जैन मिलन रत्नत्रय ने साइबर क्राइम पर आयोजित किया सेमिनार, डिजिटल ठगी से बचाव के बताए उपाय
ग्वालियर। डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराध के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं। ऑनलाइन ठगी, फर्जी लिंक, ओटीपी की जानकारी हासिल करने और अलग-अलग तरह के लालच देकर लोगों के बैंक खातों से रकम निकालने जैसे मामलों को लेकर लोगों को जागरूक करना जरूरी हो गया है। इसी उद्देश्य से जैन मिलन महिला रत्नत्रय विनय नगर की ओर से महावीर दिगंबर जैन मंदिर, विनय नगर में साइबर क्राइम जागरूकता सेमिनार आयोजित किया गया।
सेमिनार में पुलिस अधिकारियों ने साइबर अपराध के विभिन्न तरीकों और उनसे बचने के उपायों के बारे में लोगों को महत्वपूर्ण जानकारी दी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजन और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि ऑनलाइन ठगी का शिकार होने पर घबराने के बजाय तत्काल शिकायत दर्ज कराएं और समय रहते कार्रवाई करें।
साइबर ठगी के तरीकों की दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान बहोड़ापुर थाना टीआई जितेंद्र सिंह तोमर और पड़ाव थाना टीआई आलोक सिंह परिहार ने साइबर अपराध से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि साइबर ठग लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं। कभी फर्जी मैसेज भेजकर आकर्षक ऑफर का लालच दिया जाता है तो कभी लॉटरी, इनाम या बहुत सस्ते सामान का झांसा देकर लोगों को लिंक पर क्लिक करने के लिए कहा जाता है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कई मामलों में ठग खुद को बैंक कर्मचारी, पुलिस अधिकारी, सरकारी अधिकारी या किसी प्रतिष्ठित संस्था का प्रतिनिधि बताकर लोगों से संपर्क करते हैं। इसके बाद डर या लालच पैदा कर उनसे बैंक खाते, एटीएम, पासवर्ड, ओटीपी या अन्य संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती है।
फिशिंग लिंक से रहें सावधान
सेमिनार में फिशिंग को लेकर भी लोगों को जागरूक किया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फिशिंग में ठग ऐसे लिंक या संदेश भेजते हैं, जो देखने में असली और भरोसेमंद लगते हैं। व्यक्ति जैसे ही उस लिंक पर क्लिक करता है, उसे फर्जी वेबसाइट या ऐप पर ले जाया जा सकता है।
इसके बाद बैंकिंग या व्यक्तिगत जानकारी मांगी जाती है। जानकारी साझा करते ही ठग बैंक खाते से रकम निकाल सकते हैं।
पुलिस ने लोगों से अपील की कि किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक पर बिना जांच-पड़ताल के क्लिक न करें। किसी ऑफर या पुरस्कार के नाम पर आने वाले संदेशों की भी पहले पुष्टि करें।
‘डिजिटल अरेस्ट’ से घबराने की जरूरत नहीं
सेमिनार के दौरान पुलिस अधिकारियों ने कथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ को लेकर भी लोगों को जागरूक किया। टीआई आलोक सिंह परिहार ने बताया कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ कानून में कोई शब्द नहीं है।
उन्होंने कहा कि साइबर ठग लोगों को डराने के लिए पुलिस, सीबीआई, कोर्ट या अन्य सरकारी एजेंसियों का नाम लेकर वीडियो कॉल या फोन पर दबाव बनाते हैं। वे व्यक्ति को किसी अपराध में फंसाने की धमकी देकर पैसे मांग सकते हैं।
ऐसी स्थिति में घबराने की बजाय व्यक्ति को शांत रहना चाहिए और किसी भी अनजान व्यक्ति को पैसे या व्यक्तिगत जानकारी नहीं देनी चाहिए। पुलिस अधिकारी या सरकारी एजेंसी के नाम पर कोई व्यक्ति फोन कर धमकी दे तो उसकी सत्यता की जांच करना जरूरी है।
ओटीपी और पासवर्ड किसी से साझा न करें
साइबर सुरक्षा के संबंध में पुलिस अधिकारियों ने लोगों को विशेष रूप से ओटीपी, पासवर्ड और बैंकिंग संबंधी जानकारी सुरक्षित रखने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि बैंक या कोई भी जिम्मेदार संस्था आम तौर पर फोन पर ओटीपी, पासवर्ड या संवेदनशील बैंकिंग जानकारी साझा करने के लिए नहीं कहती। यदि कोई व्यक्ति ऐसी जानकारी मांगता है तो सतर्क हो जाना चाहिए।
