—Advertisement—

भक्तिमय माहौल में संपन्न हुआ वीर तोलजी जुजार मामाजी का भव्य तेरस मेला

Author Picture
Published On: 28 July 2026
भक्तिमय

—Advertisement—

भक्तिमय माहौल में संपन्न हुआ वीर तोलजी जुजार मामाजी का भव्य तेरस मेला

पूर्व संध्या पर भजनों की गंगा में झूमे श्रद्धालु, 48 गांवों के ग्रामीणों ने ग्रहण की सामूहिक महाप्रसादी

भीनमाल (मुकेश सोलंकी)। निकटवर्ती ग्राम खाण्डादेवल की पावन गोचर भूमि पर स्थित वीर तोलजी जुजार मामाजी मंदिर में आयोजित वार्षिक तेरस मेला इस वर्ष भी आस्था, परंपरा और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम बनकर सामने आया। सैकड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी, संतों का सानिध्य, भक्ति संगीत की मधुर स्वर लहरियां और विशाल सामूहिक महाप्रसादी ने पूरे आयोजन को यादगार बना दिया। दिनभर मंदिर परिसर “वीर तोलजी जुजार मामाजी की जय” के जयकारों से गूंजता रहा और श्रद्धालुओं की आस्था का अनुपम दृश्य देखने को मिला।

हर वर्ष की भांति इस बार भी आषाढ़ शुक्ल पक्ष की तेरस पर आयोजित इस धार्मिक मेले में खाण्डादेवल सहित आसपास के 48 गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। ग्रामीणों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मेले में भाग लिया तथा वीर तोलजी जुजार मामाजी के चरणों में शीश नवाकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की।

वीरता और गौ-रक्षा की अमर गाथा से जुड़ी है आस्था

मामाजी के परम भक्त सुरेश राजपुरोहित ने मंदिर के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वीर तोलजी जुजार मामाजी ने लगभग 130 वर्ष पूर्व गौ माता की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनकी अद्वितीय वीरता, धर्मनिष्ठा और गौ-सेवा की भावना ने उन्हें जन-जन की आस्था का केंद्र बना दिया।

उन्होंने बताया कि स्थानीय जनमानस आज भी मामाजी को अपने आराध्य देव के रूप में पूजता है। उनके बलिदान की स्मृति को चिरस्थायी बनाए रखने तथा नई पीढ़ी को उनके आदर्शों से प्रेरणा देने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष आषाढ़ शुक्ल पक्ष की तेरस को इस मेले का आयोजन किया जाता है। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उसी श्रद्धा, उत्साह और भव्यता के साथ निभाई जा रही है।

सुबह से उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

सोमवार प्रातःकाल से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। दूर-दराज के गांवों से परिवारों सहित आए श्रद्धालुओं ने मंदिर में दर्शन कर पूजा-अर्चना की। पूरे दिन मंदिर परिसर भक्तों की भीड़ से गुलजार रहा।

श्रद्धालुओं ने विधिवत पूजा कर नारियल, चुनरी और प्रसाद अर्पित किया तथा परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण की प्रार्थना की। मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं, लेकिन सुव्यवस्थित व्यवस्था के कारण दर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए।

मेले में पहुंचे ग्रामीणों के चेहरों पर आस्था और उत्साह साफ झलक रहा था। बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी ने पूरे उत्साह के साथ धार्मिक आयोजन में भाग लेकर अपनी संस्कृति और परंपरा के प्रति गहरा जुड़ाव प्रदर्शित किया।

भजन संध्या ने बांधा भक्तिरस का समां

मेले की पूर्व संध्या पर आयोजित विशाल भजन संध्या इस धार्मिक आयोजन का प्रमुख आकर्षण रही। प्रदेश के प्रसिद्ध भजन गायकों एवं कलाकारों ने एक से बढ़कर एक भक्ति गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

जैसे-जैसे रात गहराती गई, वैसे-वैसे भक्ति का रंग और अधिक गहरा होता गया। कलाकारों द्वारा प्रस्तुत मामाजी के भजन, देवी-देवताओं की स्तुतियां तथा लोकभक्ति गीतों पर श्रद्धालु देर रात तक झूमते रहे। पूरे वातावरण में भक्ति, श्रद्धा और उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिला।

