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Gwalior की सड़कों पर खर्च का हिसाब: हाईकोर्ट पहुंची मिनी ट्रक भरकर फाइलें, 129 में सिर्फ 62 सड़कें ठीक

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Published On: 14 August 2026
Gwalior
— ग्वालियर की सड़कों पर हाईकोर्ट सख्त

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Gwalior की सड़कों पर खर्च का हिसाब: हाईकोर्ट पहुंची मिनी ट्रक भरकर फाइलें, 129 में सिर्फ 62 सड़कें ठीक

Gwalior High Court Potholed Road: ग्वालियर शहर की खराब सड़कों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में सुनवाई के दौरान नगर निगम को पिछले पांच वर्षों के सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों का पूरा रिकॉर्ड पेश करना पड़ा। नगर निगम की ओर से सड़क निर्माण, मरम्मत, पैचवर्क और इन कार्यों पर हुए खर्च से संबंधित इतनी बड़ी संख्या में फाइलें पेश की गईं कि उन्हें मिनी ट्रक में भरकर हाईकोर्ट परिसर तक लाना पड़ा।

मामले में सामने आई सड़क जांच की स्थिति ने कई सवाल खड़े किए हैं। ग्वालियर शहर की 129 प्रमुख सड़कों की जांच कराई गई थी। इनमें से केवल 62 सड़कें ही ऐसी पाई गईं जिन्हें फिलहाल चलने लायक माना गया है। वहीं 24 सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त मिलीं, जबकि 34 सड़कें आंशिक रूप से खराब स्थिति में हैं। ऐसे में अब हाईकोर्ट यह जांचना चाहता है कि पिछले पांच वर्षों में सड़कों पर खर्च किए गए सरकारी धन का वास्तविक असर जमीन पर कितना दिखाई दे रहा है।

पांच साल का रिकॉर्ड लेकर पहुंचा नगर निगम

हाईकोर्ट ने नगर निगम से वर्ष 2021 से 2026 के बीच सड़कों पर किए गए निर्माण, मरम्मत और पैचवर्क से संबंधित रिकॉर्ड मांगा था। नगर निगम को इन कार्यों पर हुए खर्च का भी विस्तृत हिसाब प्रस्तुत करना था।

नगर निगम की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों में सड़क निर्माण की स्वीकृति, मरम्मत कार्य, पैचवर्क, भुगतान और अन्य संबंधित रिकॉर्ड शामिल बताए गए हैं। रिकॉर्ड की मात्रा इतनी अधिक थी कि इसे मिनी ट्रक में भरकर अदालत तक पहुंचाया गया।

इतने बड़े स्तर पर दस्तावेज पेश होने के बावजूद शहर की सड़कों की स्थिति संतोषजनक नहीं मिलने से सड़क निर्माण और मरम्मत की गुणवत्ता तथा सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

129 सड़कों की जांच में सामने आई स्थिति

Gwalior शहर की 129 प्रमुख सड़कों की स्थिति का आकलन किया गया। जांच के दौरान सड़कें तीन श्रेणियों में सामने आईं।

  • 62 सड़कें: चलने लायक
  • 24 सड़कें: पूरी तरह क्षतिग्रस्त
  • 34 सड़कें: आंशिक रूप से खराब

इन आंकड़ों से साफ है कि जांच में शामिल सभी सड़कों की स्थिति एक जैसी नहीं है। कई सड़कें ऐसी हैं जिन पर तत्काल सुधार की जरूरत बताई गई है। वहीं कुछ सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त अवस्था में हैं।

अब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि जिन सड़कों के निर्माण या मरम्मत पर सरकारी धन खर्च किया गया, वे वर्तमान में किस हालत में हैं।

तीन वरिष्ठ वकीलों की विशेष जांच कमेटी

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने मामले की जांच के लिए तीन वरिष्ठ वकीलों की एक विशेष कमेटी गठित की है। यह कमेटी केवल नगर निगम द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के आधार पर ही निष्कर्ष नहीं निकालेगी, बल्कि मौके पर जाकर सड़कों की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण भी करेगी।

