गुना के सरकारी स्कूल में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल: किताबों की जगह YouTube पर रामायण-महाभारत दिखाने का आरोप
संवाददाता : हेमराज सहरिया
ग्रामीणों ने शिक्षकों की कार्यशैली पर उठाए सवाल, शिक्षा विभाग से उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग
Guna , मध्य प्रदेश। Guna जिले की राघौगढ़ तहसील के ग्राम केरगढ़ स्थित शासकीय स्कूल में शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल में विद्यार्थियों को निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाने के बजाय मोबाइल और YouTube के माध्यम से रामायण और महाभारत से संबंधित वीडियो दिखाए जा रहे हैं। मामले के सामने आने के बाद स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी है और उन्होंने शिक्षा विभाग से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और निर्धारित पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा मिलना उनका अधिकार है। ऐसे में यदि नियमित कक्षाओं के स्थान पर अन्य गतिविधियों में अधिक समय दिया जा रहा है, तो इसकी जांच आवश्यक है।
2 सितंबर को सामने आया मामला
बताया गया है कि 2 सितंबर 2026 को ग्राम परसोलिया निवासी नेपाल भील किसी व्यक्तिगत कार्य से ग्राम केरगढ़ स्थित शासकीय विद्यालय पहुंचे थे। इसी दौरान स्कूल परिसर से तेज आवाज सुनाई देने पर उन्होंने मामले की जानकारी लेने का प्रयास किया।
नेपाल भील के अनुसार, स्कूल में बच्चों को YouTube पर रामायण और महाभारत से जुड़े वीडियो दिखाए जा रहे थे। इसके बाद उन्होंने स्कूल की शिक्षण व्यवस्था को लेकर जानकारी ली।
ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल में नियमित पाठ्यक्रम की पढ़ाई के बजाय बच्चों को धार्मिक कथाओं और वीडियो के माध्यम से समय बिताया जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में स्कूल प्रबंधन अथवा शिक्षा विभाग की ओर से आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है। आरोपों की वास्तविक स्थिति विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
दो शिक्षकों पर लगाए गए गंभीर आरोप
ग्रामीणों ने स्कूल में पदस्थ शिक्षक चंदन सिंह भील, निवासी गादेर, और कमलेश प्रजापति, निवासी सालोटा, पर अपने पद से जुड़े दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने के आरोप लगाए हैं।
शिकायतकर्ता के अनुसार जब नेपाल भील ने शिक्षक कमलेश प्रजापति से बच्चों को पढ़ाए जाने के तरीके को लेकर सवाल किया, तो शिक्षक की ओर से कथित तौर पर कहा गया कि किताबों में गीता और रामायण का उल्लेख है, इसलिए वही पढ़ाया जा रहा है।
इस कथित जवाब को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों की जानकारी अपनी जगह महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को निर्धारित शैक्षणिक पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाना प्राथमिक जिम्मेदारी है।

आदिवासी क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा को लेकर चिंता
ग्रामीणों ने विशेष रूप से आदिवासी क्षेत्र के विद्यार्थियों की शिक्षा को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के बच्चे बेहतर शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ सकते हैं और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर सकते हैं।
नेपाल भील ने कहा कि विद्यार्थियों को संविधान, सामान्य ज्ञान, विज्ञान, गणित और अन्य आवश्यक विषयों की मजबूत आधारभूत शिक्षा मिलनी चाहिए, ताकि वे भविष्य में डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, शिक्षक तथा प्रशासनिक अधिकारी जैसे विभिन्न क्षेत्रों में करियर बना सकें।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि उनका विरोध किसी धर्म या धार्मिक ग्रंथ से नहीं है। उनकी आपत्ति कथित तौर पर स्कूल में निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुरूप नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिलने को लेकर है।
करीब 15 ग्रामीण सामने आए
मामले को लेकर ग्राम केरगढ़ के करीब 15 ग्रामीणों के सामने आने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग और प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि जांच के दौरान स्कूल में शिक्षकों की उपस्थिति, कक्षा संचालन, विद्यार्थियों को पढ़ाए जा रहे विषयों और शिक्षण पद्धति की वास्तविक स्थिति की जानकारी ली जानी चाहिए।
उन्होंने मांग की है कि केवल शिकायत दर्ज करने तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि अधिकारियों द्वारा स्कूल का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाए।
ग्रामीणों ने रखीं प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें पूरे मामले की पारदर्शी एवं निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच प्रमुख है।
इसके साथ ही स्कूल में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने और उनकी शिक्षण शैली की प्रभावी मॉनिटरिंग करने की मांग की गई है। ग्रामीण चाहते हैं कि विद्यार्थियों को निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाए।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि यदि विभागीय जांच में शिक्षकों के खिलाफ लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित शिक्षकों के खिलाफ नियमानुसार उचित विभागीय कार्रवाई की जाए।
अब शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर नजर
मामला सामने आने के बाद अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की ओर हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विभाग इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए स्कूल की जांच कराएगा और विद्यार्थियों को मिल रही शिक्षा की वास्तविक स्थिति सामने लाएगा।
यदि जांच में ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ विभागीय स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि आरोप तथ्यों से परे पाए जाते हैं, तो विभाग की जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
फिलहाल यह मामला सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षकों की जवाबदेही और विद्यार्थियों को निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार शिक्षा उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है और जांच के बाद क्या तथ्य सामने आते हैं।
