भाजपा विधायक प्रीतम लोधी के बेटे दिनेश के खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट, ग्वालियर कोर्ट ने दिए रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश
ग्वालियर। शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी के बेटे दिनेश लोधी के खिलाफ ग्वालियर की अदालत ने स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। हत्या के प्रयास से जुड़े मामले में लंबे समय से व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित नहीं होने पर यह कार्रवाई की गई है। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, अपर सेशन न्यायाधीश कपिल सोनी की अदालत ने आरोपी को फरार दर्ज करने के साथ प्रकरण के रिकॉर्ड और जब्त संपत्ति को सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए हैं।
हत्या के प्रयास के मामले में जारी हुआ वारंट
दिनेश लोधी के खिलाफ ग्वालियर के पुरानी छावनी थाने में हत्या के प्रयास का मामला दर्ज है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रकरण में उनकी लगातार गैरहाजिरी और पहले जारी वारंटों की तामीली नहीं होने का विषय अदालत के सामने आया। पुलिस की रिपोर्ट और न्यायालय में दर्ज बयानों के आधार पर स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया।
यह कार्रवाई आरोपी की अदालत में उपस्थिति और गिरफ्तारी से संबंधित है। इसे हत्या के प्रयास के आरोप में दोषसिद्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। संबंधित आरोपों पर न्यायिक निर्णय और आरोपी को अदालत में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया अलग विषय हैं।
22 जुलाई 2024 को आखिरी बार व्यक्तिगत उपस्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, दिनेश लोधी इस मामले में अंतिम बार 22 जुलाई 2024 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए थे। इसके बाद 23 अगस्त 2024 से 16 मार्च 2026 तक हुई पेशियों में उनकी ओर से हाजिरी माफी के आवेदन प्रस्तुत किए जाते रहे।
लगातार अनुपस्थिति के चलते अदालत ने 17 अप्रैल 2026 को उनकी जमानत और बंधपत्र समाप्त कर गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इसके बाद भी मई से अक्टूबर 2026 के बीच जारी वारंटों के बावजूद वह न्यायालय के समक्ष उपस्थित नहीं हुए। इसी घटनाक्रम के बाद अदालत ने स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी करने का निर्णय लिया।
पुलिस ने अदालत में पेश की तस्दीक रिपोर्ट
वारंट की तामीली के संबंध में पुरानी छावनी थाने के प्रधान आरक्षक रघुवीर सिंह ने अदालत में बयान दर्ज कराए। समाचार रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने बताया कि दिनेश अधिकांश समय दोस्तों के साथ बाहर रहते हैं या पिछोर चले जाते हैं। अपने गांव जलालपुर में भी वह महीने-दो महीने में कभी-कभार कुछ समय के लिए आते हैं।
पुलिस के बयान में आरोपी के लिए ‘आवारा किस्म’ शब्दों का इस्तेमाल किए जाने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। यह पुलिस के कथन का हिस्सा है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तुत जानकारी के आधार पर अदालत ने माना कि आरोपी जानबूझकर गिरफ्तारी से बच रहा है।
मुख्य पृष्ठ पर दर्ज होगा ‘अभियुक्त फरार’
अदालत ने प्रकरण के मुख्य पृष्ठ पर लाल स्याही से ‘अभियुक्त फरार’ दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ केस रिकॉर्ड और पुलिस द्वारा जब्त संपत्ति को नष्ट नहीं करने तथा सुरक्षित रखने को कहा गया है।
इन निर्देशों के तहत प्रकरण से संबंधित अभिलेख संरक्षित रहेंगे। रिपोर्ट में आरोपी की गिरफ्तारी होने तक रिकॉर्ड और जब्त सामान सुरक्षित रखने का उल्लेख है। इस आदेश के बाद मामले में अगला प्रमुख घटनाक्रम वारंट की तामीली और आरोपी को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना होगा।
अभियोजन गवाहों के बयान पर भी सामने आई जानकारी
अपर लोक अभियोजक आरपी पालीवाल ने अदालत को बताया कि आरोपी की अनुपस्थिति में अभियोजन गवाहों के बयान दर्ज नहीं कराए जाएंगे। समाचार रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी के पकड़े जाने और अदालत में प्रस्तुत होने के बाद गवाहों के कथन दर्ज कराए जाने की बात कही गई है।
यह जानकारी इसी प्रकरण में अभियोजन की ओर से रखे गए पक्ष से संबंधित है। इसे सभी आपराधिक मामलों पर लागू होने वाला सामान्य नियम नहीं समझना चाहिए।
एससी-एसटी मामले में भी पहले जारी हुआ था वारंट
दिनेश लोधी के खिलाफ एक अलग एससी-एसटी एक्ट के मामले में भी स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी होने की खबर सामने आई थी। अमर उजाला की 10 जुलाई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, ग्वालियर की विशेष एससी-एसटी अदालत ने लगातार पेश नहीं होने पर उन्हें फरार घोषित किया था।
उस मामले में विशेष न्यायाधीश नवीन कुमार शर्मा ने रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और मुख्य पृष्ठ पर आरोपी के फरार होने का उल्लेख करने के निर्देश दिए थे। जुलाई का यह प्रकरण और हत्या के प्रयास के मामले में सामने आया वर्तमान आदेश अलग-अलग मामलों से संबंधित हैं।
