सवासन टेकड़ी पर जन्माष्टमी का भव्य आयोजन, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
संवाददाता : धीरज कनाठे
प्रभातपट्टन। ब्लॉक के ग्राम पंचायत वलनी के अंतर्गत आने वाली प्रसिद्ध सवासन टेकड़ी पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व के अवसर पर इस वर्ष भी भव्य धार्मिक आयोजन और मेले का आयोजन किया गया। मां सवासिनी संस्कृति एवं शिक्षा विकास समिति के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पूरे दिन सवासन टेकड़ी का वातावरण भक्ति और आस्था से सराबोर रहा।
जन्माष्टमी पर्व को लेकर शुक्रवार सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। दूर-दराज के गांवों से लोग परिवार सहित सवासन टेकड़ी पहुंचे और मंदिर में दर्शन-पूजन कर भगवान श्रीकृष्ण एवं मां सवासिनी का आशीर्वाद लिया। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के चलते पूरे परिसर में धार्मिक उत्साह देखने को मिला।
रंग-बिरंगी सजावट से जगमगाया मंदिर परिसर
जन्माष्टमी पर्व को देखते हुए मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था। रंग-बिरंगी सजावट, फूलों की मालाओं और आकर्षक रोशनी से मंदिर परिसर का स्वरूप और भी मनमोहक नजर आया। मंदिर में गूंजते शंख, घंटियों और श्रद्धालुओं के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया।
वहीं, पुराने मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य भी जारी है। श्रद्धालुओं ने मंदिर के विकास कार्यों को लेकर प्रसन्नता व्यक्त की और भविष्य में परिसर के और बेहतर स्वरूप की उम्मीद जताई।
प्रशासनिक विभागों का मिला सहयोग
आयोजन समिति के सदस्यों जग्गू कोकोड़े एवं प्रवीण लोखंडे ने बताया कि इस वर्ष श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाओं को पहले की तुलना में बेहतर बनाने का प्रयास किया गया। आयोजन में राजस्व विभाग, विद्युत विभाग, पुलिस विभाग और स्वास्थ्य विभाग का सहयोग प्राप्त हुआ।
प्रशासनिक विभागों और स्थानीय स्तर पर किए गए इंतजामों के चलते मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया गया। सुरक्षा, स्वच्छता और दर्शन व्यवस्था को लेकर भी व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास किया गया।
बारिश की फुहारों से और सुंदर हुआ वातावरण
भादो मास के शुक्रवार को सुबह से ही बारिश की हल्की फुहारों ने सवासन टेकड़ी के प्राकृतिक वातावरण को और आकर्षक बना दिया। चारों ओर हरियाली छा गई और बारिश के बीच श्रद्धालुओं ने धार्मिक उत्साह के साथ जन्माष्टमी पर्व मनाया।
टेकड़ी का प्राकृतिक सौंदर्य और मंदिर परिसर का भक्तिमय वातावरण श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा। लोगों ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए और सामूहिक रूप से लोक नृत्य में भी भाग लिया।

दही हांडी और प्रसाद रहा आकर्षण
जन्माष्टमी के अवसर पर देवी माता मंदिर परिसर में भगवान श्रीकृष्ण की दही हांडी से जुड़े कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद का वितरण किया गया। भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद लिया।
आयोजन के दौरान धार्मिक गतिविधियों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। स्थानीय आदिवासी समुदाय द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के अवसर पर प्रस्तुत किए गए पारंपरिक नृत्य ने उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
स्थानीय आदिवासी संस्कृति की दिखी झलक
जन्माष्टमी समारोह में स्थानीय आदिवासी समुदाय की सांस्कृतिक प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। पारंपरिक वेशभूषा और लोक नृत्य के माध्यम से कलाकारों ने अपनी संस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत की।
श्रद्धालुओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुति का उत्साहपूर्वक आनंद लिया। धार्मिक आयोजन के साथ स्थानीय लोक परंपराओं और संस्कृति के प्रदर्शन ने कार्यक्रम को और विशेष बना दिया।
पांच गांवों ने मिलकर कराया भंडारा
जन्माष्टमी पर्व के अवसर पर आसपास के गांवों के लोगों ने भी आयोजन में सक्रिय सहभागिता निभाई। सवासन, पुसली, वलनी, गेहूंबारसा और छींदवाड़ सवासन के ग्रामवासियों की ओर से विशाल भंडारे की व्यवस्था की गई।
भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। ग्रामीणों की सामूहिक भागीदारी ने आयोजन को सामाजिक एकता का स्वरूप दिया। लोगों ने मिल-जुलकर व्यवस्थाओं में सहयोग किया और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत किया।
श्रद्धालुओं ने की व्यवस्थाओं की सराहना
बल्होरा निवासी प्रकाश धुर्वे ने बताया कि वे पहली बार सवासन टेकड़ी पहुंचे। उन्होंने कहा कि यहां का भक्तिमय वातावरण उन्हें काफी प्रभावित कर गया। मंदिर परिसर, प्राकृतिक वातावरण और श्रद्धालुओं की आस्था ने उन्हें मंत्रमुग्ध कर दिया।
उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन यह दर्शाते हैं कि सवासन टेकड़ी केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का भी महत्वपूर्ण प्रतीक बनती जा रही है।
दर्शन व्यवस्था में इनका रहा योगदान
मंदिर में दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में कोटवार श्रीनाथ कोल्हे, मेघराज मालवी एवं नानेश्वर सूर्यवंशी सहित अन्य लोगों का सहयोग रहा। आयोजन समिति और स्थानीय लोगों ने भी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यवस्थाओं में सहयोग किया।
स्थानीय निकाय की ओर से सुरक्षा और स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दिया गया। भीड़ को देखते हुए व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास किया गया, ताकि श्रद्धालु बिना परेशानी के मंदिर में दर्शन कर सकें और धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल हो सकें।
सवासन टेकड़ी पर आयोजित जन्माष्टमी पर्व में धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सौंदर्य, लोक संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता का अनूठा संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में मौजूदगी, भजन-जयकारों, लोक नृत्य, दही हांडी, भंडारे और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने पूरे क्षेत्र को कृष्णमय बना दिया। आयोजन ने एक बार फिर सवासन टेकड़ी की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को मजबूती प्रदान की।
