हार्दिक हुंडिया ने जूनागढ़ में दिवाली बेन भील की प्रतिमा स्थापित कराई। पद्मश्री दिवाली बेन भील की प्रतिमा के अनावरण से जूनागढ़ में इतिहास रचा गया। जानिए इस ऐतिहासिक पहल की पूरी खबर।
हार्दिक हुंडिया ने जूनागढ़ में दिवाली बेन भील की प्रतिमा स्थापित कराई
जूनागढ़ वासियों को प्रतिदिन स्वर कोकिला दिवाली बेन के दर्शन का मिलेगा सौभाग्य
जूनागढ़। पत्रकार हार्दिक हुंडिया ने जूनागढ़ में पद्मश्री दिवाली बेन भील की प्रतिमा स्थापित करवाकर एक ऐतिहासिक कार्य किया है। इस पहल से न केवल देश के पत्रकार जगत का गौरव बढ़ा है, बल्कि जैन, आदिवासी और सनातन समाज की एकता का भी प्रेरणादायी संदेश पूरे देश में पहुंचा है।
2 जून की तारीख जूनागढ़ के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होने जा रही है। इसी दिन बस स्टैंड सर्कल जूनागढ़ में पद्मश्री दिवाली बेन भील की प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा, जिसके साक्षी संपूर्ण जूनागढ़वासी बनेंगे।
पद्मश्री दिवाली बेन भील की प्रतिमा स्थापना का निर्णय
संतों और महंतों की पावन धरती जूनागढ़ पर दुनिया भर में प्रसिद्ध लोक गायिका पद्मश्री दिवाली बेन भील में माता शबरी के दर्शन कर मुंबई के हीरा माणेक ग्रुप के हार्दिक भाई हुंडिया ने उनके सम्मान में प्रतिमा स्थापित करने का संकल्प लिया।
हार्दिक भाई हुंडिया का मानना है कि दिवाली बेन भील केवल एक लोक गायिका नहीं थीं, बल्कि वे आदिवासी संस्कृति, लोक परंपरा और भारतीय मूल्यों की सशक्त प्रतिनिधि थीं। उनकी कला और समाज सेवा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से यह प्रतिमा स्थापित की जा रही है।
हार्दिक हुंडिया ने स्वयं सौंपी प्रतिमा
प्रतिमा तैयार होने के बाद हार्दिक भाई हुंडिया विशेष रूप से मुंबई से जूनागढ़ पहुंचे। उन्होंने यह प्रतिमा जूनागढ़ म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन को समर्पित करने का निर्णय लिया।
2 जून 2025 को दिवाली बेन भील की प्रतिमा को सुसज्जित बग्गी में विराजमान कर वंजारी चौक से म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन कार्यालय तक भव्य शोभायात्रा निकाली गई।
इस दौरान नगर के नागरिकों ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया और दिवाली बेन भील के योगदान को याद किया।
अनेक गणमान्य व्यक्तियों की रही उपस्थिति
इस अवसर पर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन कमिश्नर ओम प्रकाश साहेब को प्रतिमा सौंपी गई।
कार्यक्रम में पद्मश्री हाजी रमकडू, अमुदान भाई गढ़वी, दिवाली बेन भील के भतीजे विजय भाई, हेमू गढ़वी के पुत्र बिहारी भाई, प्रसिद्ध कॉमेडियन धारशी बरेडिया सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
सभी अतिथियों ने हार्दिक हुंडिया की इस पहल की सराहना करते हुए इसे सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।
हार्दिक हुंडिया ने व्यक्त किया गौरव
हीरा माणेक अखबार के प्रधान संपादक हार्दिक हुंडिया ने कहा कि जूनागढ़ में पद्मश्री दिवाली बेन भील की प्रतिमा बनवाने और स्थापित करवाने का अवसर उनके जीवन का सबसे अनमोल क्षण है।
उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को भारतीय लोक संस्कृति, आदिवासी परंपराओं और सामाजिक समरसता की प्रेरणा देती रहेगी।
दिवाली बेन भील क्यों हैं विशेष?
आदिवासी संस्कृति की पहचान
पद्मश्री दिवाली बेन भील ने अपने लोकगीतों के माध्यम से गुजरात और आदिवासी समाज की संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
लोक संगीत की स्वर कोकिला
दिवाली बेन भील को लोक संगीत जगत में स्वर कोकिला के रूप में सम्मान प्राप्त था। उनके गीतों ने गांव-गांव तक भारतीय लोक संस्कृति को पहुंचाया।
सामाजिक एकता का प्रतीक
उनकी प्रतिमा का जूनागढ़ में स्थापित होना जैन, आदिवासी और सनातन समाज के बीच सामाजिक समरसता और एकता का सशक्त संदेश माना जा रहा है।
निष्कर्ष
पद्मश्री दिवाली बेन भील की प्रतिमा की स्थापना केवल एक स्मारक निर्माण नहीं, बल्कि लोक संस्कृति, आदिवासी गौरव और सामाजिक एकता का सम्मान है। पत्रकार हार्दिक हुंडिया की यह पहल जूनागढ़ के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद की जाएगी।
