सिद्धाचल तप की पूर्णाहुति पर निकला भव्य वरघोड़ा, आठ तपस्वियों का किया बहुमान
साध्वी अर्हम्व्रता श्रीजी की शुभ निश्रा में धर्मसभा, पारणा और स्वामीवात्सल्य का आयोजन
संवाददाता: जीवनलाल जैन
नागदा। श्री श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन श्रीसंघ एवं आत्मलक्षी चातुर्मास समिति के तत्वावधान में सिद्धाचल तप की पूर्णाहुति के अवसर पर गुरुवार को विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। परम पूज्य साध्वी अर्हम्व्रता श्रीजी महाराज साहब आदि ठाणा-4 की शुभ निश्रा में आयोजित कार्यक्रम में समाजजनों ने तपस्वियों की तपस्या की अनुमोदना करते हुए उनका बहुमान किया।
नगर के प्रमुख मार्गों से निकला वरघोड़ा
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह तपस्वियों के भव्य वरघोड़े के साथ हुई। वरघोड़ा नगर के प्रमुख मार्गों से होकर पार्श्वप्रधान पाठशाला भवन पहुंचा, जहां यह धर्मसभा में परिवर्तित हो गया। समाज के लोगों ने जगह-जगह तपस्वियों का स्वागत किया और उनकी कठिन तप आराधना की अनुमोदना की।
धर्मसभा का शुभारंभ साध्वीश्री को गुरु वंदन के साथ किया गया। इसके बाद श्रीसंघ और आत्मलक्षी चातुर्मास समिति की ओर से तपस्वियों का बहुमान किया गया। कार्यक्रम में तपस्वियों के वधामणा का आयोजन भी हुआ, जिसका लाभ सरदारमल, विमलचंद और रितेश नागदा परिवार ने लिया।
आठ तपस्वियों का किया गया सम्मान
सिद्धाचल तप की आराधना पूर्ण करने वाली श्रीमती शशिबाला कांठेड़, श्रीमती मधु ओस्तवाल, श्रीमती शिल्पा गुगलिया, श्रीमती निर्मला पितलिया, श्रीमती प्रतिमा बुरड़, श्रीमती मोनिका चौधरी, श्रीमती वर्षा कटारिया और श्रीमती हेमलता कटलेचा का श्रीसंघ, विभिन्न संस्थाओं तथा परिवारजनों ने बहुमान किया।
समाजजनों ने तपस्वियों के तप की अनुमोदना करते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना की। तपस्वियों के परिवारों ने भी आयोजन में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
तप आत्मशुद्धि का श्रेष्ठ माध्यम: साध्वीश्री
धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी अर्हम्व्रता श्रीजी ने सिद्धाचल तीर्थ की महिमा और तप आराधना के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तप आत्मशुद्धि और कर्म निर्जरा का श्रेष्ठ साधन है। तपस्वियों द्वारा की गई कठिन आराधना पूरे समाज के लिए प्रेरणादायी है।
साध्वीश्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं को धर्म, संयम और साधना के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि तपस्या मनुष्य को आत्मचिंतन का अवसर प्रदान करती है और जीवन में त्याग, अनुशासन तथा सहनशीलता की भावना विकसित करती है।
धार्मिक वातावरण में हुआ पारणा
प्रवचन के बाद धार्मिक वातावरण में तपस्वियों का पारणा संपन्न हुआ। पारणा कराने का लाभ प्रकाशचंद, गुणवंत कुमार और नीलेश कुमार चौधरी परिवार ने प्राप्त किया। इसके बाद स्वामीवात्सल्य का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए। स्वामीवात्सल्य का लाभ सभी तपस्वी परिवारों ने संयुक्त रूप से लिया।
कार्यक्रम में नगर के प्रसिद्ध संगीतकारों के साथ आशीष चौधरी और अभिषेक कोलन ने अपनी भक्तिमय प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को परमात्मा की भक्ति से जोड़ा। भजनों और धार्मिक प्रस्तुतियों ने आयोजन को विशेष बना दिया।
कार्यक्रम का सफल संचालन मनोज वाग्रेचा ने किया। आयोजन को सफल बनाने में श्री श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन श्रीसंघ, आत्मलक्षी चातुर्मास समिति, तपस्वी परिवारों और समाजजनों का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम से संबंधित संपूर्ण जानकारी नीलेश चौधरी द्वारा प्रदान की गई।
