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Gwalior में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा: महिला पटवारी पति के साथ मिलकर चला रही थी रिश्वत का ‘प्राइवेट दफ्तर’, लोकायुक्त ने रंगेहाथ पकड़ा

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Published On: 20 June 2026
Gwalior
— ग्वालियर में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा महिला पटवारी पति के साथ मिलकर रिश्वत का नेटवर्क चला रही थी, लोकायुक्त ने रंगेहाथ पकड़ा।

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Gwalior में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा: महिला पटवारी पति के साथ मिलकर चला रही थी रिश्वत का ‘प्राइवेट दफ्तर’, लोकायुक्त ने रंगेहाथ पकड़ा

Gwalior में लोकायुक्त पुलिस ने एक बड़े भ्रष्टाचार मामले का पर्दाफाश किया है, जहां एक महिला पटवारी पर गंभीर आरोप साबित हुए हैं। पटवारी रेखा शाक्य को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा गया है। इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि वह अपने पति के साथ मिलकर एक संगठित तरीके से रिश्वतखोरी का नेटवर्क चला रही थी और इसके लिए एक निजी दफ्तर तक संचालित किया जा रहा था।

पति के साथ मिलकर चल रहा था रिश्वत का नेटवर्क

लोकायुक्त जांच में सामने आया है कि महिला पटवारी रेखा शाक्य अकेले नहीं बल्कि अपने पति कृष्णकांत शाक्य के साथ मिलकर इस पूरे रैकेट को संचालित कर रही थी। आरोप है कि जमीन से जुड़े मामलों जैसे नामांतरण और सीमांकन के बदले अवैध रूप से पैसे की मांग की जाती थी।

यह पूरा खेल एक सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा था, जिसमें शिकायतकर्ताओं को पहले फंसाया जाता था और फिर काम करवाने के नाम पर रिश्वत की मांग की जाती थी। खास बात यह है कि रिश्वत लेने के लिए एक अलग व्यक्ति के जरिए बातचीत कराई जाती थी ताकि सीधे तौर पर पटवारी का नाम सामने न आए।

नामांतरण के लिए मांगी गई थी 15 हजार रुपये की रिश्वत

यह मामला मुरार क्षेत्र के सिरसौद गांव से जुड़ा हुआ है, जहां मंशाराम नामक व्यक्ति ने अपनी बहन गुड्डी बाई की जमीन के सीमांकन और अपनी पत्नी सावित्री बाई के नाम पर नामांतरण के लिए आवेदन दिया था। शिकायतकर्ता के अनुसार, उसने सभी आवश्यक दस्तावेज जमा कर दिए थे, लेकिन इसके बावजूद उसका काम लंबे समय से लंबित रखा गया।

जब बार-बार चक्कर लगाने के बाद भी काम नहीं हुआ तो उसने पटवारी रेखा शाक्य से संपर्क किया। पटवारी ने उसे एक मोबाइल नंबर दिया और कहा कि इस नंबर पर बात कर लो, काम हो जाएगा। जब शिकायतकर्ता ने उस नंबर पर कॉल किया तो वह नंबर पटवारी के पति कृष्णकांत शाक्य का निकला।

पति के जरिए हुई डील, पहले भी ली गई रकम

शिकायतकर्ता के अनुसार, कृष्णकांत शाक्य ने फोन पर कहा कि नामांतरण का काम करवा दिया जाएगा, लेकिन इसके लिए 15 हजार रुपये देने होंगे। इस बातचीत के बाद सौदा तय हो गया। शुरुआती चरण में 3500 रुपये पहले ही ले लिए गए थे, और बाद में बाकी रकम की मांग की जा रही थी।

शिकायतकर्ता को संदेह होने पर उसने मामले की जानकारी लोकायुक्त पुलिस को दी। इसके बाद पूरी योजना बनाकर ट्रैप ऑपरेशन तैयार किया गया।

लोकायुक्त की कार्रवाई में रंगेहाथ गिरफ्तारी

Gwalior लोकायुक्त पुलिस ने शिकायत की पुष्टि करने के बाद जाल बिछाया। जैसे ही रिश्वत की दूसरी किस्त देने की प्रक्रिया शुरू हुई, टीम ने मौके पर पहुंचकर पटवारी रेखा शाक्य को रंगेहाथ पकड़ लिया। यह कार्रवाई बेहद गोपनीय तरीके से की गई, जिससे आरोपी बच नहीं सकीं।

इस कार्रवाई के दौरान यह भी सामने आया कि रिश्वत की पूरी डील पति के जरिए संचालित की जा रही थी, जो इस पूरे मामले को और गंभीर बनाता है।

प्राइवेट ऑफिस’ से चल रहा था रिश्वत का कारोबार

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि पटवारी ने एक अन्य पटवारी रणवीर पटेल की साझेदारी में एक निजी कार्यालय जैसा सेटअप तैयार कर रखा था। इसी जगह पर लोगों से अवैध रूप से पैसे लिए जाते थे और जमीन से जुड़े मामलों को निपटाने के लिए सौदे किए जाते थे।

यह पूरा सेटअप एक तरह से ‘रिश्वत का प्राइवेट ऑफिस’ बन चुका था, जहां सरकारी कामों को पैसों के बदले आगे बढ़ाया जाता था। इस खुलासे के बाद स्थानीय प्रशासन और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

एफआईआर दर्ज, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई

लोकायुक्त पुलिस ने इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। आरोपी पटवारी रेखा शाक्य के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। वहीं, इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि यह जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और यदि इसमें अन्य कर्मचारियों या सहयोगियों की संलिप्तता पाई जाती है तो उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन में मचा हड़कंप, जांच जारी

इस मामले के सामने आने के बाद ग्वालियर प्रशासन में हड़कंप मच गया है। राजस्व विभाग के अधिकारियों से भी इस पूरे प्रकरण पर जवाब मांगा जा सकता है। लोकायुक्त टीम अब यह भी जांच कर रही है कि क्या इस तरह के और मामले भी इसी नेटवर्क से जुड़े हुए हैं।

निष्कर्ष

Gwalior का यह मामला एक बार फिर सरकारी सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार की गंभीर तस्वीर पेश करता है। एक महिला पटवारी द्वारा अपने पति के साथ मिलकर रिश्वत का संगठित नेटवर्क चलाना न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि आम लोगों के भरोसे को भी झकझोरता है। लोकायुक्त की इस कार्रवाई को एक बड़ी सफलता माना जा रहा है, लेकिन अब देखना यह होगा कि आगे जांच में और क्या खुलासे सामने आते हैं।

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