भव्य जिन मंदिर शिलान्यास समारोह एवं गुरु मां स्वस्तिभूषण माता जी के 30वें दीक्षा जयंति महोत्सव की पत्रिका का हुआ शुभ विमोचन
✍️ पारस जैन “पार्श्वमणि”, पत्रकार कोटा (राजस्थान)
प्यावड़ी/पीपलू, टोंक (राजस्थान)।
श्री 1008 श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र प्यावड़ी में आध्यात्मिकता, संस्कृति और श्रद्धा की अविरल धारा उस समय प्रवाहित हुई जब क्षेत्र समिति के अध्यक्ष रतनलाल जैन और उपाध्यक्ष रमेशचंद प्यावड़ी के नेतृत्व में भव्य जिन मंदिर शिलान्यास समारोह एवं गुरु माँ स्वस्तिभूषण माता जी के 30वें दीक्षा जयंति महोत्सव की स्मारिका पत्रिका का शुभ विमोचन संपन्न हुआ।
यह पावन अवसर भारत गौरव, विदुषी लेखिका और स्वस्तिधाम तीर्थ प्रणेत्री गणिनी आर्यिका 105 परम पूज्य गुरु माँ स्वस्तिभूषण माताजी के दिव्य सान्निध्य में स्वस्तिक मांगलिक भवन हिण्डोली में गरिमा के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित श्रुतज्ञान, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा ने समूचे सभास्थल को पवित्र बना दिया।
यह भव्य आयोजन 22 जनवरी से 23 जनवरी 2026 तक अतिशय क्षेत्र प्यावड़ी में हर्षोल्लास और मंगलमय वातावरण में मनाया जाएगा।
जैन अतिशय क्षेत्र प्यावड़ी—एक अलौकिक आध्यात्मिक धाम
श्रेयांश जैन द्वारा राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पारस जैन “पार्श्वमणि” को दी गई जानकारी के अनुसार, प्यावड़ी क्षेत्र प्राचीन काल से ही दिगंबर जैन समाज के लिए एक अतिशय स्थल के रूप में प्रसिद्ध है।
यहां विराजमान भगवान चंद्रप्रभु की दिव्य, मनोहारी और आकर्षक प्रतिमा भक्तों को प्रथम ही दर्शन में चित्तवृत्तियों को शांत करती है। कई वर्षों से यहां ऐसी दिव्य घटनाएँ सामने आई हैं, जिन्हें समाजजनों ने चमत्कारी अनुभव बताया है।
अतिशय की दिव्य घटनाएँ
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पूर्णिमा के दिन प्रातःकालीन अभिषेक के दौरान वेदी पर अपने आप चांदी के सिक्के गिरना
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कई अवसरों पर केसर की दिव्य उपस्थिति
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इन घटनाओं को कई जैन पत्र-पत्रिकाओं में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया
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पत्रकार पारस जैन “पार्श्वमणि” ने भी इन चमत्कारों को कई बार अपने समाचारों में उजागर किया
ऐसे पवित्र और अलौकिक स्थल पर मंदिर शिलान्यास समारोह का होना जैन समाज के लिए हर्ष और गर्व का विषय है।
पहली बार अतिशय क्षेत्र दर्शन का अनुभव – एक पत्रकार की भावनाएँ
पारस जैन “पार्श्वमणि” ने साझा किया कि जब वे पहली बार इस अतिशय क्षेत्र पहुंचे, तो भगवान चंद्रप्रभु के दर्शन करने के बाद लौटने का मन ही नहीं हुआ।
वहां की शांति, ऊर्जा और आध्यात्मिक वातावरण मन को गहराई तक स्पर्श करता है।
प्यावड़ी से लगभग 6 किलोमीटर दूर स्थित पीपलू गांव में करीब 400 जैन समाजजन रहते हैं। यहां की युवा पीढ़ी प्रतिदिन दर्शन और अभिषेक के लिए इस पवित्र स्थल पर आती है। यह टीम वर्षों से इस क्षेत्र की सेवा और संरक्षण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
शिलान्यास एवं दीक्षा जयंति—दो दिवसीय भव्य आयोजन
22–23 जनवरी 2026 को होने वाला यह आयोजन केवल मंदिर निर्माण की औपचारिकता नहीं, बल्कि श्रद्धा और संस्कारों का विशाल संगम होगा।
कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताएँ:
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भव्य जिन मंदिर शिलान्यास
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गुरु माँ स्वस्तिभूषण माताजी की 30वीं दीक्षा जयंति महोत्सव
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तीर्थ निर्माण पर प्रवचन
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जैन समाज की विशाल सभा
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आध्यात्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रम
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तीर्थ विकास की भविष्य रणनीति
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समाजजनों का सम्मान समारोह
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स्मारिका पत्रिका का विमोचन (जो अब सम्पन्न हो चुका है)
गुरु माँ स्वस्तिभूषण माताजी का आध्यात्मिक योगदान
गणिनी आर्यिका 105 स्वस्तिभूषण माताजी जैन समाज में अपनी विद्वत्ता, तप, अनुशासन और तीर्थ निर्माण की दृष्टि के लिए जानी जाती हैं।
उनके 30वें दीक्षा वर्ष पर यह महोत्सव ज्ञान, त्याग और तप-परम्परा का प्रतीक बनकर जैन समाज को नई दिशा प्रदान करेगा।
उनके द्वारा स्वस्तिधाम तीर्थ की स्थापना और जैन संस्कृति के प्रचार-प्रसार में दिए गए योगदान को देशभर में सराहा गया है।
कौन-कौन रहे उपस्थित?
कार्यक्रम में अनेक गणमान्य जैन समाजजन उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से—
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अतुल जैन
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हिमांशु जैन
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अशोक जैन
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राजेश जैन
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बुद्धिप्रकाश जैन
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महावीर जैन
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सुशिल जैन
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स्वास्तिक जैन
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शिखरचंद जैन
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सुनील जैन
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श्रेयांस जैन
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विनीत जैन
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विकास जैन
इन सभी का लक्ष्य आगामी जनवरी में होने वाले दो दिवसीय आयोजन को सफल बनाना और जैन समाज की एकता को सुदृढ़ करना है।
प्यावड़ी जिन मंदिर शिलान्यास—जैन समाज के लिए ऐतिहासिक घड़ी
यह आयोजन न केवल एक मंदिर निर्माण का कार्य है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक तीर्थ निर्माण की आध्यात्मिक धरोहर है।
अतिशय क्षेत्र प्यावड़ी आने वाले समय में राजस्थान और देशभर के जैन श्रद्धालुओं के लिए एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल के रूप में विकसित होगा।
समापन
भव्य जिन मंदिर शिलान्यास समारोह और गुरु माँ स्वस्तिभूषण माताजी के 30वें दीक्षा वर्ष का महोत्सव जैन समाज के लिए अत्यंत गौरव का अवसर है।
इस आयोजन से न केवल समाज की एकता बढ़ेगी, बल्कि उसकी धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को भी नई ऊँचाइयाँ मिलेंगी।
प्रस्तुति:
पारस जैन “पार्श्वमणि”
पत्रकार, कोटा (राजस्थान)
📞 941476480



