सिंघाना में गणेशोत्सव की धूम, तेरस की रात निकलता है भव्य झांकी चल समारोह
सिंघाना (धार)। गणेशोत्सव के दौरान निकलने वाली भव्य झांकियों और चल समारोह के लिए सिंघाना नगर पूरे क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखता है। गणेश चतुर्थी से शुरू होने वाला उत्सव अनंत चतुर्दशी और इसके बाद तेरस तक धार्मिक आस्था, उत्साह और उल्लास के माहौल में मनाया जाता है। गणेशोत्सव के अंतिम चरण में तेरस की चांदनी रात में निकलने वाला विशाल झांकी चल समारोह इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहता है।
तेरस की रात नगर की सड़कों पर भव्य झांकियों का कारवां निकलता है। विभिन्न गणेश मंडल और समितियां आकर्षक झांकियों के साथ इस समारोह में शामिल होती हैं। इनमें श्री राम संगठन ग्रुप (महाराष्ट्र वाला), मां हरसिद्धि ग्रुप (नारायण साउंड वाले), मां चामुंडा ग्रुप (जोहार बॉयज) और पार्टी हाई कमान जैसी मंडलियां प्रमुख रूप से शामिल रहती हैं। समितियों द्वारा अपनी झांकियों को आकर्षक रूप देने के लिए विशेष तैयारियां की जाती हैं।
आधुनिक लाइटिंग और साउंड सिस्टम बनते हैं आकर्षण
झांकी चल समारोह में आधुनिक झिलमिलाती लाइटिंग, सजीव झांकियां, विशाल डीजे साउंड सिस्टम और ढोल-ताशों की गूंज माहौल को और भव्य बना देती है। सांवरिया डीजे सहित विभिन्न साउंड सिस्टम के साथ निकलने वाली झांकियां लोगों का ध्यान आकर्षित करती हैं। धार्मिक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ सजाई गई झांकियों को देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग सिंघाना पहुंचते हैं।

20 से अधिक पंडालों में विराजते हैं बप्पा
गणेशोत्सव के दौरान सिंघाना नगर में 20 से अधिक प्रमुख पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमाओं की स्थापना की जाती है। इन पंडालों में प्रतिदिन धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। श्रद्धालु बड़ी संख्या में पंडालों में पहुंचकर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते हैं और विभिन्न आयोजनों में शामिल होते हैं।
गणेश चतुर्थी से लेकर तेरस तक पूरे नगर में उत्सव जैसा माहौल बना रहता है। पंडालों की सजावट, धार्मिक आयोजन, झांकियां, ढोल-ताशे और चल समारोह मिलकर सिंघाना के गणेशोत्सव को खास बनाते हैं। तेरस की रात निकलने वाला झांकी कारवां इस पूरे उत्सव का विशेष आकर्षण होता है, जहां आस्था के साथ कला, सजावट और सामूहिक उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिलता है।
