Indore महानगर में आयोजित अभूतपूर्व हिन्दू सम्मेलन – 12 लाख से अधिक लोगों ने किया उत्साहपूर्वक भागीदारी
इंदौर, 11 जनवरी 2026, रविवार – Indore महानगर में आयोजित हिन्दू सम्मेलन ने एक बार फिर हिन्दू समाज के अद्वितीय उत्साह और सामूहिक ऊर्जा का प्रतीक प्रस्तुत किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित ये सम्मेलन शहर के हर बस्ती क्षेत्र में हिन्दू गौरव और एकता का संदेश फैलाने में सफल रहे।
प्रातः 10 बजे से ही कार्यक्रम स्थलों पर बड़ी संख्या में परिवार, बच्चे और समाजजन जुटने लगे। बच्चों और युवाओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा दिखाई, तो वहीं भजन मंडलियों के कार्यक्रमों ने समाज के लोगों को आध्यात्मिक आनंद और भावनात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण कर दिया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह-व्यवस्था प्रमुख का संदेश
दूधिया ग्राम में आयोजित सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह-व्यवस्था प्रमुख माननीय श्री अनिल ओक ने उपस्थित समाजजन को संबोधित करते हुए कहा कि “मातृशक्ति प्रेम, दया और करुणा की मूर्ति है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर काली-दुर्गा का रूप धारण कर देश, धर्म और समाज की रक्षा कर सकती है।” उन्होंने कहा कि माँ दुर्गा के आठों हाथों में शस्त्र होना और उनके चरणों के नीचे महिषासुर का होना यह संदेश देता है कि मातृशक्ति में न केवल कोमलता और करुणा है, बल्कि शक्ति और साहस भी विद्यमान है।
उन्होंने धर्म के वास्तविक अर्थ और स्वरूप को समझने पर जोर देते हुए कहा कि हमें अपने कर्तव्यों का पालन न केवल समझकर बल्कि पूरे मनोयोग से करना चाहिए। अपने उद्बोधन में उन्होंने इतिहास के उन महान व्यक्तित्वों का उदाहरण दिया जिन्होंने अपने जीवन में आदर्श स्थापित किए।
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प्रभु श्रीराम ने 14 वर्षों का वनवास स्वीकार कर पिता के वचन का पालन किया और जीवन में अनुकरणीय मूल्य स्थापित किए।
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भरत ने रामजी की पादुकाओं को सिंहासन पर रखकर अयोध्या का राजसिंहासन संभाला और भाई के धर्म का पालन किया।
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सावित्री ने सतीत्व और श्रद्धा के बल से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राणों की रक्षा की और पतिव्रता धर्म के आदर्श स्थापित किए।
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महाराणा प्रताप के समय भामाशाह ने सेना के गठन हेतु धन का दान देकर सामुदायिक और व्यापारी जीवन मूल्यों की मिसाल कायम की।
श्री ओक ने उपस्थित समाज से आग्रह किया कि हम इन आदर्शों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में मूल्य और नैतिकता का पालन करें।
Indore सम्मेलन में मातृ शक्ति और संत समाज का विशेष योगदान
सभी आयोजनों में मातृ शक्ति और संत समाज की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। संत समाज ने अपने उद्बोधन में संस्कृति के महत्व और समाज में एकता की आवश्यकता पर जोर दिया। मातृ शक्ति के प्रतिनिधियों ने पंच परिवर्तन और कुटुंब व्यवस्था को सशक्त बनाने की बात कही। उनके भाषणों ने समाज में नारी सशक्तिकरण और पारिवारिक मूल्यों को पुनः स्थापित करने का संदेश दिया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम और युवा सहभागिता
सम्मेलन के दौरान बच्चों और युवाओं ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए। भजन मंडलियों द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रमों ने समाज में आध्यात्मिक चेतना और भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत किया।
युवाओं ने उत्साह और जिम्मेदारी के साथ कार्यक्रमों की व्यवस्थाओं का संचालन किया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि नई पीढ़ी भी समाज और संस्कृति के मूल्यों को बनाए रखने के लिए सक्रिय और जिम्मेदार है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सौ वर्ष यात्रा और राष्ट्रप्रेम का संदेश
सम्मेलन में संघ के वक्ताओं ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सौ वर्ष यात्रा और राष्ट्र प्रथम के भाव को लेकर विस्तृत उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि हमारे महापुरुषों और स्वाभिमानी समाज के आदर्शों का पालन कर ही हम देश और धर्म की सुरक्षा कर सकते हैं।
समरसता और सामूहिक भोजन
सभी कार्यक्रमों में उपस्थित समाजजन भारत माता की आरती में सम्मिलित हुए और उसके बाद समरसता भोज का आयोजन किया गया। इस आयोजन ने समाज में एकता और भाईचारे की भावना को और मजबूत किया।
सम्मेलन की व्यापक उपस्थिति
आज सम्पन्न हुए 251 हिन्दू सम्मेलनों में लगभग 12 लाख लोग परिवार सहित उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल इंदौर महानगर के हिन्दू समाज की संगठित शक्ति का परिचायक था, बल्कि यह शहर में संस्कृति, एकता और धर्मनिष्ठा का संदेश फैलाने में भी सफल रहा।
आगामी 18 जनवरी 2026 को शेष हिन्दू सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें भी बड़ी संख्या में समाजजन की उपस्थिति की उम्मीद है।
Indore महानगर में आयोजित यह सम्मेलन स्पष्ट रूप से यह संदेश देता है कि हिन्दू समाज में एकता, संस्कृति, मातृ शक्ति और धर्मनिष्ठा की भावना गहन रूप से व्याप्त है। इस आयोजन ने साबित कर दिया कि समाज जब संगठित होकर अपने आदर्शों और संस्कृति के प्रति जागरूक होता है, तो कोई भी चुनौती उसे रोक नहीं सकती।
यह कार्यक्रम न केवल शहरवासियों के लिए बल्कि पूरे देश के हिन्दू समाज के लिए एक प्रेरणा बन गया है कि धर्म, संस्कृति और कुटुंब मूल्यों का संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है।

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