ग्वालियर में पहली बार भगवान पार्श्वनाथ को 123 किलो का निर्वाण लड्डू समर्पित, आचार्य चैत्य सागर का 43वां दीक्षा दिवस भी मना
मोक्ष कल्याणक पर हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में गूंजे भगवान पार्श्वनाथ के जयकारे, दिगंबर जैन समाज के तेरापंथ और बीसपंथ ने एक साथ निर्वाण लड्डू चढ़ाकर दिया एकता का संदेश
ग्वालियर। जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक के पावन अवसर पर ग्वालियर में श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। आत्म साधना पावन वर्षायोग समिति एवं सकल जैन समाज ग्वालियर के तत्वावधान में बुधवार को नई सड़क स्थित चंपाबाग धर्मशाला में भव्य निर्वाण महोत्सव आयोजित किया गया। इस दौरान भगवान पार्श्वनाथ के चरणों में 123 किलो का विशाल निर्वाण लड्डू समर्पित किया गया। आयोजकों के अनुसार ग्वालियर में इस तरह 123 किलो का निर्वाण लड्डू समर्पित करने का यह पहला आयोजन रहा।
कार्यक्रम परम पूज्य आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज एवं मुनिश्री अनुमान सागर महाराज के मंगल सानिध्य में आयोजित हुआ। इसी अवसर पर आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज का 43वां दीक्षा दिवस भी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। भगवान पार्श्वनाथ के अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, निर्वाण पाठ, गुरु पूजन, पाद प्रक्षालन और शास्त्र भेंट सहित अनेक धार्मिक कार्यक्रम हुए।
लश्कर, मुरार और उपनगरों से पहुंचे हजारों श्रद्धालु
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक महोत्सव में शामिल होने के लिए ग्वालियर शहर के लश्कर, मुरार और विभिन्न उपनगरों से बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु चंपाबाग धर्मशाला पहुंचे।
विशाल निर्वाण लड्डू को देखने और भगवान पार्श्वनाथ के चरणों में समर्पित किए जाने के धार्मिक आयोजन का साक्षी बनने के लिए महिला-पुरुष, युवा और बच्चे बड़ी संख्या में मौजूद रहे। श्रद्धालुओं की उपस्थिति से सभागार पूरी तरह भर गया और भगवान पार्श्वनाथ के जयकारों से पूरा परिसर गूंजता रहा।
पंचामृत महामस्तकाभिषेक के साथ शुरू हुए धार्मिक अनुष्ठान
आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज एवं मुनिश्री अनुमान सागर महाराज के सानिध्य और प्रतिष्ठाचार्य विवेक भैयाजी के मार्गदर्शन में भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए।
कार्यक्रम में इंद्रों द्वारा कलशों से भगवान पार्श्वनाथ का प्रथम पंचामृत महामस्तकाभिषेक किया गया। प्रथम अभिषेक का सौभाग्य अजीत कुमार एवं अमिता कासलीवाल को प्राप्त हुआ। श्रद्धालुओं ने जयकारों के बीच भगवान का अभिषेक किया।
इसके पश्चात आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज के मुखारबिंद से वृहद शांतिधारा संपन्न हुई। शांतिधारा करने का सौभाग्य नितिन गोधा एवं सुनील कासलीवाल को प्राप्त हुआ। धार्मिक मंत्रों और भगवान पार्श्वनाथ के जयकारों से आयोजन स्थल का वातावरण भक्तिमय हो गया।
पालकी में विराजित कर निकाला 123 किलो का निर्वाण लड्डू
महोत्सव का मुख्य आकर्षण भगवान पार्श्वनाथ को समर्पित किया गया 123 किलो का विशाल निर्वाण लड्डू रहा। आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज, मुनिश्री अनुमान सागर महाराज और समाजजनों की मौजूदगी में भगवान पार्श्वनाथ का निर्वाण पाठ किया गया।
इसके बाद विशाल निर्वाण लड्डू को पालकी में विराजित किया गया। श्रद्धालुओं ने पालकी के साथ भगवान की पांच परिक्रमा लगाईं। जयकारों और भक्तिमय संगीत के बीच लड्डू भगवान पार्श्वनाथ के चरणों में समर्पित किया गया।
मुख्य 123 किलो का निर्वाण लड्डू समर्पित करने का सौभाग्य नरेश रांवका, सचिन गोधा, सतीशचंद्र चांदवाड और विनोद जैन को प्राप्त हुआ।
