GST कटौती की राहत खत्म, फ्रिज-AC-TV और लैपटॉप 15% तक महंगे होने की आशंका
पिछले साल GST में कटौती के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों पर मिली राहत अब धीरे-धीरे खत्म होती दिखाई दे रही है। बाजार में एक बार फिर महंगाई का दबाव बढ़ने लगा है और इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने वाला है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में एयर कंडीशनर (AC), रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन, टेलीविजन, स्मार्टफोन और लैपटॉप जैसे जरूरी इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की कीमतों में 5% से लेकर 15% तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की कीमतों में तेज उछाल की आशंका
उद्योग जगत से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू उपकरणों और टीवी की कीमतों में लगभग 5 से 7 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं स्मार्टफोन और मोबाइल सेगमेंट में यह बढ़ोतरी और ज्यादा हो सकती है, जहां 10 से 15 प्रतिशत तक दाम बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
लैपटॉप की कीमतों में भी 8 से 10 प्रतिशत तक का इजाफा हो सकता है। लगातार बढ़ती कीमतों से ग्राहकों की खरीदारी क्षमता पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, जिससे बाजार की मांग कमजोर हो सकती है।
कच्चे तेल और चिप्स की बढ़ती कीमत बनी कारण
कीमतों में इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह कच्चे तेल से बने प्लास्टिक डेरिवेटिव्स और मेमोरी चिप्स की बढ़ती लागत बताई जा रही है। इनपुट कॉस्ट में लगातार हो रही बढ़ोतरी के कारण कंपनियां मजबूरी में उत्पादों के दाम बढ़ा रही हैं।
इसके अलावा वैश्विक सप्लाई चेन में बाधाएं और लॉजिस्टिक्स लागत में बढ़ोतरी भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार मानी जा रही है।
कंपनियों ने दिए कीमत बढ़ाने के संकेत
कई प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों ने पहले ही कीमतें बढ़ाने के संकेत दे दिए हैं।
ब्लू स्टार के प्रबंध निदेशक बी. त्यागराजन के अनुसार, हाल ही में 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद कंपनी जल्द ही 6 से 7 प्रतिशत और कीमतें बढ़ा सकती है।
वहीं हायर इंडिया के अध्यक्ष सतीश एनएस ने बताया कि 21 अप्रैल से कंपनी अपने सभी उत्पादों की कीमतों में 4 से 7 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने की तैयारी में है।
टीवी कंपनियां भी अगले महीने तक 6 से 8 प्रतिशत तक दाम बढ़ाने की योजना पर काम कर रही हैं।
लगातार तीसरी बार बढ़े दाम
इस बार कीमतों में बढ़ोतरी कोई पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ महीनों में यह तीसरी बार है जब इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के दाम बढ़ाए जा रहे हैं।
- पहली बढ़ोतरी: जनवरी-फरवरी में इनपुट कॉस्ट और रुपये की कमजोरी के कारण
- दूसरी बढ़ोतरी: मार्च-अप्रैल में कच्चे तेल और लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ने से
- तीसरी बढ़ोतरी: अब मेमोरी चिप्स की महंगाई और सप्लाई चेन बाधाओं के कारण
इस तरह लगातार लागत बढ़ने से कंपनियां उपभोक्ताओं पर इसका बोझ डालने को मजबूर हो रही हैं।
स्मार्टफोन बाजार पर भी असर
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती कीमतों का सबसे बड़ा असर स्मार्टफोन बाजार पर पड़ेगा। महंगे कंपोनेंट्स और चिप्स की वजह से स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे बिक्री में गिरावट आ सकती है।
अनुमान है कि अप्रैल से जून के बीच स्मार्टफोन बिक्री में दोहरे अंकों की गिरावट देखी जा सकती है। वहीं पूरे साल के दौरान इस बाजार में लगभग 10 प्रतिशत तक की गिरावट की संभावना जताई जा रही है।
FMCG उत्पाद भी हुए महंगे
महंगाई का असर केवल इलेक्ट्रॉनिक्स तक सीमित नहीं है। रोजमर्रा के उपयोग वाले FMCG उत्पाद जैसे साबुन, डिटर्जेंट और अन्य घरेलू सामान भी महंगे हो रहे हैं।
पाम ऑयल और पैकेजिंग सामग्री की बढ़ती कीमतों के कारण कंपनियां या तो दाम बढ़ा रही हैं या फिर पैकेट का वजन कम कर रही हैं, जिससे उपभोक्ताओं को अप्रत्यक्ष रूप से नुकसान हो रहा है।
उपभोक्ताओं की जेब पर बढ़ता बोझ
लगातार बढ़ती कीमतों और महंगाई का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है। लोग अब खर्च करने में कटौती करने पर मजबूर हो सकते हैं, जिससे बाजार में मांग पर भी दबाव बनेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो खुदरा बाजार और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर दोनों की ग्रोथ पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
निष्कर्ष
GST में मिली राहत अब वैश्विक आर्थिक दबाव और बढ़ती उत्पादन लागत के कारण कमजोर पड़ती दिख रही है। कच्चे तेल, चिप्स और लॉजिस्टिक्स खर्च में लगातार बढ़ोतरी ने इलेक्ट्रॉनिक्स और FMCG सेक्टर को प्रभावित किया है।
आने वाले समय में उपभोक्ताओं को AC, टीवी, फ्रिज, स्मार्टफोन और लैपटॉप जैसे जरूरी उत्पादों के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। यह स्थिति बाजार और ग्राहकों दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।
