Jawra की पुण्यभूमि पर भव्य धार्मिक आयोजन
Jawra (निप्र)। जावरा की पावन पुण्यधरा एक बार फिर धार्मिक एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठी, जब यहां चतुर्विध संघ का मंगल आगमन हुआ। यह अवसर न केवल जैन समाज के लिए बल्कि संपूर्ण क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण एवं भावनात्मक रहा। स्टेशन रोड स्थित महावीर कॉम्प्लेक्स में आयोजित इस विशाल प्रवचन एवं धर्मसभा कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, समाजजन एवं गुरुभक्त उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान पूरा वातावरण भक्ति, श्रद्धा, अनुशासन और आध्यात्मिकता से भर गया। साधु-संतों के मंगल प्रवचन ने उपस्थित जनसमूह को आत्मचिंतन और धर्म मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
गुरु परंपरा और कस्तूर पावन धाम की स्थापना का संदेश
जैन दिवाकरिय प्रवर्तक श्री विजय मुनि जी म.सा. ने अपने प्रेरणादायक प्रवचन में कहा कि किसी भी महान प्रकल्प की शुरुआत भले ही छोटे स्तर से होती है, लेकिन जब उसमें समाज का सामूहिक सहयोग, श्रद्धा और समर्पण जुड़ जाता है, तो वह एक विशाल और स्थायी स्वरूप ग्रहण कर लेता है।
उन्होंने गुरु कस्तूर के प्रति गहरी श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि उनके आशीर्वाद और प्रेरणा से “कस्तूर पावन धाम” आज एक वटवृक्ष के रूप में समाज के बीच प्रतिष्ठित हो चुका है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत बनेगा।
उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे गुरु परंपरा के प्रति तन, मन और धन से समर्पित होकर कार्य करें और इस पवित्र परंपरा के संरक्षण एवं विस्तार में अपना योगदान दें।
Jawra: संतों और साध्वी परंपरा की ऐतिहासिक भूमि
उपाध्याय श्री गौतम मुनि जी म.सा. ने जावरा की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि यह नगर केवल एक स्थान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना की पवित्र भूमि है। इसे गुरुदेव रतनचंद जी म.सा. की गादी का पवित्र गांव कहा जाता है, जिसने जैन धर्म की परंपरा को समृद्ध किया है।
उन्होंने बताया कि इस भूमि ने अनेक महान संतों को जन्म दिया है और धर्म प्रभावना में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इनमें उपाध्याय श्री कस्तूरचंद जी म.सा., तपस्वी श्री केसरीमल जी म.सा., प्रवर्तक श्री हजारीमल जी म.सा., महासती साकर कुंवर जी म.सा., महासती शांता कुंवर जी म.सा. तथा प्रियदर्शना जी म.सा. जैसे महान संत शामिल हैं।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वर्तमान समय में भी यह परंपरा जीवित है और डॉ. कुमुदलता जी म.सा., डॉ. महाप्रज्ञा जी म.सा. एवं डॉ. संयमलता जी म.सा. जैसी साध्वीगण धर्म प्रभावना में निरंतर सक्रिय हैं।
गुरु कस्तूरचंद जी म.सा. का आध्यात्मिक योगदान
उपाध्याय गौतम मुनि जी म.सा. ने कहा कि जावरा की माटी ने जैन शासन को अनेक महान विभूतियां दी हैं, जिनमें मालवरत्न उपाध्याय श्री कस्तूरचंद जी म.सा. का स्थान अत्यंत विशिष्ट है।
उन्होंने कहा कि गुरु कस्तूर का जीवन त्याग, तपस्या और करुणा का प्रतीक है। उनके द्वारा दिए गए उपदेश आज भी श्रावक-श्राविकाओं के जीवन में मार्गदर्शन का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक श्रद्धालु पर गुरु कस्तूर का अनंत उपकार है और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना हर भक्त का धर्म है।
उन्होंने आगे कहा कि जावरा के भक्तों द्वारा निर्मित “कस्तूर पावन धाम” गुरु भक्ति का जीवंत उदाहरण है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
गुरुभक्ति और जन्मभूमि का महत्व
आगम मर्मज्ञ श्री वैभव मुनि जी म.सा. ने अपने उद्बोधन में कहा कि गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा का संचार जावरा की भूमि में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक नगर नहीं, बल्कि क्रियोद्धार भूमि और गुरु परंपरा की जन्मभूमि है।
