ग्वालियर में बीएड छात्रों की आवास राशि में कथित फर्जीवाड़ा, जांच समिति की रिपोर्ट का पता नहीं — दैनिक स्वराज वाणी
ग्वालियर। शहर के दो बीएड कॉलेजों में छात्रों की आवास योजना की राशि कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों और हस्ताक्षरों के आधार पर निकालने की शिकायत कलेक्टर से की गई है। आरोप है कि छात्रों की सहमति के बिना उनके नाम पर दूसरे बैंकों में खाते खुलवाए गए और आवास राशि उन खातों के जरिए निकाल ली गई। शिकायत में इस मामले की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की गई है।
प्रशासन के पास पहुंची शिकायत में कहा गया है कि कथित गड़बड़ी बीएड विद्यार्थियों को मिलने वाली आवास योजना की राशि से जुड़ी है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि छात्रों के दस्तावेजों और हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर बैंक खाते खुलवाए गए। विद्यार्थियों को इन खातों की जानकारी या अनुमति के बारे में क्या बताया गया था, इसकी पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
दो कॉलेजों को लेकर की गई शिकायत
शिकायत ग्वालियर के दो बीएड कॉलेजों से संबंधित बताई गई है। आरोप है कि छात्रों के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर आवास योजना की रकम निकाली गई। मामले में कितने विद्यार्थी प्रभावित हुए, कितनी राशि निकाली गई और किन बैंक खातों का इस्तेमाल हुआ—इनका विस्तृत ब्योरा अभी सामने नहीं आया है। शिकायत में फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेजों के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया गया है।
छात्रों के नाम पर खाते खोले जाने का आरोप गंभीर है, क्योंकि इससे उनकी व्यक्तिगत और बैंक संबंधी जानकारी के उपयोग पर सवाल उठते हैं। हालांकि, आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। संबंधित कॉलेजों और बैंकों की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
संभागायुक्त के निर्देश पर बनी थी जांच समिति
मामले को लेकर संभागायुक्त के निर्देश पर जांच समिति गठित किए जाने की बात सामने आई है। शिकायत में बताया गया है कि समिति को आरोपों की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी। लेकिन अब शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जांच समिति की रिपोर्ट कहां है, इसकी जानकारी नहीं मिल रही है।
समिति ने जांच कब शुरू की, किन दस्तावेजों और विद्यार्थियों के बयान दर्ज किए, तथा उसकी रिपोर्ट किस अधिकारी को सौंपी गई—इन सवालों के जवाब अब तक स्पष्ट नहीं हैं। शिकायतकर्ता चाहते हैं कि प्रशासन रिपोर्ट की स्थिति बताए और जांच में सामने आए तथ्यों को सार्वजनिक करे। यदि रिपोर्ट तैयार हो चुकी है, तो उस पर आगे क्या कार्रवाई की गई, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।
कलेक्टर से जांच और कार्रवाई की मांग
मामले की शिकायत कलेक्टर से की गई है। शिकायतकर्ताओं ने कथित फर्जीवाड़े की निष्पक्ष जांच कराने, छात्रों के दस्तावेजों और बैंक खातों से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल करने तथा आवास योजना की राशि के भुगतान का विवरण जांचने की मांग की है। साथ ही, जांच समिति की रिपोर्ट की स्थिति स्पष्ट करने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई है।
इस मामले में प्रशासन के सामने यह पता लगाना अहम होगा कि पात्र विद्यार्थियों के नाम पर कितनी राशि स्वीकृत हुई, भुगतान किन खातों में किया गया और खाते खोलने के लिए कौन से दस्तावेज जमा किए गए। बैंक रिकॉर्ड और कॉलेजों के दस्तावेजों की जांच से आरोपों की पुष्टि या स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। प्रशासन, संबंधित कॉलेजों और बैंकों का पक्ष भी उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि कलेक्टर कार्यालय शिकायत पर क्या कदम उठाता है और पहले गठित जांच समिति की रिपोर्ट का पता लगाकर मामले में आगे की कार्रवाई कब की जाती है।
