—Advertisement—

मुनिश्री 108 अध्यात्म सागर महाराज को विनयांजलि: ‘क्षमा, दया और आर्जव के साकार स्वरूप थे गुरुदेव’ – आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज

Author Picture
Published On: 1 August 2026
erfreft

—Advertisement—

मुनिश्री 108 अध्यात्म सागर महाराज को विनयांजलि: ‘क्षमा, दया और आर्जव के साकार स्वरूप थे गुरुदेव’ – आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज

चंपाबाग बगीची में आयोजित हुई श्रद्धांजलि सभा, जैन समाज और संतों ने समाधिस्थ मुनिश्री के तप, त्याग और संयममय जीवन को किया नमन

ग्वालियर। जैन धर्म के प्रख्यात संत परम पूज्य मुनिश्री 108 अध्यात्म सागर जी महाराज (लाल मणि) की समाधि के उपरांत शनिवार को ग्वालियर में एक भावपूर्ण विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया। नई सड़क स्थित चंपाबाग बगीची में आयोजित इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु, संत, समाजसेवी, जनप्रतिनिधि और विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए।

यह विनयांजलि सभा आत्म साधना पावन वर्षायोग एवं ग्वालियर सकल जैन समाज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई, जिसमें समाधिस्थ मुनिश्री के आध्यात्मिक जीवन, त्याग, तप, संयम और समाज के प्रति उनके अमूल्य योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया।

30 जुलाई को हुई थी मुनिश्री अध्यात्म सागर महाराज की समाधि

ज्ञात हो कि 30 जुलाई को परम पूज्य मुनिश्री 108 अध्यात्म सागर जी महाराज ने आचार्य श्री 108 चैत्य सागर महाराज के सानिध्य में समाधि धारण की थी। उनके देवलोकगमन के बाद पूरे जैन समाज में शोक की लहर है।

उनके सम्मान में आयोजित विनयांजलि सभा केवल श्रद्धांजलि का कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि उनके जीवन मूल्यों, आध्यात्मिक साधना और संयमपूर्ण जीवन को आत्मसात करने का प्रेरक अवसर भी बनी।

दीप प्रज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ मुनिश्री अध्यात्म सागर महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ।

दीप प्रज्वलन का सौभाग्य चंद्र मोहन जैन (आगरा), सुखलाल जैन एवं पारस जैन को प्राप्त हुआ।

इसके पश्चात प्रतिष्ठाचार्य पंडित चंद्रप्रकाश जैन ने धार्मिक पाठ का वाचन किया। श्रद्धांजलि सभा के दौरान वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक और भावपूर्ण बना रहा।

मुनिश्री के जीवन पर प्रस्तुत की गई प्रेरक गाथा

कार्यक्रम में प्रियंका जैन ने मुनिश्री अध्यात्म सागर महाराज के जीवन की प्रेरणादायक गाथा प्रस्तुत की, जबकि प्रमोद जैन ने उनके व्यक्तित्व और आध्यात्मिक यात्रा का विस्तृत परिचय दिया।

उन्होंने बताया कि मुनिश्री का पूरा जीवन आत्मकल्याण, तप, संयम और समाज सेवा को समर्पित रहा। उन्होंने अपने जीवन के प्रत्येक क्षण को धर्म साधना और आत्म उन्नति के लिए समर्पित किया।

आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज ने किया भावपूर्ण स्मरण

विनयांजलि सभा का सबसे भावुक क्षण तब आया जब आचार्य श्री 108 चैत्य सागर महाराज ने अपने शिष्य मुनिश्री अध्यात्म सागर महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की।

उन्होंने कहा कि—

“लालमणि से पूज्य मुनि अध्यात्म सागर महाराज बनने की यात्रा मेरे सानिध्य में हुई। दीक्षा मेरे हाथों से हुई थी और तभी उन्होंने सांसारिक जीवन का त्याग कर अध्यात्म के मार्ग को अपनाया।”

आचार्य श्री ने कहा कि मुनिश्री सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र के धनी थे। उनका जीवन जैन दर्शन के आदर्शों का जीवंत उदाहरण था।

उन्होंने आगे कहा कि मुनिश्री अत्यंत सरल, विनम्र और वात्सल्य से परिपूर्ण संत थे। उनके व्यक्तित्व में क्षमा, दया, आर्जव (सरलता), करुणा और त्याग के गुण सहज रूप से विद्यमान थे।

आचार्य श्री ने कहा कि ऐसे संत विरले ही जन्म लेते हैं और उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन जाता है।

‘संत की साधना मृत्यु को भी महोत्सव बना देती है’

सभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री अनुमान सागर महाराज ने कहा कि संत का जीवन और मृत्यु दोनों ही समाज के लिए प्रेरणा होते हैं।