भजन संध्या के दौरान मंदिर परिसर रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा उठा। श्रद्धालु पूरे मनोयोग से भजनों का आनंद लेते रहे और समय-समय पर मामाजी के जयकारों से वातावरण गुंजायमान होता रहा।

हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण की सामूहिक महाप्रसादी

धार्मिक आयोजन के दौरान केशरसिंह मालसिंह राजपूत परिवार (सुराणा) की ओर से विशाल सामूहिक भोजन प्रसादी का आयोजन किया गया। इस सेवा कार्य में परिवार के सदस्यों एवं अनेक स्वयंसेवकों ने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपनी सेवाएं दीं।

हजारों श्रद्धालुओं ने पंगत में बैठकर महाप्रसादी ग्रहण की। भोजन व्यवस्था अत्यंत सुव्यवस्थित रही और सभी श्रद्धालुओं को प्रेमपूर्वक प्रसादी परोसी गई। ग्रामीणों ने इसे सेवा, समर्पण और सामाजिक एकता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

सामूहिक प्रसादी के दौरान समाज के सभी वर्गों के लोग एक साथ बैठकर भोजन करते नजर आए, जिसने सामाजिक समरसता और भाईचारे का संदेश भी दिया।

48 गांवों की सहभागिता बनी आयोजन की विशेष पहचान

तेरस मेले की सबसे बड़ी विशेषता आसपास के 48 गांवों के ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी रही। सभी गांवों से श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में परिवार सहित मेले में पहुंचे। ग्रामीणों ने इस आयोजन को केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि सामाजिक मेल-मिलाप और सांस्कृतिक एकता का उत्सव भी बताया।

मेले में आए लोगों ने एक-दूसरे से मुलाकात कर वर्षों पुरानी परंपराओं को जीवंत बनाए रखा। युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर व्यवस्थाओं में सहयोग किया, जिससे आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

संतों के सानिध्य से मिला आध्यात्मिक संदेश

धार्मिक आयोजन के दौरान पूज्य तीर्थानंद महाराज का सानिध्य श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ। उन्होंने अपने प्रेरणादायी प्रवचनों में धर्म, सेवा, गौ-रक्षा, संस्कार और मानवता के महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि वीर तोलजी जुजार मामाजी का जीवन त्याग, साहस और धर्म रक्षा का प्रतीक है। समाज को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर गौ-सेवा, मानव सेवा और सामाजिक सद्भाव को आगे बढ़ाना चाहिए। उनके विचारों को श्रद्धालुओं ने बड़े ध्यानपूर्वक सुना और अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

समाज के गणमान्य लोगों की रही गरिमामयी उपस्थिति

इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिकों एवं समाजसेवियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम में केशरसिंह, महेंद्रसिंह, पाताराम पुरोहित, जैसाराम, कृष्ण कुमार, जवाराराम, भमराराम, हंजुराम पुरोहित, राजुराम पुरोहित तथा सुरेश कुमार पुरोहित सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता एवं ग्रामीण मौजूद रहे।

सभी अतिथियों ने आयोजन समिति की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन समाज को एकजुट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने भविष्य में भी इसी प्रकार के आयोजनों को निरंतर जारी रखने का आह्वान किया।

आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का बना प्रतीक

वीर तोलजी जुजार मामाजी का वार्षिक तेरस मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता और पारंपरिक मूल्यों का जीवंत प्रतीक बन चुका है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु केवल दर्शन ही नहीं करते, बल्कि समाज में प्रेम, भाईचारे, सेवा और सहयोग की भावना को भी मजबूत करते हैं।

भक्ति, श्रद्धा, सेवा, संतों के आशीर्वाद, भजन संध्या, विशाल महाप्रसादी और हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता के साथ संपन्न हुआ यह भव्य आयोजन एक बार फिर यह संदेश देकर गया कि धार्मिक परंपराएं केवल आस्था का विषय नहीं होतीं, बल्कि वे समाज को जोड़ने, संस्कृति को संरक्षित रखने और नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से परिचित कराने का सशक्त माध्यम भी हैं।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp