ग्राम पंचायत बदरा भ्रष्टाचार मामले में पुलिया निर्माण, स्ट्रीट लाइट, फर्जी हाजिरी और नल-जल योजना को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ग्राम पंचायत बदरा भ्रष्टाचार: 5 गंभीर आरोपों से मचा हड़कंप, सरपंच शिवभान सिंह पर उठे सवाल
बदरा। ग्राम पंचायत बदरा भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर आरोपों के घेरे में है। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की गंगा बहाने और जनता के कल्याण के लिए चुनी जाने वाली त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था पर बदरा में कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पंचायत के वर्तमान सरपंच शिवभान सिंह के कार्यकाल में विकास कार्यों, निर्माण, स्ट्रीट लाइट, हाजिरी और नल-जल योजना से संबंधित कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों के बीच ग्रामीण प्रशासन से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
ग्राम पंचायत बदरा भ्रष्टाचार के आरोपों ने बढ़ाए सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत बदरा में विकास के नाम पर किए गए कई कार्यों और उनके लिए खर्च की गई सरकारी राशि में पारदर्शिता नहीं बरती गई। आरोपों की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी, लेकिन ग्रामीणों द्वारा उठाए जा रहे सवालों ने संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली को भी सवालों के घेरे में ला दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि पंचायत में हुए कार्यों के दस्तावेज, भुगतान, बिल-वाउचर, मस्टर रोल और मौके पर हुए वास्तविक कार्य का मिलान कराया जाए तो स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
करीब 9.50 लाख रुपये की पुलिया निर्माण पर गंभीर आरोप
ग्राम पंचायत बदरा में लगभग 9.50 लाख रुपये की लागत से प्रस्तावित पुलिया निर्माण को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिया निर्माण में कथित तौर पर अनियमितता की गई है।
आरोप है कि निर्माण कार्य और उस पर खर्च की गई राशि के बीच अंतर हो सकता है। ग्रामीणों ने पुलिया की गुणवत्ता और सरकारी राशि के उपयोग की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि तकनीकी अधिकारियों से मौके का निरीक्षण कराकर निर्माण की वास्तविक स्थिति और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच होनी चाहिए।
3 स्ट्रीट लाइट की खरीद और भुगतान पर भी सवाल
ग्राम पंचायत बदरा भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप केवल पुलिया निर्माण तक सीमित नहीं हैं। ग्रामीणों के अनुसार पंचायत क्षेत्र में लगभग 3 स्ट्रीट लाइटों और उनसे जुड़ी खरीद-फरोख्त को लेकर भी कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि खरीद प्रक्रिया में निर्धारित मानकों और पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया। ऐसे में स्ट्रीट लाइट की वास्तविक लागत, बिल, भुगतान और मौके पर उपलब्ध सामग्री का भौतिक सत्यापन किए जाने की मांग उठ रही है।
फर्जी हाजिरी का आरोप, मोईन और नूरमोहम्मद के नाम पर सवाल
रिकवरी कार्य और नर्सरी संचालन के नाम पर भी सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि मोईन और नूरमोहम्मद जैसे व्यक्तियों की बिना वास्तविक कार्य के हाजिरी लगाकर सरकारी वेतन या मानदेय का भुगतान किया गया।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित अवधि के मस्टर रोल, बैंक भुगतान, उपस्थिति रिकॉर्ड और कार्यस्थल की जानकारी की जांच की जाए, ताकि आरोपों की वास्तविकता सामने आ सके।
उत्तर प्रदेश में रहने वाले मौसिम की हाजिरी का आरोप
मामले में एक और गंभीर आरोप मौसिम को लेकर लगाया गया है। बताया जा रहा है कि मौसिम, मोईन का भाई है और वह उत्तर प्रदेश में निवास कर रहा था। इसके बावजूद आरोप है कि ग्राम पंचायत बदरा के रिकॉर्ड में उसकी हाजिरी लगती रही और कथित तौर पर उसके नाम से भुगतान भी किया गया।
यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो यह सरकारी रिकॉर्ड और भुगतान व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है। इसलिए ग्रामीण संबंधित रिकॉर्ड की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग कर रहे हैं।
नल-जल योजना में सबमर्सिबल पंप नहीं लगने का आरोप
सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना को लेकर भी ग्राम पंचायत बदरा में सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि योजना का ढांचागत काम पूरा होने का दावा किया गया, लेकिन अभी तक वहां एक भी सबमर्सिबल पंप (मोटर) नहीं लगाया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि योजना के नाम पर लाखों रुपये का बजट आने के बावजूद यदि लोगों को पेयजल की सुविधा नहीं मिल रही है तो संबंधित विभाग को इसकी जांच करनी चाहिए। योजना पर स्वीकृत राशि, वास्तविक खर्च और मौके पर उपलब्ध संसाधनों का सत्यापन करने की मांग की जा रही है।
ग्राम पंचायत बदरा भ्रष्टाचार मामले में प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
इन तमाम आरोपों के बीच प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान हैं, जबकि पंचायत में सरकारी राशि के उपयोग को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन ग्राम पंचायत बदरा भ्रष्टाचार से जुड़े इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराएगा? ग्रामीणों ने सरपंच शिवभान सिंह के कार्यकाल में हुए संबंधित विकास कार्यों, भुगतान, मस्टर रोल, सामग्री खरीद और नल-जल योजना की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि जांच में यदि वित्तीय अनियमितता या सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाए और सरकारी राशि की वसूली भी सुनिश्चित की जाए।
नोट: समाचार में उल्लिखित भ्रष्टाचार एवं वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित बातें आरोप और ग्रामीणों के दावों पर आधारित हैं। संबंधित सरपंच, पंचायत पदाधिकारियों या प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