उन्होंने कहा कि गुरु कस्तूर मुनि जी म.सा. का इस भूमि से गहरा संबंध है और यह स्थान उनकी तपस्या एवं साधना का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि गुरु के प्रति श्रद्धा ही जीवन को दिशा देती है और यह श्रद्धा ही मानव जीवन को आध्यात्मिक ऊँचाइयों तक ले जाती है।
जन्मभूमि का ऋण और आध्यात्मिक दृष्टांत
महासती डॉ. कुमुदलता जी म.सा. ने जन्मभूमि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जन्मभूमि का ऋण कभी भी चुकाया नहीं जा सकता। मनुष्य को अपने जीवन में जन्मभूमि के प्रति सदैव समर्पण भाव रखना चाहिए।
उन्होंने भगवान राम के वनवास का उदाहरण देते हुए कहा कि जब भगवान राम अयोध्या से वनवास को गए, तो वे अपने साथ अयोध्या की पवित्र मिट्टी भी ले गए, क्योंकि जन्मभूमि का महत्व अमूल्य होता है।
उन्होंने कहा कि यही भावना प्रत्येक व्यक्ति के भीतर होनी चाहिए, जिससे वह अपने मूल और संस्कारों से जुड़ा रहे।
गुरु महिमा और भक्ति का भावपूर्ण प्रस्तुतीकरण
महासती डॉ. महाप्रज्ञा जी म.सा. ने गुरु महिमा पर आधारित सुंदर स्तवन प्रस्तुत किया, जिससे पूरा सभागार भावविभोर हो उठा। उपस्थित श्रद्धालु भक्ति भाव में डूब गए और वातावरण अत्यंत आध्यात्मिक हो गया।
उनकी प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि गुरु का स्थान जीवन में सर्वोच्च होता है और गुरु के बिना आत्मिक उन्नति संभव नहीं है।
आधुनिक युग और आत्मचिंतन की आवश्यकता
डॉ. पद्मकीर्ति जी म.सा. ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज का युग तकनीक और सोशल मीडिया का युग है, जिसमें लोग अत्यधिक व्यस्त और मानसिक रूप से विचलित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हमें जीवन में आत्मचिंतन, संयम और अच्छे कार्यों के समर्थन की आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने समय का सदुपयोग करें और आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाएं।
आगामी धार्मिक कार्यक्रमों की घोषणा
मीडिया प्रभारी गुरु संदीप रांका, सुभाष टुकडियां एवं अभय सुराणा ने बताया कि 17 मई को कस्तूर पावन धाम का भव्य लोकार्पण समारोह आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम अत्यंत ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व का होगा।
उन्होंने यह भी बताया कि 13 मई बुधवार को प्रातः 7:15 बजे से 8:15 बजे तक नवकारसी का आयोजन रखा गया है। इसके पश्चात 8:15 बजे संतवृंद का मंगल विहार होगा, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए जैन दिवाकर भवन पहुंचेगा, जहां धर्मसभा का आयोजन किया जाएगा।
समाजजनों की सहभागिता और व्यापक सहयोग
इस पूरे आयोजन में जैन समाज के विभिन्न संगठनों, ट्रस्टों एवं समाजजनों की सक्रिय भागीदारी रही। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, दिगंबर जैन समाज, साधुमार्गी संघ एवं अन्य संघों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में अनेक गणमान्य व्यक्ति जैसे बसंतीलाल चपडोद, पारसमल बरडिया, राकेश मेहता, सुजानमल कोच्चटा, सुशील कोच्चटा, श्रीपाल कोच्चटा सहित अनेक समाजजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम संचालन एवं समापन
कार्यक्रम का सफल एवं व्यवस्थित संचालन पूर्व महामंत्री सुभाष टुकडियां ने किया। उन्होंने पूरे आयोजन को अनुशासन एवं भावनात्मक समर्पण के साथ आगे बढ़ाया।
अंत में पूरा कार्यक्रम गुरु भक्ति, सेवा, समर्पण और आध्यात्मिक ऊर्जा के अद्भुत संगम के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन जावरा की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को और अधिक सुदृढ़ करने वाला सिद्ध हुआ तथा समाज को एक नई दिशा एवं प्रेरणा प्रदान कर गया।
