इंदौर में कर्बला जाने वाले अखाड़ों, Tazia और झांकियों के कलाकारों का भव्य सम्मान समारोह,
यशवंत रोड पर आयोजित हुआ पारंपरिक सम्मान कार्यक्रम
इंदौर शहर में सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का अद्भुत उदाहरण पेश करते हुए इस वर्ष भी संस्था सर्वधर्म संघ द्वारा कर्बला जाने वाले अखाड़ों, Tazia निर्माणकर्ताओं, झांकी कलाकारों एवं विभिन्न समुदायों से जुड़े कलाकारों का भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया। यह आयोजन हर वर्ष की परंपरा के अनुसार इस बार भी यशवंत रोड पर मंच स्थापित कर बड़े ही सम्मान और गरिमा के साथ संपन्न हुआ।
इस कार्यक्रम में विशेष रूप से उन सभी कलाकारों, उस्तादों, खलीफा और निर्माणकर्ताओं को सम्मानित किया गया, जो मुहर्रम के अवसर पर निकलने वाले ताजिया, अखाड़ा और झांकियों के निर्माण और प्रदर्शन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में शहर के विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि, धार्मिक नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
संस्था अध्यक्ष मंजूर बेग ने दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान संस्था सर्वधर्म संघ के अध्यक्ष मंजूर बेग ने बताया कि इंदौर शहर की यह परंपरा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक समरसता का प्रतीक भी है। उन्होंने कहा कि होलकर वंश के समय से ही इंदौर में ताजिया और अखाड़ा परंपरा को विशेष सम्मान दिया जाता रहा है और यह परंपरा आज भी उसी भावना के साथ आगे बढ़ रही है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष भी जूना रिसाले अखाड़ा द्वारा कर्बला रोजा की झांकी तैयार की गई, वहीं चौकी वालों की ओर से मदीने और मनावर से जुड़ी झांकियों का शानदार प्रदर्शन किया गया। इन झांकियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उपस्थित हुए और पूरे आयोजन में उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना रहा।
कलाकारों और निर्माणकर्ताओं का भव्य सम्मान
कार्यक्रम में सभी अखाड़ों, ताजिया निर्माणकर्ताओं और झांकी कलाकारों को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया। सभी कलाकारों को शॉल ओढ़ाकर और राजवाड़ा का प्रतीक चिन्ह भेंट कर उनका सम्मान किया गया।
विशेष रूप से शहर काजी डॉक्टर इशरत अली को भी इस अवसर पर सम्मानित किया गया, जिन्होंने इंदौर की गंगा-जमुनी तहजीब को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके साथ-साथ अन्य धार्मिक और सामाजिक प्रतिनिधियों का भी सम्मान किया गया।
इस सम्मान समारोह में किन्नर समाज, खटीक समाज और अन्य हिंदू समाज के ताजिया एवं अखाड़ा निर्माणकर्ताओं को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया। यह पहल इस बात का प्रतीक रही कि इंदौर शहर में सभी समाज मिलकर इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
चंदन माला और प्रतीक चिन्ह से किया गया स्वागत
कार्यक्रम के दौरान केवल प्रतीक चिन्ह ही नहीं, बल्कि सभी कलाकारों और उस्तादों को चंदन की माला पहनाकर भी सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनकी मेहनत, कला और वर्षों से निभाई जा रही परंपरा के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक था।
ताजिया और झांकी निर्माण में लगे खलीफा और उस्ताद कलाकारों को विशेष रूप से मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने इन कलाकारों की मेहनत और समर्पण की सराहना की।

कार्यक्रम में मौजूद प्रमुख गणमान्य लोग
इस भव्य आयोजन में शहर के कई प्रमुख सामाजिक और धार्मिक व्यक्तित्व उपस्थित रहे। इनमें मुख्य रूप से उपाध्यक्ष रियाज खान, सोहेल पठान, बाबा माहिर शाह, सतीश शर्मा, शाकिर लाला, मुकेश बजाज, यूनुस खान, रवीश पचोरिया, धर्मेंद्र पेमल, एजाज कुरैशी, समीर बैग, तहसील खान, एडवोकेट गोलू शेख, फैजान बैग, पत्रकार जाकिर खान, शकील खान सहित अनेक गणमान्य लोग शामिल रहे।
इन सभी ने इस आयोजन को सफल बनाने में सहयोग दिया और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
इंदौर की सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि इंदौर हमेशा से ही धार्मिक सौहार्द और सांस्कृतिक विविधता का केंद्र रहा है। यहां हर समुदाय मिलकर त्योहारों और परंपराओं को मनाता है, जिससे शहर की पहचान और मजबूत होती है।
सर्वधर्म संघ द्वारा किया गया यह आयोजन न केवल कलाकारों के सम्मान के लिए है, बल्कि यह समाज में भाईचारे और एकता का संदेश भी देता है। वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में ऐसे कार्यक्रम समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ते हैं।

कर्बला यात्रा और झांकियों का महत्व
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि कर्बला यात्रा और ताजिया झांकियां केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि यह त्याग, बलिदान और इंसानियत के संदेश को भी दर्शाती हैं।
अखाड़ा और झांकी कलाकार महीनों की मेहनत से इन संरचनाओं को तैयार करते हैं, जिसमें उनकी कला, समर्पण और भावनाएं जुड़ी होती हैं। इन्हीं प्रयासों को सम्मान देने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।
सामाजिक एकता का संदेश
इस आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण संदेश सामाजिक एकता और भाईचारे का रहा। विभिन्न धर्मों और समाजों के लोगों की उपस्थिति ने यह साबित किया कि इंदौर में सभी समुदाय मिलकर सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि ऐसे आयोजन भविष्य में भी जारी रहने चाहिए ताकि समाज में प्रेम, सद्भाव और सहयोग की भावना बनी रहे।
समापन और आभार
कार्यक्रम के अंत में संस्था अध्यक्ष मंजूर बेग ने सभी अतिथियों, कलाकारों और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान समारोह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि इंदौर की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है।
उन्होंने सभी से अपील की कि वे इसी तरह एकता और भाईचारे को बनाए रखें और आने वाली पीढ़ियों को भी इस परंपरा से जोड़ें।
निष्कर्ष
इंदौर में आयोजित यह भव्य सम्मान समारोह न केवल कलाकारों के लिए सम्मान का अवसर बना, बल्कि यह शहर की गंगा-जमुनी तहजीब और सांस्कृतिक एकता का मजबूत उदाहरण भी साबित हुआ। सर्वधर्म संघ द्वारा किया गया यह प्रयास आने वाले समय में भी सामाजिक समरसता को और मजबूत करेगा।
