत्रित किया गया है और न ही किसी आधिकारिक निमंत्रण पत्र, पोस्टर, समिति या कार्यक्रम में उनका कोई उल्लेख किया गया है। उन्होंने समाज से अपील की कि अपुष्ट सूचनाओं पर विश्वास न करें और केवल अधिकृत जानकारी पर ही भरोसा करें।
रमेश मुथा ने कहा कि आयोजन समिति का उद्देश्य केवल धार्मिक परंपराओं के अनुरूप भव्य और सफल प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन करना है।
स्वामी भक्तों के लिए निःशुल्क आवास की घोषणा
प्रतिष्ठा महोत्सव की तैयारियों के बीच रमेश मुथा ने एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि मांडू जैसे ऐतिहासिक तीर्थ में आने वाले स्वामी भक्तों और साधार्मिक परिवारों की सुविधा के लिए एक भवन का निर्माण कराया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस भवन में कई स्वामी भक्तों को निःशुल्क फ्लैट उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। उनका कहना था कि यह पहल केवल वर्तमान आयोजन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भविष्य में भी तीर्थ आने वाले श्रद्धालुओं को स्थायी सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी।
उन्होंने कहा कि तीर्थ का विकास केवल मंदिर निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि श्रद्धालुओं की सुविधाओं का भी विस्तार होना चाहिए।
अनावश्यक खर्च से बचने की सलाह
हार्दिक हुंडिया ने अपने संदेश में प्रतिष्ठा महोत्सव के खर्च को लेकर भी सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों में अनावश्यक खर्च करने के बजाय समाज हित के कार्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उनका कहना था कि यदि प्रतिष्ठा महोत्सव के बाद उपलब्ध संसाधनों का उपयोग जरूरतमंद जैन साधार्मिक परिवारों को बसाने, उनके आवास और अन्य सुविधाओं के विकास में किया जाए तो यह जैन शासन की वास्तविक प्रभावना होगी।
उन्होंने आयोजन समिति से यह भी आग्रह किया कि प्रतिष्ठा महोत्सव पूर्ण होने के बाद आय-व्यय का विस्तृत विवरण समाज के समक्ष सार्वजनिक किया जाए, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और समाज का विश्वास और मजबूत हो।

मनीष मेहता ने शास्त्रसम्मत आयोजन की वकालत की
नागपुर से जैन समाज के वरिष्ठ सदस्य मनीष मेहता ने भी इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मांडवगढ़ प्रतिष्ठा महोत्सव पूरी तरह शास्त्रों और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप संपन्न होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह आयोजन किसी एक व्यक्ति या संस्था का नहीं, बल्कि पूरे जैन समाज की आस्था का विषय है। इसलिए सभी संप्रदायों के श्रद्धालुओं को इसमें सहभागिता करनी चाहिए और जैन शासन की जय-जयकार के साथ इसे सफल बनाना चाहिए।
उन्होंने देशभर के जैन समाज से बड़ी संख्या में प्रतिष्ठा महोत्सव में शामिल होने की अपील की।
देशभर के संतों और श्रद्धालुओं को आमंत्रण
आयोजन समिति के अनुसार, प्रतिष्ठा महोत्सव में विभिन्न गच्छाधिपतियों, आचार्यों, साधु-साध्वियों तथा देशभर से हजारों श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया गया है।
समिति का कहना है कि आयोजन पूरी धार्मिक परंपराओं, अनुशासन और शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार संपन्न कराया जाएगा। इसके लिए विभिन्न समितियों का गठन कर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
समाज में पारदर्शिता और एकता पर जोर
प्रतिष्ठा महोत्सव को लेकर सामने आए विभिन्न विचारों के बीच एक बात समान रूप से सामने आई है कि समाज में पारदर्शिता, धार्मिक मर्यादा और एकता बनाए रखना आवश्यक है।
जहां हार्दिक हुंडिया ने आयोजन में पारदर्शिता, धार्मिक शुचिता और सामाजिक उत्तरदायित्व पर जोर दिया, वहीं रमेश मुथा ने भी स्पष्ट किया कि आयोजन समिति समाज की भावनाओं का पूरा सम्मान करते हुए कार्य कर रही है और किसी भी विवादित व्यक्ति की आधिकारिक भूमिका नहीं है।
आने वाले दिनों में प्रतिष्ठा महोत्सव की तैयारियां और तेज होंगी। ऐसे में समाज की निगाहें इस बात पर भी रहेंगी कि आयोजन किस प्रकार धार्मिक गरिमा, अनुशासन और पारदर्शिता के साथ संपन्न होता है तथा समाज की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरता है।