कमेटी ग्वालियर के प्रमुख मार्गों, चौराहों और संबंधित स्थानों का दौरा करेगी। इस दौरान रिकॉर्ड में जिस सड़क के निर्माण, मरम्मत या पैचवर्क का दावा किया गया है, उसकी मौके पर स्थिति देखी जाएगी।

यदि रिकॉर्ड में किसी सड़क पर हाल ही में मरम्मत या पैचवर्क का उल्लेख है, तो कमेटी यह भी देखेगी कि काम वास्तव में कितना प्रभावी रहा है और सड़क की वर्तमान स्थिति उस दावे से मेल खाती है या नहीं।

हाईकोर्ट को सौंपी जाएगी जांच रिपोर्ट

मौके के निरीक्षण और नगर निगम के दस्तावेजों के मिलान के बाद विशेष जांच कमेटी अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष पेश करेगी। रिपोर्ट के जरिए अदालत को यह जानकारी मिल सकेगी कि रिकॉर्ड में दर्ज सड़क निर्माण और मरम्मत कार्य जमीन पर कितने प्रभावी रहे।

जांच में सड़क की वर्तमान स्थिति के साथ-साथ निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी ध्यान दिया जाएगा। इससे यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि सड़कें खराब होने के पीछे सामान्य टूट-फूट, भारी यातायात, अन्य निर्माण कार्य या निर्माण की गुणवत्ता से जुड़े कारण क्या हैं।

सड़क की खुदाई कर जांची जाएगी निर्माण गुणवत्ता

हाईकोर्ट ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की टीम से परीक्षण कराने के निर्देश भी दिए हैं। इसके तहत जरूरत पड़ने पर संबंधित सड़कों की खुदाई कर यह जांचा जाएगा कि सड़क निर्माण में निर्धारित मानकों और तकनीकी मापदंडों का पालन हुआ या नहीं।

सड़क की ऊपरी सतह देखने के अलावा उसके निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री और निर्धारित संरचना की भी जांच की जा सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि सड़क निर्माण कागजों में दर्ज मानकों के अनुरूप हुआ था या नहीं।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस तरह की जांच के दौरान नगर निगम का कोई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं रहेगा। मौके पर निगम की ओर से केवल उसका वकील उपस्थित रह सकेगा। इससे जांच प्रक्रिया को स्वतंत्र और निष्पक्ष रखने की कोशिश की गई है।

निर्माण कार्यों के कारण खराब हुई कुछ सड़कें

नगर निगम के अधीक्षण यंत्री ने अपने शपथ पत्र में ग्वालियर की कुछ सड़कों की खराब स्थिति के पीछे अन्य विकास कार्यों को भी कारण बताया था। निगम के अनुसार बहोड़ापुरा से सागरताल मेन रोड तक सीवर लाइन डालने के कारण सड़क प्रभावित हुई है।

इसके अलावा छप्पर वाला पुल से शान-ओ-शौकत, रामकुई से भैंस मंडी पुल और तारागंज पुल से कमानी पुल तक चल रहे एलिवेटेड रोड निर्माण कार्य के कारण भी सड़क और यातायात प्रभावित होने की बात नगर निगम ने कही है।

हालांकि, यह रिपोर्ट ग्वालियर शहर की 129 प्रमुख सड़कों तक सीमित है। अब हाईकोर्ट की विशेष कमेटी के निरीक्षण और तकनीकी जांच से यह तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है कि सड़क निर्माण और मरम्मत पर खर्च किए गए धन का वास्तविक परिणाम क्या रहा।

फिलहाल मिनी ट्रक में भरकर हाईकोर्ट पहुंची फाइलें इस मामले की गंभीरता को दर्शाती हैं। अब इन दस्तावेजों का मौके की सड़कों से मिलान और तकनीकी जांच के बाद अदालत के सामने वास्तविक स्थिति सामने आएगी।

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