इसके अलावा सभी ऑनलाइन खातों के लिए अलग-अलग और मजबूत पासवर्ड रखने की सलाह दी गई। एक ही पासवर्ड कई जगह इस्तेमाल करने से बचने की भी अपील की गई।
अनजान ऐप डाउनलोड करने से बचें
सेमिनार में मोबाइल फोन में अनजान ऐप डाउनलोड करने को लेकर भी लोगों को सावधान किया गया। साइबर ठग कई बार किसी समस्या के समाधान, बैंकिंग अपडेट, नौकरी, निवेश या किसी ऑफर के नाम पर मोबाइल में ऐप डाउनलोड करने के लिए कहते हैं।
ऐसे ऐप के जरिए मोबाइल की संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाई जा सकती है और बैंक खाते से रकम निकाली जा सकती है। इसलिए लोगों से कहा गया कि केवल आधिकारिक और भरोसेमंद स्रोतों से ही ऐप डाउनलोड करें।
ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है तो उसे समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। तत्काल शिकायत दर्ज कराने से पैसे की रिकवरी की संभावना बढ़ सकती है।
इसके लिए नागरिक राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा साइबर फ्रॉड होने पर 1930 हेल्पलाइन नंबर पर भी तत्काल संपर्क किया जा सकता है।
पुलिस ने लोगों से कहा कि साइबर ठगी की घटना के बाद बैंक को भी तुरंत जानकारी दें और संबंधित लेनदेन को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।
बच्चों ने नाटक के जरिए दिया जागरूकता संदेश

सेमिनार के दौरान साइबर अपराध से बचाव को लेकर बच्चों द्वारा एक विशेष जागरूकता नाटक भी प्रस्तुत किया गया। नाटक के माध्यम से साइबर ठगी के अलग-अलग तरीकों और उनसे बचने के उपायों को सरल एवं प्रभावी तरीके से समझाया गया।
नाटक का निर्देशन मेघा जैन, पल्लवी जैन और पूजा जैन ने किया। बच्चों की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया और साइबर सुरक्षा का संदेश मनोरंजक तरीके से लोगों तक पहुंचाया।
मंगलाचरण से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ रजत जैन द्वारा मंगलाचरण से किया गया। इसके बाद अतिथियों का स्वागत किया गया और साइबर सुरक्षा से जुड़े विषयों पर जानकारी साझा की गई।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय संरक्षक अतिवीर प्रवीण गंगवाल रहे। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में साइबर अपराध से बचाव के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है और इसी उद्देश्य से यह सेमिनार आयोजित किया गया।
बड़ी संख्या में समाजजन हुए शामिल

सेमिनार में विनय नगर सहित आसपास के क्षेत्र के अनेक नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। लोगों ने पुलिस अधिकारियों से साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी से जुड़े सवाल भी पूछे और अपनी शंकाओं का समाधान प्राप्त किया।
कार्यक्रम में जैन मिलन महिला रत्नत्रय विनय नगर की अध्यक्ष वीरांगना मनीषा जैन, सचिव वीरांगना वंदना जैन, कोषाध्यक्ष वीरांगना अलका जैन, संगीता जैन, संजीव जैन सहित अनेक समाजजन मौजूद रहे।
जागरूकता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे बड़ा उपाय
कार्यक्रम में पुलिस अधिकारियों ने कहा कि साइबर अपराध से बचने का सबसे प्रभावी तरीका जागरूकता और सतर्कता है। किसी भी अनजान व्यक्ति पर भरोसा करने, लालच में आकर लिंक खोलने या डर के कारण पैसे ट्रांसफर करने से बचना चाहिए।
सेमिनार के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया गया कि साइबर ठग लगातार नए तरीके अपना रहे हैं, इसलिए हर व्यक्ति को अपनी डिजिटल सुरक्षा को लेकर सावधान रहना होगा। समय पर शिकायत और सही जानकारी साइबर अपराध से होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
