Gwalior High Court News: सरकारी नौकरी के बाद तीसरा बच्चा होने पर क्या लागू होगा दो-बच्चों का नियम? हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
Gwalior High Court News: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में मंगलवार को अवैध खनन से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी कर्मचारियों पर लागू दो-बच्चों की शर्त से जुड़ा अहम सवाल सामने आया। अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि अगर किसी व्यक्ति के सरकारी सेवा में नियुक्त होने के समय दो बच्चों की शर्त लागू होती है, लेकिन नौकरी मिलने के बाद उसका तीसरा बच्चा हो जाता है, तो ऐसी स्थिति में सेवा नियम क्या कहते हैं?
यह सवाल ग्वालियर में पदस्थ खनिज अधिकारी पंकजध्वज मिश्रा से जुड़े मामले के दौरान उठा। उनके तीन बच्चों का मामला सामने आने के बाद कोर्ट ने सरकारी पक्ष से नियमों की स्पष्ट स्थिति बताने को कहा। सरकारी अधिवक्ता तत्काल इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दे सके और उन्होंने अदालत से जवाब तैयार करने के लिए समय मांगा।
अदालत ने राज्य सरकार को इस मुद्दे पर स्पष्ट नियम और उसकी व्याख्या पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। साथ ही संबंधित अधिकारी को भी अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है।
नियुक्ति के समय दो बच्चों की शर्त पर सवाल
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि सरकारी सेवा के नियमों के तहत नियुक्ति के लिए दो से अधिक बच्चों वाले अभ्यर्थियों पर प्रतिबंध से संबंधित प्रावधान लागू होते हैं। इसी जानकारी के बाद कोर्ट ने सवाल उठाया कि इस नियम की सीमा आखिर कहां तक है।
अदालत का मुख्य सवाल यह था कि क्या दो बच्चों की शर्त केवल सरकारी नौकरी में नियुक्ति के समय तक सीमित रहती है या कर्मचारी के सेवा में आने के बाद भी इसका प्रभाव जारी रहता है।
यदि नियुक्ति के बाद किसी कर्मचारी के तीसरा बच्चा हो जाता है और उसके खिलाफ कोई नियम लागू नहीं होता, तो फिर दो बच्चों की सीमा तय करने के पीछे सरकार की नीति का उद्देश्य किस तरह पूरा होगा—कोर्ट ने इसी बिंदु पर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
सरकारी अधिवक्ता की ओर से तत्काल कोई निश्चित उत्तर नहीं दिया जा सका। इसके बाद कोर्ट ने सरकार को संबंधित नियमों का अध्ययन कर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
खनिज अधिकारी के तीन बच्चों का मामला
यह पूरा मुद्दा ग्वालियर में पदस्थ खनिज अधिकारी पंकजध्वज मिश्रा के मामले से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान उनके तीन बच्चों की जानकारी सामने आने पर अदालत ने सरकारी सेवा में दो बच्चों से जुड़े नियमों की व्यावहारिक स्थिति पर सवाल उठाया।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारी को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा। इसलिए फिलहाल इस मामले में किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
सरकार को अब यह स्पष्ट करना होगा कि सेवा नियमों के तहत तीसरे बच्चे के जन्म की स्थिति में कर्मचारी की सेवा पर कोई प्रभाव पड़ता है या नहीं। साथ ही यह भी स्पष्ट करना होगा कि यदि ऐसा कोई प्रावधान है तो वह किस परिस्थिति और किस समय से प्रभावी माना जाएगा।
दो बच्चों की नीति का उद्देश्य क्या?
अदालत की टिप्पणी का एक महत्वपूर्ण पहलू दो-बच्चों की शर्त के उद्देश्य से जुड़ा है। कोर्ट ने सवाल किया कि यदि यह शर्त सिर्फ नियुक्ति के समय लागू होती है और बाद में कर्मचारी के तीसरे बच्चे के जन्म पर कोई कार्रवाई या प्रभाव नहीं पड़ता, तो फिर ऐसी सीमा तय करने का वास्तविक उद्देश्य क्या रह जाएगा।
यही कारण है कि कोर्ट ने राज्य सरकार से नियमों की केवल जानकारी नहीं, बल्कि उनकी स्पष्ट व्याख्या प्रस्तुत करने को कहा है।
इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया जा सकता है कि संबंधित सेवा नियम सरकारी कर्मचारी के पूरे कार्यकाल पर लागू होते हैं या केवल नियुक्ति के समय पात्रता निर्धारित करने तक सीमित रहते हैं।
अवैध खनन मामले की सुनवाई में उठा मुद्दा
गौरतलब है कि यह सवाल मूल रूप से एक अवैध खनन मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया। अदालत में अशोक यादव की तीन खदानों से जुड़े मामले पर भी सुनवाई हुई। कोर्ट ने इन खदानों पर लगी रोक को अगले आदेश तक जारी रखने का निर्देश दिया है।
इसके साथ ही अदालत ने पिछले पांच वर्षों में अवैध खनन से जुड़े मामलों में दर्ज एफआईआर का रिकॉर्ड भी तलब किया है। इससे संकेत मिलता है कि अदालत अवैध खनन से संबंधित मामलों की स्थिति और कार्रवाई को लेकर भी विस्तृत जानकारी चाहती है।
इस तरह एक ओर जहां अदालत अवैध खनन के मामले की जांच और कार्रवाई से जुड़े रिकॉर्ड पर नजर रख रही है, वहीं सुनवाई के दौरान सामने आए सरकारी कर्मचारी के तीसरे बच्चे के मुद्दे ने सेवा नियमों की व्याख्या से जुड़ा अलग कानूनी सवाल खड़ा कर दिया है।
अब सरकार के जवाब पर नजर
Gwalior हाई कोर्ट के निर्देश के बाद अब राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर इस मुद्दे पर अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा। सरकार को संबंधित सेवा नियमों का हवाला देते हुए यह बताना होगा कि सरकारी कर्मचारी के नौकरी में आने के बाद तीसरा बच्चा होने की स्थिति में क्या कानूनी या प्रशासनिक प्रावधान लागू होते हैं।
फिलहाल अदालत ने न तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कोई अंतिम फैसला सुनाया है और न ही यह तय किया है कि तीसरे बच्चे के आधार पर उनकी सेवा प्रभावित होगी या नहीं। अगली सुनवाई में सरकार के जवाब और अधिकारी के पक्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है।
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाई कोर्ट के सामने उठाया गया सवाल सरकारी कर्मचारियों पर लागू दो-बच्चों की शर्त की व्याख्या से जुड़ा है। यदि अदालत इस विषय पर कोई स्पष्ट कानूनी दृष्टिकोण सामने रखती है, तो इसका असर भविष्य में इसी तरह के मामलों की सुनवाई और सरकारी सेवा नियमों की व्याख्या पर पड़ सकता है।
