भारत के दिल कहे जाने वाला मध्यप्रदेश में यु तो कई ऐतिहासिक इमारते है लेकिन आज हम आपको ले चलेंगे एक ऐसे किले की और जहां का चप्पा -चप्पा गौरवशाली इतिहास का परिचय देता है। यह किला ग्वालियर में स्थित है , साथ ही में भारत के सबसे प्राचीन और भव्य किलों में से एक है। अब तक तो आप पहचान गए होंगे हम बात कर रहे है ग्वालियर किले की

यह किला एक पहाड़ी चट्टान पर बनाया गया है जो दूर से ही अपनी विशालता और भव्यता से नजर आता है। किले की इतिहास और स्थापत्य महत्ता इसकी सुंदरता में चार चाँद लगा देती है।
इतिहास और वास्तुकला :

अगर बात करे ग्वालियर किले के इतिहास की तो माना जाता है की इस किले का इतिहास 6 वी शताब्दी में इसे राजा सूरजसेन ने बनवाया था। यह किला राजपूत, मुगल और मराठा शैलियों का मिश्रण देखने को मिलता है। यह किला शासनकाल का शाक्षी रहा है किले में किले की सबसे खास विशेषता यहाँ की जैन प्रतिमाएँ और तेली का मंदिर है। इन मंदिरों और महलों की नक्काशी और स्थापत्य कला इतनी अद्भुत है की इसे देखने के लिए पर्यटक दूर-दूर से आते हैं।
पर्यटन आकर्षण :

ग्वालियर किले से पूरे ग्वालियर शहर का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। किले में रात में लाइट एंड साउंड शो भी आयोजित किया जाता है, जो इसकी ऐतिहासिक गाथाओं को जीवंत रूप में दर्शाता है। इतिहास और संस्कृति में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए ग्वालियर किला एक आदर्श स्थल है।
कैसे पहुंचे :
ग्वालियर किला ग्वालियर शहर के केंद्र में स्थित है और यहां तक पहुंचने के लिए सड़क, रेल और निकटतम हवाई अड्डे का उपयोग किया जा सकता है। किले का दौरा सुबह से शाम तक किया जा सकता है, और गर्मियों में सुबह या शाम का समय सबसे अच्छा माना जाता है। यात्रा से पहले प्रवेश शुल्क और समय की जानकारी प्रशासनिक वेबसाइट या स्थानीय स्रोतों से जांच लेना उचित है।
