फिर जेल से बाहर आया गुरमीत राम रहीम, 7 साल में 17वीं बार मिली 21 दिन की रिहाई
सुबह 6:05 बजे रोहतक की सुनारिया जेल से निकला डेरा सच्चा सौदा प्रमुख, काफिले के साथ सिरसा आश्रम के लिए रवाना; बार-बार पैरोल-फरलो मिलने पर फिर उठे सवाल
सिरसा/रोहतक। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह एक बार फिर रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर आ गया है। मंगलवार, 25 अगस्त 2026 की सुबह करीब 6 बजकर 5 मिनट पर वह जेल से बाहर निकला और सुरक्षा व्यवस्था के बीच अपने काफिले के साथ सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा आश्रम के लिए रवाना हुआ। इस बार उसे 21 दिन की रिहाई मिली है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पिछले करीब सात वर्षों में यह 17वां मौका है, जब राम रहीम को पैरोल या फरलो के जरिए जेल से बाहर आने की अनुमति मिली है।
राम रहीम के जेल से बाहर आने के दौरान सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। बताया जा रहा है कि वह इस अवधि को सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा आश्रम में बिताएगा। प्रशासन की ओर से उसकी गतिविधियों और रिहाई से जुड़ी शर्तों के पालन पर नजर रखी जाएगी।
21 दिन के लिए जेल से बाहर आया राम रहीम
जानकारी के मुताबिक राम रहीम को इस बार 21 दिन की रिहाई की अनुमति दी गई है। मंगलवार तड़के जेल से बाहर आने के बाद उसका काफिला सीधे सिरसा की ओर रवाना हुआ। उसके आश्रम पहुंचने को लेकर समर्थकों में भी हलचल देखी जा रही है।
राम रहीम के जेल से बाहर आने के साथ ही उसकी बार-बार मिलने वाली पैरोल और फरलो को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है। विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों की ओर से पहले भी सवाल उठाए जाते रहे हैं कि गंभीर मामलों में सजा काट रहे डेरा प्रमुख को इतनी बार जेल से बाहर आने की अनुमति क्यों दी जाती है।
साध्वी यौन शोषण मामले में काट रहा सजा
गुरमीत राम रहीम सिंह साध्वी यौन शोषण मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद से सजा काट रहा है। वर्ष 2017 में उसे दोषी ठहराए जाने के बाद जेल भेजा गया था। इसके बाद से वह रोहतक की सुनारिया जेल में बंद रहा है।
उसके खिलाफ अलग-अलग मामलों में अदालतों में कानूनी कार्यवाही भी चली है। राम रहीम से जुड़े मामलों ने वर्षों से राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी हैं। ऐसे में उसे मिलने वाली प्रत्येक पैरोल या फरलो राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बन जाती है।
बार-बार जेल से बाहर आने पर उठते रहे सवाल
राम रहीम को पिछले कुछ वर्षों में लगातार अंतराल पर पैरोल और फरलो मिलती रही है। इसी वजह से राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से कई बार सवाल उठाए गए हैं।
आलोचकों का कहना है कि गंभीर अपराधों में सजा काट रहे व्यक्ति को इतनी बार जेल से बाहर आने की अनुमति मिलने से जेल नियमों और समानता को लेकर सवाल खड़े होते हैं। वहीं पैरोल और फरलो दिए जाने की प्रक्रिया संबंधित कानूनी प्रावधानों और प्रशासनिक नियमों के तहत होती है।
इस बार भी 21 दिन के लिए बाहर आने की खबर के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
विधायक ब्रह्म शंकर जिंपा ने उठाए सवाल
होशियारपुर से विधायक ब्रह्म शंकर जिंपा ने राम रहीम को मिली रिहाई पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक हितों से जोड़ने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि गंभीर मामलों में सजा काट रहे लोगों को बार-बार इस तरह की राहत दिए जाने पर विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक जरूरत और वोट बैंक को ध्यान में रखकर ऐसे फैसले लिए जाते हैं। जिंपा ने ऐसी रिहाई का विरोध करते हुए न्यायिक स्तर पर भी मामले पर ध्यान दिए जाने की मांग की।