23 किलो का निर्वाण लड्डू भी किया समर्पित


मुख्य निर्वाण लड्डू के साथ भगवान पार्श्वनाथ के 23वें तीर्थंकर होने के प्रतीक स्वरूप 23 किलो का निर्वाण लड्डू भी अर्पित किया गया। इसे समर्पित करने का सौभाग्य निर्मल पाटनी को प्राप्त हुआ।
इसके अलावा बड़ी संख्या में समाज के पुरुषों, महिलाओं, बालक-बालिकाओं और अन्य श्रद्धालुओं ने भी भगवान पार्श्वनाथ के समक्ष निर्वाण लड्डू समर्पित किए। संगीतमय भक्ति के बीच श्रद्धालु झूमते-गाते हुए भगवान पार्श्वनाथ के जयकारे लगाते रहे।
पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक उत्साह का माहौल बना रहा और श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ के अहिंसा, संयम, तप और त्याग के संदेश को याद किया।
आचार्य चैत्य सागर महाराज का 43वां दीक्षा दिवस मनाया
भगवान पार्श्वनाथ के निर्वाण महोत्सव के साथ ही आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज का 43वां दीक्षा दिवस भी विशेष रूप से मनाया गया। इस अवसर पर गुरु पूजन, पाद प्रक्षालन और शास्त्र भेंट सहित विभिन्न धार्मिक क्रियाएं संपन्न हुईं।
दीक्षा दिवस को 43 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में कार्यक्रम को भी विशेष स्वरूप दिया गया। 43 परिवारों ने गुरु पूजन में हिस्सा लिया और सजी हुई थालियों में अष्ट द्रव्य के साथ आचार्य श्री की पूजा-अर्चना की।
आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य गुरु भक्त परिवार को प्राप्त हुआ, जबकि संजय-सचिन गोधा परिवार ने शास्त्र भेंट किया।
आचार्य श्री को नवीन पिच्छिका भेंट


दीक्षा दिवस के अवसर पर आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज को नवीन पिच्छिका भी भेंट की गई। नवीन पिच्छिका भेंट करने का सौभाग्य राजू एवं रेनू जैन, आगरा को प्राप्त हुआ।
समाजजनों ने आचार्य श्री के चरणों में श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान चातुर्मास समिति के अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र गंगवाल, सचिव निर्मल पाटनी, विकास गंगवाल, विनय कासलीवाल, पंकज छाबड़ा, पंकज बाकलीवाल, प्रशांत गंगवाल और संजय गोधा सहित अन्य समाजजन मौजूद रहे।
कार्यक्रम का संचालन विनय कासलीवाल ने किया।
तेरापंथ और बीसपंथ ने साथ चढ़ाया निर्वाण लड्डू
निर्वाण महोत्सव में सामाजिक एकता का विशेष संदेश भी देखने को मिला। दिगंबर जैन समाज के तेरापंथ और बीसपंथ परंपरा से जुड़े श्रद्धालुओं ने एक साथ भगवान पार्श्वनाथ को निर्वाण लड्डू समर्पित किया।
जैन समाज के अनुसार बीसपंथ परंपरा में बूंदी का निर्वाण लड्डू और तेरापंथ परंपरा में शक्कर का निर्वाण लड्डू अर्पित करने की परंपरा है। आयोजन में दोनों परंपराओं के समाजजनों ने आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज और मुनिश्री अनुमान सागर महाराज के सानिध्य में एक साथ धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया।
दोनों पंथों के लोगों द्वारा संयुक्त रूप से निर्वाण लड्डू अर्पित किए जाने को समाज में आपसी सद्भाव और एकता के संदेश के रूप में देखा गया।
जयकारों से गूंज उठा चंपाबाग धर्मशाला परिसर
भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक और आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज के 43वें दीक्षा दिवस के संयुक्त आयोजन ने पूरे चंपाबाग धर्मशाला परिसर को भक्तिमय बना दिया। अभिषेक से लेकर निर्वाण लड्डू समर्पण तक श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया।
विशाल 123 किलो निर्वाण लड्डू, 23 किलो का विशेष लड्डू, गुरु पूजन और दोनों जैन पंथों की संयुक्त सहभागिता आयोजन के प्रमुख आकर्षण रहे। हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ के चरणों में श्रद्धा अर्पित करते हुए मोक्ष कल्याणक की मंगल भावना की और आचार्य श्री से आशीर्वाद प्राप्त किया।
