मासोद में महिलाओं ने किया हरछठ माता का पूजन, पुत्रों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की मांगी कामना
हलषष्ठी पर्व पर माताओं ने रखा व्रत, हरछठ माता की आकृति बनाकर किया विधि-विधान से पूजन; पांच प्रकार की लाई का प्रसाद एक-दूसरे को किया भेंट
सुबह से ही गांव में हरछठ माता के पूजन का सिलसिला शुरू हो गया था। महिलाओं ने धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक विधि के अनुसार पूजा की। घरों में विशेष तैयारियां की गईं और महिलाओं ने सामूहिक रूप से पर्व की परंपराओं का निर्वहन किया।
दीवार पर बनाई हरछठ माता की आकृति
महिलाओं ने बताया कि हरछठ पर्व पर दीवार पर गोबर से हरछठ माता की आकृति बनाई जाती है। इसके बाद काश सहित निर्धारित पूजन सामग्री से माता की पूजा-अर्चना की जाती है।
पूजन के दौरान महिलाओं ने अपने पुत्रों की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। धार्मिक मान्यता के अनुसार हलषष्ठी व्रत संतान, विशेषकर पुत्र की लंबी आयु और उसके जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने की कामना से किया जाता है।
पांच प्रकार की लाई का बनाया प्रसाद
पूजा के बाद महिलाओं ने परंपरा के अनुसार ज्वार, मक्का, महुआ, चना और तुअर सहित विभिन्न अनाजों से तैयार लाई को प्रसाद के रूप में एक-दूसरे को भेंट किया।
इसके लिए महुआ के पत्तों और मिट्टी के छोटे पात्रों का उपयोग किया गया। महिलाओं ने एक-दूसरे को प्रसाद देकर पर्व की शुभकामनाएं भी दीं।
भगवान बलराम के जन्म से जुड़ी है मान्यता
श्रद्धालु आशा जायसवाल, कुसुम जायसवाल, रेखा जायसवाल, अनुराधा सोना, ज्योति सोनी, काजल ठाकुर, वंदना ठाकुर और ममता ठाकुर सहित अन्य महिलाओं ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम का जन्म हुआ था।
भगवान बलराम का प्रमुख आयुध हल माना जाता है, इसलिए इस पर्व को हलषष्ठी के नाम से भी जाना जाता है। विभिन्न क्षेत्रों में इसे हरछठ सहित अलग-अलग स्थानीय नामों से मनाने की परंपरा है।
व्रत में हल से जुते खेत का अन्न नहीं करतीं ग्रहण
महिलाओं ने बताया कि हलषष्ठी व्रत में कई विशेष धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाता है। मान्यता के अनुसार व्रत रखने वाली महिलाएं हल से जोती गई भूमि में पैदा हुए अनाज का सेवन नहीं करती हैं।
इसके साथ ही गाय के दूध और घी का सेवन भी नहीं करने की परंपरा बताई जाती है। महिलाएं व्रत के दौरान निर्धारित खाद्य सामग्री ग्रहण कर धार्मिक नियमों का पालन करती हैं।
पुत्रों की दीर्घायु के लिए की प्रार्थना
ग्राम मासोद में महिलाओं ने सामूहिक रूप से हरछठ माता का पूजन कर परिवार और संतान के कल्याण की प्रार्थना की। महिलाओं का मानना है कि श्रद्धा और विधि-विधान से हरछठ माता की पूजा करने से संतान की रक्षा होती है और जीवन में आने वाले संकट दूर होते हैं।
पूजन के बाद महिलाओं ने एक-दूसरे को प्रसाद वितरित किया। पूरे दिन ग्राम मासोद में हलषष्ठी पर्व को लेकर धार्मिक और उत्साहपूर्ण वातावरण बना रहा।