हालांकि यह विधायक द्वारा लगाया गया आरोप है। पैरोल या फरलो दिए जाने के पीछे राजनीतिक कारण होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
2020 में पहली बार एक दिन की मिली थी पैरोल
राम रहीम को पिछले वर्षों में कई बार जेल से बाहर आने की अनुमति मिली है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक अक्टूबर 2020 में उसे पहली बार एक दिन की पैरोल मिली थी। इसके बाद मई 2021 में भी उसे एक दिन के लिए पैरोल पर बाहर आने की अनुमति दी गई।
वर्ष 2022 में यह सिलसिला तेजी से बढ़ा। फरवरी 2022 में उसे 21 दिन की फरलो मिली। इसके बाद जून 2022 में 30 दिन की पैरोल और अक्टूबर 2022 में 40 दिन की पैरोल दी गई।
2023 में तीन बार आया जेल से बाहर
वर्ष 2023 में भी राम रहीम तीन बार जेल से बाहर आया। जनवरी 2023 में उसे 40 दिन की पैरोल मिली। इसके बाद जुलाई में 30 दिन और नवंबर में 21 दिन की पैरोल पर वह जेल से बाहर रहा।
इन लगातार रिहाइयों के कारण उस समय भी राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए थे। हर बार राम रहीम के जेल से बाहर आने पर उसके समर्थकों की गतिविधियों और डेरा से जुड़े आयोजनों पर भी नजर रही।
2024 और 2025 में भी जारी रहा सिलसिला
जनवरी 2024 में राम रहीम को 50 दिन की पैरोल मिली। अगस्त 2024 में उसे 21 दिन की फरलो और अक्टूबर में 20 दिन की पैरोल दी गई।
वर्ष 2025 में भी वह कई बार जेल से बाहर आया। जनवरी 2025 में 30 दिन की पैरोल मिली, जबकि अप्रैल में 21 दिन की फरलो दी गई। इसके बाद अगस्त 2025 में उसे 40 दिन की पैरोल पर बाहर आने की अनुमति मिली।
इस तरह वर्ष 2020 से शुरू हुआ पैरोल और फरलो का सिलसिला लगभग हर साल जारी रहा।
2026 में तीसरी बार जेल से बाहर
वर्ष 2026 में भी राम रहीम को कई बार जेल से बाहर आने की अनुमति मिली है। जनवरी में उसे 40 दिन की पैरोल मिली थी। इसके बाद मई 2026 में 30 दिन की पैरोल पर वह जेल से बाहर आया था। बताया गया कि वह 26 जून को वापस जेल पहुंचा था।
अब 25 अगस्त 2026 को एक बार फिर उसे 21 दिन के लिए जेल से बाहर आने की अनुमति मिली है। इसके साथ ही 2020 से अब तक पैरोल और फरलो के जरिए उसके जेल से बाहर आने की संख्या 17 बताई जा रही है।
पैरोल और फरलो में क्या है अंतर?
पैरोल और फरलो दोनों के तहत कैदी को सीमित समय के लिए जेल से बाहर रहने की अनुमति मिल सकती है, लेकिन दोनों का उद्देश्य और कानूनी आधार अलग-अलग हो सकता है। पैरोल आमतौर पर किसी विशेष परिस्थिति या कारण के आधार पर दी जाती है, जबकि फरलो लंबी अवधि की सजा काट रहे पात्र कैदियों के लिए नियमों के तहत मिलने वाली अस्थायी रिहाई का एक अलग प्रावधान है।
दोनों ही स्थितियों में कैदी को प्रशासन द्वारा निर्धारित शर्तों का पालन करना होता है। शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित अधिकारियों द्वारा कार्रवाई की जा सकती है।
सिरसा आश्रम में बिताएगा रिहाई की अवधि
राम रहीम के इस बार सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा आश्रम में रहने की जानकारी सामने आई है। उसके पहुंचने को लेकर समर्थकों की गतिविधियां बढ़ सकती हैं, जिसे देखते हुए प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था और निर्धारित शर्तों पर नजर रखी जाएगी।
फिलहाल 21 दिन की इस रिहाई के साथ राम रहीम एक बार फिर जेल से बाहर है। वहीं बार-बार मिल रही पैरोल और फरलो को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में प्रशासन की नजर इस बात पर रहेगी कि रिहाई की सभी शर्तों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
