जहां उम्मीद थमी, वहां बने सहारा: जमीन विवाद में भाजपा समर्थक मंच किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष रमेश अंकिले के प्रयासों से पीड़ित परिवार को मिली राहत
जनसेवा के माध्यम से विवाद के समाधान की मिसाल
भेरूंदा/Harda। समाज में ऐसे अनेक लोग होते हैं जो केवल अपने दायित्वों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि जरूरतमंद लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। हरदा जिले में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां भाजपा समर्थक मंच किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष रमेश अंकिले के प्रयासों से लंबे समय से चले आ रहे एक भूमि विवाद का समाधान संभव हो सका। उनके हस्तक्षेप और संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय के बाद पीड़ित परिवार को राहत मिली और विवाद का विधिसम्मत एवं शांतिपूर्ण निराकरण किया गया।
यह मामला केवल एक भूमि विवाद का समाधान भर नहीं है, बल्कि यह इस बात का उदाहरण भी है कि यदि किसी व्यक्ति को सही मार्गदर्शन, प्रशासनिक सहयोग और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप सहायता मिले तो वर्षों से लंबित समस्याओं का समाधान भी संभव हो सकता है।
लंबे समय से परेशान था पीड़ित परिवार
जानकारी के अनुसार, हरदा जिले के बहरागांव निवासी भगवान दास कनारे अपनी भूमि से जुड़े एक जटिल विवाद को लेकर लंबे समय से परेशान थे। जमीन से संबंधित विवाद के कारण उन्हें लगातार प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे थे। कई बार प्रयास करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा था, जिससे परिवार मानसिक तनाव और असुविधा का सामना कर रहा था।
भूमि विवाद ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे संवेदनशील विषयों में से एक माना जाता है। ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया, दस्तावेजों की जांच और राजस्व विभाग की कार्रवाई में समय लगना सामान्य बात है। इसी कारण कई परिवार वर्षों तक न्याय की प्रतीक्षा करते रहते हैं।
रमेश अंकिले ने स्वयं लिया मामले का संज्ञान
मामले की जानकारी मिलने पर भाजपा समर्थक मंच किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष रमेश अंकिले ने स्वयं इसमें रुचि दिखाई। उन्होंने पीड़ित परिवार से पूरे प्रकरण की जानकारी प्राप्त की और उपलब्ध दस्तावेजों का अध्ययन किया।
इसके बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर मामले की वस्तुस्थिति समझी और यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि विवाद का समाधान पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप हो।
बताया गया कि उन्होंने किसी भी प्रकार के दबाव या विवाद की स्थिति से बचते हुए केवल प्रशासनिक और विधिक प्रक्रिया के माध्यम से समाधान की दिशा में पहल की।
प्रशासनिक समन्वय से मिला समाधान
रमेश अंकिले के प्रयासों के बाद मामला कार्यालय तहसील एवं कार्यपालिक दंडाधिकारी, भेरूंदा (नसरुल्लागंज) के समक्ष पहुंचा। वहां आवश्यक दस्तावेजों की जांच, संबंधित पक्षों की प्रक्रिया और नियमानुसार कार्रवाई के बाद विवाद का शांतिपूर्ण समाधान किया गया।
इस प्रक्रिया के बाद पीड़ित पक्ष को राहत मिली और लंबे समय से चला आ रहा विवाद समाप्त हो सका। मामले के समाधान से यह भी स्पष्ट हुआ कि प्रशासनिक स्तर पर समयबद्ध और समन्वित प्रयास किए जाएं तो कई जटिल विवादों का निराकरण संभव है।
कानूनी प्रक्रिया को दी प्राथमिकता
रमेश अंकिले ने कहा कि किसी भी विवाद का समाधान हमेशा कानून के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि सामाजिक जीवन में शांति और विश्वास बनाए रखने के लिए विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी व्यक्ति का पक्ष लेना नहीं, बल्कि जरूरतमंद लोगों को उचित मार्गदर्शन देना और प्रशासन के माध्यम से उनकी समस्याओं के समाधान में सहयोग करना है।
‘समय पर न्याय हर नागरिक का अधिकार’
रमेश अंकिले ने कहा कि समाज के प्रत्येक नागरिक को समय पर न्याय मिलना चाहिए। यदि किसी जरूरतमंद व्यक्ति को सही जानकारी और उचित सहयोग मिल जाए तो वह अपनी समस्या का समाधान आसानी से प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने कहा कि भविष्य में भी यदि किसी जरूरतमंद व्यक्ति को कानूनी प्रक्रिया या प्रशासनिक मार्गदर्शन की आवश्यकता होगी तो वे जनहित में हरसंभव सहयोग करने के लिए तैयार रहेंगे।
ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि विवाद बड़ी चुनौती
ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि विवाद अक्सर सामाजिक और आर्थिक तनाव का कारण बनते हैं। सीमांकन, नामांतरण, स्वामित्व, बंटवारा और राजस्व अभिलेखों से जुड़े विवाद कई बार वर्षों तक लंबित रहते हैं।
ऐसे मामलों में समय पर सुनवाई और प्रशासनिक कार्रवाई होने से न केवल संबंधित परिवारों को राहत मिलती है, बल्कि सामाजिक सौहार्द भी बना रहता है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि भूमि विवादों का समाधान हमेशा दस्तावेजों और कानून के आधार पर ही होना चाहिए।
क्षेत्रवासियों ने जताया आभार
मामले के समाधान के बाद क्षेत्र के लोगों ने रमेश अंकिले के प्रयासों की सराहना की। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उन्होंने संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ पीड़ित परिवार की समस्या को समझा और समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल की।
लोगों ने उम्मीद जताई कि समाज के अन्य जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता भी इसी प्रकार जरूरतमंद लोगों की समस्याओं के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
जनसेवा की भावना बनी पहचान
रमेश अंकिले का कहना है कि जनसेवा केवल चुनावी या राजनीतिक दायित्व नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और सहायता पहुंचाना ही उनका उद्देश्य है।
उन्होंने कहा कि जब किसी परिवार की वर्षों पुरानी समस्या का समाधान होता है तो उससे मिलने वाली संतुष्टि किसी भी सम्मान से अधिक होती है। यही भावना उन्हें लगातार समाजहित में कार्य करने की प्रेरणा देती है।
समाज के लिए सकारात्मक संदेश
यह प्रकरण इस बात का संदेश देता है कि यदि नागरिक, सामाजिक संगठन और प्रशासन आपसी समन्वय के साथ कार्य करें तो जटिल समस्याओं का समाधान भी शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से संभव है।
हालांकि, किसी भी भूमि विवाद का अंतिम समाधान संबंधित राजस्व एवं न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार ही होता है। ऐसे मामलों में सभी पक्षों का सहयोग और प्रशासनिक पारदर्शिता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
रमेश अंकिले के प्रयासों से पीड़ित परिवार को मिली राहत को क्षेत्र में सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की ऐसी सक्रियता समाज में विश्वास को मजबूत करती है तथा जरूरतमंद लोगों को न्याय प्राप्त करने का हौसला देती है।
— राजकुमार मौर्य
हरदा सिटी रिपोर्टर
दैनिक स्वराज वाणी, हरदा
