गुरु वल्लभ स्कूल पूना में आचार्य विजय नित्यानंद सूरीश्वरजी की उपस्थिति में आधुनिक पुस्तकालय और आर्ट रूम का उद्घाटन हुआ।
गुरु वल्लभ स्कूल पूना में आधुनिक पुस्तकालय और आर्ट रूम का उद्घाटन, शिक्षा को मिला नया विस्तार
गुरु वल्लभ स्कूल पूना में शिक्षा और आधुनिक तकनीक को नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक आयोजन संपन्न हुआ। पंजाब केसरी विजय वल्लभ सूरीश्वरजी म.सा. समुदाय के गच्छाधिपति आचार्य विजय नित्यानंद सूरीश्वरजी म.सा. की पावन उपस्थिति में विद्यालय के अत्याधुनिक पुस्तकालय और आर्ट रूम का भव्य उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर शिक्षा, संस्कार और तकनीक के समन्वय को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिए गए।
पुणे स्थित गुरु वल्लभ स्कूल पूना में आयोजित इस समारोह में बड़ी संख्या में ट्रस्ट पदाधिकारी, शिक्षक, विद्यार्थी, अभिभावक और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
गुरु वल्लभ स्कूल पूना में शिक्षा को मिला नया आयाम
गुरु वल्लभ स्कूल पूना में आयोजित इस कार्यक्रम ने शिक्षा और संस्कारों के महत्व को नई ऊर्जा प्रदान की। उद्घाटन समारोह में आचार्य विजय नित्यानंद सूरीश्वरजी म.सा. ने कहा कि गुरु वल्लभ ने पूरे भारत में शिक्षा की अलख जगाई और समाज को शिक्षित करने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए।
उन्होंने विशेष रूप से गोडवाड़ और पंजाब क्षेत्र में किए गए शैक्षणिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा समाज को सशक्त बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
आचार्य विजय नित्यानंद सूरीश्वरजी ने दिया प्रेरणादायी संदेश
आचार्य विजय नित्यानंद सूरीश्वरजी ने अपने संबोधन में कहा:“केवल पुस्तकीय शिक्षा पर्याप्त नहीं होती। कला और सृजनशीलता बच्चों के व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण आधार हैं।”उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा में तकनीक और संस्कार दोनों का समन्वय आवश्यक है।
गुरु वल्लभ स्कूल पूना का अत्याधुनिक आर्ट रूम बना आकर्षण
विद्यालय में निर्मित नया आर्ट रूम विद्यार्थियों की रचनात्मक क्षमता को विकसित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
आर्ट रूम में उपलब्ध सुविधाएं
- आधुनिक बैठक व्यवस्था
- डिजिटल ड्राइंग सुविधा
- कंप्यूटर आधारित चित्रकला
- रंग और ब्रश की व्यवस्था
- चित्रफलक और आर्ट सामग्री
इस अत्याधुनिक आर्ट रूम का निर्माण इंदरभाई, महावीरभाई और नरेंद्रभाई छाजेड परिवार द्वारा करवाया गया।
डिजिटल पुस्तकालय विद्यार्थियों के लिए वरदान
गुरु वल्लभ स्कूल पूना में निर्मित “कांचनदीप आधुनिक डिजिटल पुस्तकालय” विद्यार्थियों के लिए ज्ञान का आधुनिक केंद्र बनेगा।
पुस्तकालय में उपलब्ध सामग्री
- संदर्भ पुस्तकें
- बाल साहित्य
- उपन्यास
- धार्मिक पुस्तकें
- विश्वकोश
- कहानियां
विद्यालय अध्यक्ष सुभाष परमार ने कहा कि पुस्तकालय किसी भी शिक्षण संस्था की शैक्षणिक गुणवत्ता की रीढ़ होता है।
शिक्षा के साथ संस्कारों पर विशेष जोर
आचार्य विजय नित्यानंद सूरीश्वरजी ने कहा कि विद्यालय विद्यार्थियों को केवल अकादमिक ज्ञान ही नहीं बल्कि संस्कार और नैतिक मूल्यों से भी जोड़ रहा है।उन्होंने विद्यार्थियों को:
- अनुशासन
- सृजनशीलता
- आध्यात्मिकता
- आत्मविश्वास
के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।
गुरु वल्लभ स्कूल पूना में आधुनिक तकनीक का उपयोग
विद्यालय में आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार किया जा रहा है।
स्मार्ट शिक्षा मॉडल
- डिजिटल लर्निंग
- टेक्नोलॉजी बेस्ड क्लासरूम
- प्रैक्टिकल ट्रेनिंग
- स्किल डेवलपमेंट
पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
दानदाताओं और ट्रस्ट का महत्वपूर्ण योगदान
इस आयोजन में विभिन्न दानदाताओं और ट्रस्ट सदस्यों की भूमिका सराहनीय रही।
प्रमुख योगदानकर्ता
- संजयभाई दिलीपचंद गादिया परिवार
- इंदरभाई छाजेड परिवार
- महावीरभाई छाजेड परिवार
- नरेंद्रभाई छाजेड परिवार
इन परिवारों ने आधुनिक सुविधाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख अतिथि
कार्यक्रम में कई प्रमुख गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
प्रमुख उपस्थितजन
- मैनेजिंग ट्रस्टी सुभाष ओसवाल
- ट्रस्ट सेक्रेटरी केसरीमल मुथा
- विद्यालय अध्यक्ष सुभाष परमार
- सचिव पुखराज संघवी
- कोषाध्यक्ष सुरेश परमार
- प्रिंसिपल विमल परदेशी
- शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी
विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में बड़ा कदम
गुरु वल्लभ स्कूल पूना में शुरू की गई ये नई सुविधाएं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को मजबूत आधार प्रदान करेंगी।विद्यालय प्रशासन का उद्देश्य विद्यार्थियों को:
- आधुनिक शिक्षा
- कला कौशल
- तकनीकी दक्षता
- सांस्कृतिक मूल्य
से जोड़ना है।
समाज में शिक्षा जागरण का महत्वपूर्ण केंद्र
गुरु वल्लभ स्कूल वर्षों से समाज में शिक्षा और संस्कारों के प्रसार का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।विद्यालय की यह पहल भविष्य में हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी साबित होगी।
निष्कर्ष
गुरु वल्लभ स्कूल पूना में अत्याधुनिक पुस्तकालय और आर्ट रूम का उद्घाटन शिक्षा और तकनीक के समन्वय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आचार्य विजय नित्यानंद सूरीश्वरजी के प्रेरणादायी विचारों ने विद्यार्थियों और समाज को शिक्षा के महत्व का संदेश दिया। यह आयोजन न केवल विद्यालय बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणादायी साबित हुआ।
