ग्राम पंचायत सिलपुर भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया। अनूपपुर के कोतमा ब्लॉक में सरकारी रास्ते पर कथित कब्जा, नल-जल योजना में अनियमितता, पुलिया निर्माण में भ्रष्टाचार और अवैध रेत उपयोग के आरोप। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
ग्राम पंचायत सिलपुर भ्रष्टाचार: सरकारी रास्ते पर कब्जा, नल-जल योजना में अनियमितता और विकास कार्यों में भारी भ्रष्टाचार के आरोप
रिपोर्ट: जिला ब्यूरो प्रमुख सुनील रैदास
अनूपपुर/कोतमा। ग्राम पंचायत सिलपुर भ्रष्टाचार का मामला इन दिनों पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अनूपपुर जिले के कोतमा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सिलपुर पर सरकारी भूमि, विकास कार्यों और विभिन्न योजनाओं में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत प्रतिनिधियों एवं संबंधित लोगों की मिलीभगत से सरकारी नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है, जिससे आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकारी आम रास्ते पर कब्जे का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम लालपुर और जमुनिया को जोड़ने वाला रियासतकालीन सरकारी आम रास्ता, जो राजस्व अभिलेखों में खसरा नंबर 138 के रूप में दर्ज है, वर्तमान में विवादों में घिरा हुआ है। आरोप है कि इसी सरकारी रास्ते पर मंगल भवन का निर्माण कराया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह रास्ता दशकों से लगभग 50 गांवों के लोगों के आवागमन का प्रमुख मार्ग रहा है। यदि इस रास्ते को पूरी तरह बंद कर दिया जाता है तो भविष्य में आपातकालीन परिस्थितियों में फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस और अन्य बड़े वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाएंगे।
पटवारी रिपोर्ट के बावजूद निर्माण जारी होने का आरोप
ग्रामीणों का दावा है कि संबंधित पटवारी द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन में निर्माण को नियमों के विरुद्ध बताया गया है। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में सरकारी भूमि पर निर्माण कराया जा रहा है।
हालांकि इस संबंध में संबंधित पंचायत प्रतिनिधियों अथवा निर्माण एजेंसी का पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका।
नल-जल योजना में गंभीर अनियमितताओं के आरोप
ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत सिलपुर भ्रष्टाचार के तहत जल जीवन मिशन एवं नल-जल योजना पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि पीएचई विभाग द्वारा ओवरहेड टैंक का निर्माण तो किया गया लेकिन आज तक अधिकांश घरों में नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। इसके बावजूद पंचायत द्वारा बिजली बिल का भुगतान सरकारी राशि से किया जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिस बोरवेल का उपयोग ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए होना चाहिए था, उसी का उपयोग निर्माण कार्यों में किया जा रहा है। साथ ही ट्रांसफार्मर से बिजली उपयोग को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
पुलिया निर्माण में गुणवत्ता पर उठे सवाल
ग्राम पंचायत क्षेत्र में निर्मित पुलिया को लेकर भी ग्रामीणों ने गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है।
उनका आरोप है कि लगभग 10 लाख रुपये की स्वीकृत लागत वाली पुलिया की गुणवत्ता बेहद खराब है तथा वास्तविक निर्माण लागत काफी कम प्रतीत होती है। ग्रामीणों ने पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
अवैध रेत उपयोग का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में बिना रॉयल्टी की बड़ी मात्रा में रेत का उपयोग किया गया।
उनका कहना है कि यदि आम नागरिक एक ट्रॉली रेत लेकर जाता है तो प्रशासन कार्रवाई करता है, लेकिन बड़े निर्माण कार्यों में कथित रूप से सैकड़ों ट्रॉली रेत उपयोग होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती।
ग्रामीणों ने खनिज विभाग से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं शासन से निम्न मांगें की हैं—
- सरकारी रास्ते पर हो रहे कथित अतिक्रमण को तत्काल रोका जाए।
- खसरा नंबर 138 की राजस्व अभिलेखों के अनुसार सीमांकन कराया जाए।
- नल-जल योजना की तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराई जाए।
- बिजली बिल भुगतान की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
- पुलिया निर्माण की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच हो।
- बिना रॉयल्टी उपयोग की गई रेत की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
- पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए।
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
फिलहाल पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे जिला प्रशासन एवं शासन स्तर पर जनसुनवाई, कलेक्टर कार्यालय तथा संबंधित विभागों में शिकायत दर्ज कराएंगे।
समाचार लिखे जाने तक संबंधित पंचायत, जनपद पंचायत, पीएचई विभाग एवं अन्य अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका था। पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
निष्कर्ष
ग्राम पंचायत सिलपुर भ्रष्टाचार से जुड़े इन आरोपों ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी रास्ते पर कथित कब्जा, नल-जल योजना में अनियमितता, पुलिया निर्माण की गुणवत्ता और अवैध रेत उपयोग जैसे मुद्दे निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई आवश्यक होगी, वहीं यदि आरोप निराधार हैं तो संबंधित विभागों का पक्ष भी सामने आना चाहिए। जनहित और पारदर्शिता की दृष्टि से पूरे मामले की स्वतंत्र जांच समय की मांग है।


