आर्यिका श्री संगममति माताजी के सान्निध्य में निकली भव्य णमोकार महामंत्र आरती शोभायात्रा
मुरैना/अम्बाह। (मनोज जैन नायक) आचार्य श्री सिद्धांत सागर महाराज जी की शिष्या आर्यिका श्री 105 संगममति माताजी ससंघ के मंगल सान्निध्य में आयोजित 35 दिवसीय णमोकार महामंत्र आरती कार्यक्रम के अंतर्गत महावीर सेवा मंडल द्वारा भव्य आरती शोभायात्रा निकाली गई। धार्मिक उत्साह और श्रद्धा से ओतप्रोत इस शोभायात्रा में बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु, महिलाएं, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हुए। पूरे नगर में शोभायात्रा के दौरान भक्तिमय वातावरण देखने को मिला।
नगर पालिका परिसर से प्रारंभ हुई शोभायात्रा
भव्य आरती शोभायात्रा का शुभारंभ नगर पालिका परिसर से हुआ। इसके बाद शोभायात्रा जसवंत रोड, परेड चौराहा सहित नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई जैन बगीची प्रांगण पहुंची। रास्तेभर श्रद्धालुओं में धार्मिक उत्साह दिखाई दिया।
शोभायात्रा में इंद्राणी मुकुट एवं माला धारण कर सुसज्जित बग्गी पर सवार होकर शामिल हुईं। श्रद्धालुओं ने धार्मिक भावनाओं के साथ शोभायात्रा में सहभागिता की। नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरती शोभायात्रा ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
जैन बगीची में माताजी के दर्शन और आशीर्वाद
शोभायात्रा के जैन बगीची प्रांगण पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने आर्यिका श्री संगममति माताजी ससंघ का दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान बड़ी संख्या में समाजजन प्रांगण में मौजूद रहे।
जैन बगीची में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के दौरान पंच परमेष्ठी, आचार्य श्री सिद्धांत सागर महाराज एवं गुरु मां की संगीतमय आरती की गई। आरती के समय श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ सहभागिता की। देखते ही देखते पूरा प्रांगण श्रद्धालुओं से भर गया।
सामूहिक णमोकार महामंत्र का हुआ वाचन
कार्यक्रम में सामूहिक रूप से णमोकार महामंत्र का वाचन किया गया। श्रद्धालुओं ने एक साथ महामंत्र का जाप कर धार्मिक वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया।
35 दिवसीय णमोकार महामंत्र आरती कार्यक्रम में प्रतिदिन समाज के बुजुर्ग, महिला-पुरुष और बच्चे उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। आयोजन के प्रति समाज के लोगों में लगातार उत्साह बना हुआ है।
कार्यक्रम में धार्मिक गतिविधियों के साथ समाज के लोगों की सहभागिता भी देखने को मिल रही है। आयोजकों द्वारा श्रद्धालुओं को धर्म और आध्यात्मिक चिंतन से जोड़ने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
लकी ड्रॉ के माध्यम से दिए जाते हैं उपहार
आयोजन के अंत में लकी ड्रॉ के माध्यम से विजेताओं का चयन किया जाता है। चयनित विजेताओं को पुण्यार्क परिवार की ओर से उपहार प्रदान किए जाते हैं। इससे आयोजन में शामिल श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिलता है।
धार्मिक आयोजन में भक्ति के साथ समाज की सामूहिक सहभागिता और आपसी जुड़ाव भी देखने को मिल रहा है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी वर्ग के लोग कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं।

पंच परमेष्ठियों का स्मरण महत्वपूर्ण
इस अवसर पर आर्यिका श्री संगममति माताजी ने णमोकार महामंत्र और पंच परमेष्ठियों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु—इन पांच परमेष्ठियों को सर्वोच्च वंदनीय माना गया है।
णमोकार महामंत्र में सर्वप्रथम इन्हीं पंच परमेष्ठियों को नमस्कार किया जाता है। माताजी ने कहा कि पंच परमेष्ठियों का स्मरण केवल मंत्र जाप तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उनके गुणों और आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास भी होना चाहिए।
उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया कि पंच परमेष्ठियों के गुणों का चिंतन व्यक्ति को आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। महामंत्र का जाप मन को एकाग्र करने और जीवन में सकारात्मक भाव विकसित करने का माध्यम बन सकता है।
अरिहंत और सिद्धों की महिमा
आर्यिका श्री संगममति माताजी ने कहा कि अरिहंतों ने घातिया कर्मों का नाश कर केवलज्ञान प्राप्त किया है। सिद्धों ने सभी कर्मों का क्षय कर मोक्ष की अवस्था प्राप्त की।
उन्होंने बताया कि आचार्य संघ के मार्गदर्शक होते हैं और साधु-संतों को धर्म एवं संयम के मार्ग पर आगे बढ़ाने का कार्य करते हैं। उपाध्याय शास्त्रों के शिक्षक होते हैं, जबकि साधु संयम और तप के माध्यम से आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ते हैं।
इन सभी पंच परमेष्ठियों के गुणों का स्मरण मनुष्य के भीतर धर्म, संयम, विनय और आत्मचिंतन की भावना को मजबूत करता है।
मंत्र जाप से मन की एकाग्रता
माताजी ने कहा कि णमोकार महामंत्र का जाप मन को एकाग्र करता है। जब व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति के साथ मंत्र का जाप करता है तो उसका मन बाहरी विषयों से हटकर आत्मचिंतन की ओर अग्रसर होता है।
उन्होंने कहा कि धार्मिक साधना का उद्देश्य केवल धार्मिक क्रिया पूरी करना नहीं, बल्कि अपने जीवन में अच्छे संस्कारों और सद्गुणों को विकसित करना होना चाहिए। पंच परमेष्ठियों के गुणों को जीवन में उतारकर व्यक्ति अपने व्यवहार और विचारों में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा
आर्यिका श्री संगममति माताजी ने श्रद्धालुओं से कहा कि धार्मिक आयोजनों के माध्यम से व्यक्ति को आत्मकल्याण और संयम के मार्ग पर आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। णमोकार महामंत्र का नियमित स्मरण व्यक्ति को धर्म के प्रति जागरूक करने के साथ आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में अहिंसा, संयम, विनय और सदाचार जैसे गुणों को अपनाने का प्रयास करना चाहिए। यही धार्मिक साधना का वास्तविक उद्देश्य है।

समाज में बना भक्तिमय माहौल
35 दिवसीय णमोकार महामंत्र आरती कार्यक्रम के चलते अम्बाह में जैन समाज के बीच उत्साह का वातावरण बना हुआ है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु आयोजन में शामिल हो रहे हैं।
महावीर सेवा मंडल द्वारा आयोजित भव्य शोभायात्रा ने कार्यक्रम को विशेष स्वरूप प्रदान किया। नगर के प्रमुख मार्गों से निकली शोभायात्रा और जैन बगीची में हुई संगीतमय आरती में श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी रही।
कार्यक्रम के माध्यम से समाज के लोगों को णमोकार महामंत्र के महत्व और पंच परमेष्ठियों के गुणों को अपने जीवन में अपनाने का संदेश दिया गया। धार्मिक आयोजन श्रद्धालुओं के लिए भक्ति, आत्मचिंतन और सामूहिक सहभागिता का अवसर बन रहा है।
रिपोर्ट: मनोज जैन नायक, मुरैना/अम्बाह
