हमारे शिक्षक ऐप में बड़ी तकनीकी खामी सामने आई। रियावन संकुल के शासकीय प्राथमिक विद्यालय मावता में शिक्षक को स्कूल में मौजूद होने के बावजूद ऐप ने 84 लाख मीटर दूर बताया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
हमारे शिक्षक ऐप की बड़ी लापरवाही: स्कूल में मौजूद शिक्षक को 84 लाख मीटर दूर बताया, शिक्षकों में भारी आक्रोश
संवाददाता: अर्जुन कुमावत, पिपलोदा
हमारे शिक्षक ऐप एक बार फिर तकनीकी खामियों को लेकर चर्चा में है। शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों की ऑनलाइन ई-अटेंडेंस के लिए अनिवार्य बनाया गया हमारे शिक्षक ऐप अब स्वयं सवालों के घेरे में आ गया है। रतलाम जिले के रियावन संकुल अंतर्गत शासकीय प्राथमिक विद्यालय मावता में सामने आए एक मामले ने विभाग की तकनीकी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं।
शिक्षकों का कहना है कि वे समय पर विद्यालय पहुंचकर बच्चों को पढ़ाने के लिए पूरी निष्ठा से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन हमारे शिक्षक ऐप की तकनीकी त्रुटियों के कारण उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
क्या है पूरा मामला?
रियावन संकुल के अंतर्गत संचालित शासकीय प्राथमिक विद्यालय मावता में पदस्थ शिक्षक भंवरलाल कुमावत प्रतिदिन की तरह निर्धारित समय पर विद्यालय पहुंचे। उन्होंने विभाग द्वारा अनिवार्य किए गए हमारे शिक्षक ऐप के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास किया।लेकिन जैसे ही उन्होंने टाइम-इन करने की प्रक्रिया शुरू की, ऐप ने चौंकाने वाला संदेश दिखा दिया।ऐप में लिखा आया—
“आप GPS MAVTA-2 (1 to 5) से 8482398m दूर हैं। टाइम-आउट के लिए कृपया 200m के भीतर रहें।”
यानी शिक्षक को विद्यालय परिसर में खड़े होने के बावजूद लगभग 84,82,398 मीटर (करीब 8482 किलोमीटर) दूर बताया गया।
स्कूल में मौजूद शिक्षक को बताया हजारों किलोमीटर दूर
यह तकनीकी त्रुटि इसलिए और अधिक गंभीर मानी जा रही है क्योंकि शिक्षक विद्यालय परिसर में मौजूद थे।
विद्यालय के जीपीएस से हजारों किलोमीटर दूर दिखाना यह दर्शाता है कि हमारे शिक्षक ऐप में लोकेशन सिस्टम गंभीर तकनीकी समस्या से जूझ रहा है।यदि इसी प्रकार की त्रुटियां जारी रहती हैं तो शिक्षकों की उपस्थिति प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर उनके सेवा रिकॉर्ड पर पड़ सकता है।
शिक्षक भी मावता के निवासी
इस पूरे मामले की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि शिक्षक भंवरलाल कुमावत स्वयं मावता गांव के निवासी हैं।उनका विद्यालय भी उसी गांव में स्थित है। इसके बावजूद हमारे शिक्षक ऐप द्वारा उन्हें हजारों किलोमीटर दूर दिखाना विभाग की तकनीकी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गांव के निवासी शिक्षक को भी ऐप सही लोकेशन नहीं दिखा पा रहा है तो दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत अन्य शिक्षकों की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
शिक्षकों में भारी आक्रोश
इस घटना के बाद क्षेत्र के शिक्षकों में नाराजगी देखी जा रही है।शिक्षकों का कहना है कि विभाग तकनीकी व्यवस्था मजबूत किए बिना ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य कर रहा है।उनका कहना है कि जब ऐप सही तरीके से काम ही नहीं कर रहा तो तकनीकी त्रुटियों की जिम्मेदारी शिक्षकों पर क्यों डाली जा रही है।शिक्षकों का मानना है कि उनका समय बच्चों को पढ़ाने में लगना चाहिए, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में उन्हें बार-बार ऐप, जीपीएस और इंटरनेट संबंधी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।
शिक्षा विभाग पर उठे सवाल
इस घटना ने शिक्षा विभाग की ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
- क्या ऐप का GPS सिस्टम सही तरीके से कार्य कर रहा है?
- क्या सभी विद्यालयों की लोकेशन सही अपडेट की गई है?
- यदि तकनीकी खराबी हो तो शिक्षक की उपस्थिति कैसे दर्ज होगी?
- क्या ऐसे मामलों में शिक्षकों को अनुपस्थित माना जाएगा?
इन सवालों का जवाब फिलहाल विभाग के पास स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता।
तकनीकी व्यवस्था में सुधार की मांग
शिक्षकों ने मांग की है कि हमारे शिक्षक ऐप की तकनीकी कमियों को तत्काल दूर किया जाए।यदि जीपीएस आधारित उपस्थिति व्यवस्था लागू करनी है तो पहले उसकी विश्वसनीयता सुनिश्चित की जाए।शिक्षकों का कहना है कि बिना पर्याप्त तकनीकी तैयारी के लागू की गई ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था शिक्षकों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।उनका कहना है कि या तो तकनीकी समस्याओं का स्थायी समाधान किया जाए अथवा इस तरह की अव्यावहारिक व्यवस्था को बंद किया जाए ताकि शिक्षक बिना किसी तनाव के शिक्षण कार्य कर सकें।
निष्कर्ष
रियावन संकुल के शासकीय प्राथमिक विद्यालय मावता का यह मामला केवल एक शिक्षक की समस्या नहीं बल्कि ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल है।जब हमारे शिक्षक ऐप विद्यालय में मौजूद शिक्षक को ही हजारों किलोमीटर दूर दिखा रहा है तो इससे स्पष्ट है कि तकनीकी व्यवस्था में गंभीर सुधार की आवश्यकता है।शिक्षकों की मांग है कि विभाग जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करे ताकि शिक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो और शिक्षक अनावश्यक तकनीकी परेशानियों से मुक्त होकर विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण पर पूरा ध्यान दे सकें।
