निमाड़-मालवा के रेल सपने को नई रफ्तार, खंडवा-अलीराजपुर ब्रॉडगेज लाइन से खुलेंगे विकास के रास्ते
कुक्षी-सिंघाना-राजपुर-खरगोन होते हुए खंडवा से जुड़ने की उम्मीद, सर्वे के बाद DPR की प्रक्रिया पर टिकी क्षेत्रवासियों की नजर
मनावर, जिला धार। पश्चिम निमाड़ और मालवा के बड़े हिस्से को रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली प्रस्तावित खंडवा-अलीराजपुर नई ब्रॉडगेज रेल लाइन को लेकर क्षेत्रवासियों की उम्मीदें एक बार फिर बढ़ गई हैं। लंबे समय से चली आ रही रेल कनेक्टिविटी की मांग के बीच करीब 250 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित रेलमार्ग के अंतिम स्थान सर्वेक्षण (FLS) को मंजूरी मिलने के बाद परियोजना को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ी है। सर्वे के लिए करीब 6.25 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई थी।
दिसंबर 2025 में संसद में दी गई जानकारी के अनुसार परियोजना का फुट-टू-फुट सर्वे और ड्रोन मैपिंग सहित अंतिम स्थान सर्वेक्षण किया जा रहा था। प्रस्तावित रेलमार्ग के जरिए खंडवा, खरगोन, बड़वानी, धार और अलीराजपुर क्षेत्र को बेहतर रेल संपर्क मिलने की संभावना है।
कुक्षी-सिंघाना से गुजर सकता है प्रस्तावित कॉरिडोर
क्षेत्र में सामने आए संभावित रूट विवरण के अनुसार रेलमार्ग अलीराजपुर क्षेत्र से निकलकर नानपुर, धोलिया, कुक्षी, तलवाड़ा, सिंघाना, बोरलाई, राजपुर, जुलवानिया, सेगांव, खरगोन और भीकनगांव जैसे क्षेत्रों से होते हुए खंडवा की ओर पहुंच सकता है।
मनावर क्षेत्र के लिए सिंघाना के आसपास प्रस्तावित रेल संपर्क विशेष महत्व रखता है। यदि अंतिम एलाइनमेंट इसी दिशा में तय होता है तो मनावर-कुक्षी सहित आसपास के ग्रामीण और आदिवासी अंचलों को रेल नेटवर्क का बड़ा लाभ मिल सकता है। हालांकि रेलवे की औपचारिक मंजूरी के बाद ही अंतिम रूट और स्टेशनों की स्थिति स्पष्ट होगी।
नर्मदा पर रेल पुल होगा अहम कड़ी
प्रस्तावित मार्ग में नर्मदा नदी का क्षेत्र परियोजना की महत्वपूर्ण तकनीकी चुनौतियों में शामिल हो सकता है। बोरलाई के आसपास नर्मदा पर बड़े रेल पुल की आवश्यकता पड़ सकती है। इसके अलावा पहाड़ी भूभाग, नदी-नाले, कृषि भूमि और अन्य भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर अंतिम एलाइनमेंट तय किया जाना है।
इसी कारण अंतिम स्थान सर्वेक्षण किसी भी नई रेल परियोजना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसमें जमीन की वास्तविक स्थिति, संभावित स्टेशन, पुल-पुलिया, सुरंग या अन्य संरचनाओं की जरूरत और परियोजना की अनुमानित लागत का अध्ययन किया जाता है।
किसानों और व्यापारियों को मिल सकता है फायदा
नई रेल लाइन बनने पर निमाड़ के कृषि और व्यापार क्षेत्र को बड़ा परिवहन विकल्प मिल सकता है। निमाड़ में उत्पादित कपास, मिर्च, अनाज और अन्य कृषि उपज को देश के बड़े बाजारों तक पहुंचाने में रेल परिवहन उपयोगी साबित हो सकता है।
रेल संपर्क से माल परिवहन के लिए सड़क पर निर्भरता कम होने और समय तथा लागत में बचत की संभावना है। इससे खरगोन, बड़वानी, धार और अलीराजपुर के व्यापारिक केंद्रों के लिए नए बाजारों तक पहुंच आसान हो सकती है।
इस प्रस्तावित रेल संपर्क को खंडवा से गुजरात की दिशा में वैकल्पिक मार्ग विकसित करने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आदिवासी अंचल को बेहतर कनेक्टिविटी की उम्मीद
धार, बड़वानी और अलीराजपुर के कई आदिवासी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में रेल संपर्क अभी सीमित है। ऐसे में नई लाइन से केवल यात्री सुविधा ही नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, व्यापार और पर्यटन से जुड़े अवसरों तक पहुंच बेहतर होने की संभावना है।
रेल नेटवर्क से जुड़ने के बाद विद्यार्थियों, श्रमिकों, किसानों और व्यापारियों के लिए इंदौर, खंडवा, गुजरात और देश के अन्य हिस्सों की ओर आवागमन के नए विकल्प विकसित हो सकते हैं।
अब DPR और अंतिम मंजूरी पर निगाहें
नई रेल लाइन की प्रक्रिया में सर्वे के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR, लागत आकलन, अंतिम एलाइनमेंट, वित्तीय स्वीकृति और आवश्यक भूमि संबंधी प्रक्रिया महत्वपूर्ण चरण होते हैं।
मार्च 2026 में सामने आई स्थानीय रिपोर्टों में सर्वे पूरा होने और DPR की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ने का उल्लेख किया गया था। हालांकि निर्माण कब शुरू होगा, कितनी राशि खर्च होगी और कौन-कौन से स्टेशन अंतिम रूप से बनाए जाएंगे, इसका फैसला रेलवे की औपचारिक स्वीकृति के बाद ही स्पष्ट होगा।
निमाड़ के विकास की नई धुरी बनने की उम्मीद
खंडवा-अलीराजपुर रेल परियोजना को क्षेत्रवासी केवल एक नई रेल लाइन के रूप में नहीं, बल्कि पूर्वी और पश्चिमी निमाड़ को जोड़ने वाली संभावित विकास धुरी के रूप में देख रहे हैं। इससे कृषि परिवहन, स्थानीय व्यापार, रोजगार और क्षेत्रीय आवागमन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
अब क्षेत्रवासियों की निगाहें DPR, अंतिम एलाइनमेंट, परियोजना स्वीकृति, बजट और निर्माण की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं। यदि प्रस्तावित रेल कॉरिडोर को अंतिम मंजूरी और आवश्यक बजट मिलता है तो यह पश्चिम निमाड़ और आदिवासी अंचल के परिवहन मानचित्र में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।
