Gwalior Jail Blackmailing Case: ग्वालियर सेंट्रल जेल अधीक्षक से ₹5 लाख की डिमांड,
ग्वालियर सेंट्रल जेल में ब्लैकमेलिंग का गंभीर मामला
मध्यप्रदेश के Gwalior Jail से एक सनसनीखेज ब्लैकमेलिंग का मामला सामने आया है। जेल अधीक्षक विदित सरवैया ने बोहड़ापुर थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि उन्हें ₹5 लाख की अवैध मांग कर ब्लैकमेल किया गया। इस मामले में एक निलंबित प्रहरी और एक पूर्व कैदी पर संलिप्तता का शक जताया गया है।
जेल अधीक्षक ने इस पूरे मामले की जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और एसपी ग्वालियर को भी दी है।
Gwalior Jail अधीक्षक ने थाने में दर्ज कराई शिकायत
जेल अधीक्षक विदित सरवैया ने बोहड़ापुर थाना पुलिस को दिए आवेदन में बताया कि उन्हें लगातार धमकी भरे संदेश मिल रहे थे। शिकायत में निलंबित जेल प्रहरी पवन कुमार शर्मा और जेल से रिहा हो चुके आरोपी रिशपाल सिंह बघेल का नाम सामने आया है।
आरोप है कि इन दोनों की भूमिका इस पूरे ब्लैकमेलिंग नेटवर्क में संदिग्ध है और इनके जरिए ही धमकियां दी जा रही थीं।
व्हाट्सएप इमोजी से ₹5 लाख की डिमांड का आरोप
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि ब्लैकमेलर ने सीधे तौर पर रकम का जिक्र नहीं किया, बल्कि व्हाट्सएप पर हाथ के पंजे (👋 इमोजी) का उपयोग कर सांकेतिक रूप से ₹5 लाख की मांग की।
सूत्रों के अनुसार, यह संदेश 7 जून से 13 जून के बीच भेजे गए थे। इसके साथ ही कुछ वीडियो क्लिप भी भेजी गईं, जिनमें जेल की आंतरिक व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर दावे किए गए थे।
वीडियो क्लिप्स में जेल व्यवस्था पर सवाल
शिकायत के मुताबिक, जब जेल अधीक्षक ने ब्लैकमेलिंग की मांग को स्वीकार नहीं किया, तो आरोपी पक्ष ने सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म पर वीडियो क्लिप वायरल कर दीं।
इन वीडियो में जेल के अंदर बीड़ी, सब्जी, फल और अन्य सामग्री को तय कीमत से कई गुना अधिक दाम पर बेचते हुए दिखाया गया है। आरोप है कि इन वीडियो को सार्वजनिक कर प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश की गई।
इन वीडियो के सामने आने के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
पेनड्राइव में सुरक्षित साक्ष्य, पुलिस ने शुरू की जांच
जेल अधीक्षक ने पूरे मामले से जुड़े व्हाट्सएप मैसेज और वीडियो क्लिप्स को पेनड्राइव में सुरक्षित कर पुलिस को सौंप दिया है। पुलिस ने इन डिजिटल साक्ष्यों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
बोहड़ापुर थाना पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर सेल की मदद भी ली जा रही है, ताकि संदेशों और वीडियो की सत्यता की जांच की जा सके।
निलंबित प्रहरी और पूर्व कैदी पर संदेह
प्रारंभिक जांच में निलंबित प्रहरी पवन कुमार शर्मा और पूर्व कैदी रिशपाल सिंह बघेल की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या वास्तव में ये दोनों व्यक्ति इस ब्लैकमेलिंग में शामिल थे या किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा हैं।
अधिकारियों का कहना है कि सभी डिजिटल रिकॉर्ड और कॉल डिटेल्स की जांच की जा रही है।
वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई जानकारी
जेल अधीक्षक विदित सरवैया ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी ग्वालियर एसएसपी और जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी दे दी है। प्रशासन ने मामले को गंभीर मानते हुए विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
जेल विभाग इस बात की भी जांच कर रहा है कि आखिर वीडियो और आंतरिक जानकारी बाहर कैसे लीक हुई।
जेल सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के बाद ग्वालियर सेंट्रल जेल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जेल के अंदर से वीडियो और सूचनाएं बाहर आ रही हैं, तो यह सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामी का संकेत हो सकता है।
प्रशासन अब यह भी जांच कर रहा है कि क्या जेल के भीतर किसी अंदरूनी सहयोग से यह जानकारी लीक हुई है।
साइबर और आर्थिक एंगल से जांच जारी
पुलिस इस मामले को केवल ब्लैकमेलिंग तक सीमित नहीं मान रही है, बल्कि इसके साइबर और आर्थिक पहलुओं की भी गहराई से जांच कर रही है। शुरुआती जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कहीं इसके पीछे कोई संगठित गिरोह तो सक्रिय नहीं है, जो इस तरह की घटनाओं को अंजाम देकर दबाव बनाने और अवैध वसूली करने का काम करता हो।
साइबर सेल की टीम भी पूरे मामले में सक्रिय हो गई है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि व्हाट्सएप संदेश किन मोबाइल नंबरों से भेजे गए थे। इसके साथ ही तकनीकी जांच के जरिए यह भी स्पष्ट किया जा रहा है कि क्या इन नंबरों को ट्रेस किया जा सकता है और क्या इनका संबंध किसी पूर्व नियोजित नेटवर्क से है। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, चैट हिस्ट्री और कॉल डिटेल्स के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है, ताकि असली आरोपियों तक पहुंचा जा सके और पूरे रैकेट का खुलासा किया जा सके।