उन्होंने कहा—

“संत की साधना मृत्यु को भी महोत्सव बना देती है। संत का मरण आत्महत्या नहीं, बल्कि आत्म साधना की अंतिम अवस्था होती है। समाधि लेने वाला संत अपने अंतिम क्षणों में भी सभी से क्षमा याचना करता है और आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर रहता है।”

उन्होंने कहा कि जैन संतों का समाधि मार्ग संसार के प्रति वैराग्य और आत्मा की शुद्धि का सर्वोच्च उदाहरण है।

संयमपूर्वक देह त्याग जैन दर्शन की महान परंपरा

कार्यक्रम में धर्मचंद जैन (करैरा) ने कहा कि जैन धर्म की सबसे बड़ी विशेषता संयमपूर्वक जीवन जीना और संयमपूर्वक देह का त्याग करना है।

उन्होंने कहा कि मुनिश्री अध्यात्म सागर महाराज ने अपने पूरे जीवन में कठिन तप, साधना और संयम का पालन किया तथा समाज को सदैव धर्म और आत्मकल्याण का मार्ग दिखाया।

उन्होंने कहा कि उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज को सत्य, अहिंसा, संयम और त्याग के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए।

पूर्व कलेक्टर आर.के. जैन ने किया भावपूर्ण स्मरण

पूर्व कलेक्टर आर.के. जैन ने अपने संबोधन में कहा कि आज भले ही मुनिश्री हमारे बीच भौतिक रूप से उपस्थित नहीं हैं, लेकिन उनके विचार और संस्कार सदैव समाज का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

उन्होंने कहा कि समाज को उनके बताए मार्ग पर चलना चाहिए और उनके आदर्शों को जीवन में अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

उन्होंने अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा—

“हे गुरुदेव, आपका आशीर्वाद सदैव समाज पर बना रहे और हम सभी आपके बताए मार्ग पर चलने का प्रयास करें।”

कई प्रमुख वक्ताओं ने दी श्रद्धांजलि

विनयांजलि सभा में अनेक प्रमुख सामाजिक, धार्मिक एवं राजनीतिक हस्तियों ने मुनिश्री अध्यात्म सागर महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की।

श्रद्धांजलि देने वालों में प्रमुख रूप से—

  • पंडित सुगंध चंद्र जैन
  • डॉ. वीरेंद्र गंगवाल
  • वीरेंद्र जैन
  • महेंद्र टोंग्या
  • राज्यसभा सदस्य अशोक सिंह
  • पूर्व विधायक प्रवीण पाठक
  • पारस जैन
  • सोनागिर समिति के मंत्री बालचंद्र जैन
  • राजेंद्र जैन (एडवोकेट)
  • धर्मेंद्र जैन (पार्षद)
  • संजय मणि जैन

सहित जैन समाज की विभिन्न संस्थाओं एवं मंदिर समितियों के प्रतिनिधियों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए।

परिवारजनों ने व्यक्त की भावपूर्ण संवेदना

tgrtg
कार्यक्रम में मुनिश्री के गृहस्थ जीवन से जुड़े परिवारजन भी उपस्थित रहे।

उनके पुत्र संजय मणि जैन, विजय जैन, अजय जैन, आदित्य मणि जैन, चंचल मणि जैन, यश मणि जैन, अंशुल मणि जैन, चंद्र मणि जैन सहित कराहिया (ग्वालियर) परिवार के सदस्यों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

उन्होंने कहा कि गुरुदेव का संपूर्ण जीवन समाज और धर्म के लिए समर्पित रहा, जिसे सदैव स्मरण किया जाएगा।

णमोकार महामंत्र के जाप के साथ हुआ समापन

विनयांजलि सभा का समापन णमोकार महामंत्र के सामूहिक जाप के साथ हुआ।

इसके पश्चात उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने मुनिश्री अध्यात्म सागर महाराज के चित्र के समक्ष पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी तथा हाथ जोड़कर नमन किया।

कार्यक्रम का संचालन विनय कासलीवाल एवं सौरभ भंडारी ने किया।

त्याग, संयम और करुणा की अमर विरासत छोड़ गए मुनिश्री

ghtefyhnbgretg

मुनिश्री 108 अध्यात्म सागर महाराज का संपूर्ण जीवन जैन धर्म के मूल सिद्धांतों—अहिंसा, सत्य, संयम, तप, क्षमा और त्याग—का जीवंत उदाहरण रहा। उन्होंने केवल उपदेश ही नहीं दिए, बल्कि अपने जीवन से इन आदर्शों को चरितार्थ किया।

ग्वालियर में आयोजित विनयांजलि सभा ने यह संदेश दिया कि संत कभी केवल अपने समय तक सीमित नहीं रहते। उनके विचार, उनका आचरण और उनका आध्यात्मिक जीवन सदैव समाज को दिशा देता रहता है। उपस्थित श्रद्धालुओं ने संकल्प लिया कि वे गुरुदेव के बताए मार्ग पर चलते हुए धर्म, संयम और सेवा की भावना को अपने जीवन में आत्मसात करेंगे।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp