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“ग्रेसिम और लैंसेक्स उद्योग के प्रदूषण से तबाह नागदा के गांवों का दौरा करेगा भारतीय किसान यूनियन मंच – किसानों की बंजर भूमि और बढ़ते रोगों पर उठाई आवाज”

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Published On: 27 October 2025
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ग्रेसिम और लैंसेक्स उद्योग के प्रदूषण से प्रभावित गांवों का दौरा करेगा भारतीय किसान यूनियन मंच – किसानों की बंजर होती जमीन और घटते उत्पादन पर जताई गंभीर चिंता

नागदा जं. 26 अक्टूबर 2025 (निप्र):
भारतीय किसान यूनियन मंच ने नागदा क्षेत्र में फैले औद्योगिक प्रदूषण को लेकर बड़ा कदम उठाया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष कवि देव सिंह गुर्जर और राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र सिंह गुर्जर ने घोषणा की है कि वे नागदा और आसपास के उन गांवों का दौरा करेंगे जो ग्रेसिम इंडस्ट्रीज, केमिकल प्लांट्स और लैंसेक्स इंडिया लिमिटेड के औद्योगिक अपशिष्ट से गंभीर रूप से प्रभावित हैं।

बंजर होती जमीनें और घटता उत्पादन

भारतीय किसान यूनियन मंच के अनुसार, नागदा क्षेत्र में स्थित ग्रेसिम एसएफडी, केमिकल और लैंसेक्स उद्योग से निकलने वाला कैमिकल युक्त अपशिष्ट न केवल नदियों को प्रदूषित कर रहा है, बल्कि आसपास के खेतों की मिट्टी को भी जहरीला बना रहा है। इस जहरीले पानी के कारण गांवों की उपजाऊ जमीनें धीरे-धीरे बंजर होती जा रही हैं।
किसानों ने बताया कि पहले जिन खेतों में गेहूं, सोयाबीन और मक्का की भरपूर पैदावार होती थी, अब वहां उत्पादन लगभग शून्य के बराबर रह गया है। इससे किसानों को हर साल भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

किसान कर्ज में डूबते जा रहे हैं

फसलों के लगातार खराब होने के कारण किसान कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी भूमि का उपयोग करने में असमर्थ हो रहे हैं क्योंकि मिट्टी में रासायनिक तत्वों की मात्रा अत्यधिक बढ़ चुकी है। इस स्थिति ने गांव की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है।

प्रदूषण से बढ़ रही बीमारियां

कृषि भूमि ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों का स्वास्थ्य भी इस प्रदूषण का बड़ा शिकार बन रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, ग्रेसिम और लैंसेक्स उद्योग से छोड़े जा रहे कैमिकलयुक्त पानी से पीने के स्रोत दूषित हो गए हैं। इससे पुरुष, महिलाएं और बच्चे गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
कई गांवों में विकलांगता के मामले तेजी से बढ़े हैं। लोगों का कहना है कि बच्चों में अपाहिजता और मानसिक विकार जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं, वहीं पशुधन – जैसे गाय और भैंस – भी इस गंदे पानी के सेवन से बीमार हो रहे हैं।

शासन की उदासीनता पर उठे सवाल

भारतीय किसान यूनियन मंच ने शासन-प्रशासन पर भी निशाना साधते हुए कहा कि बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। संगठन का कहना है कि प्रशासन को औद्योगिक इकाइयों की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए और किसानों को उचित मुआवजा देना चाहिए।

14 गांवों का होगा दौरा

भारतीय किसान यूनियन मंच की टीम आने वाले दिनों में नागदा क्षेत्र के 14 प्रभावित गांवों का दौरा करेगी। इस दौरान संगठन के पदाधिकारी किसानों से मिलकर उनकी वास्तविक स्थिति का जायजा लेंगे, फसल और स्वास्थ्य नुकसान का आकलन करेंगे तथा शासन को रिपोर्ट सौंपेंगे।
कवि देव सिंह गुर्जर ने कहा, “हम किसानों की आवाज बनकर मैदान में उतर रहे हैं। यदि सरकार ने शीघ्र कदम नहीं उठाए, तो भारतीय किसान यूनियन मंच राज्यव्यापी आंदोलन की दिशा में आगे बढ़ेगा।”

स्थानीय लोगों की उम्मीदें

ग्रामीणों को उम्मीद है कि यूनियन के हस्तक्षेप से उनकी दशा पर सरकार का ध्यान जाएगा और वर्षों से लंबित समस्याओं का समाधान मिलेगा। किसानों ने मांग की है कि प्रभावित गांवों में स्वच्छ पानी की व्यवस्था, स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन, और मिट्टी सुधार कार्यक्रम तत्काल शुरू किए जाएं।

संवाददाता: जीवन लाल जैन, नागदा
मो.: 81205 72549

 

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