MP में जल्द दौड़ेंगी सरकारी बसें, 150 कर्मचारियों की होगी संविदा भर्ती
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा को लेकर तैयारियां तेज
MP में जल्द ही सरकारी बस सेवाएं शुरू होने जा रही हैं। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत प्रदेशभर में बस संचालन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस योजना का उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित, नियमित और अनुशासित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। साथ ही, इससे प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।
150 कर्मचारियों की होगी संविदा नियुक्ति
सरकारी बसों के संचालन के लिए एआइसीटीएसएल (AICTSL) में 150 कर्मचारियों की संविदा भर्ती की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया एमपी ऑनलाइन और टीसीएस (TCS) के माध्यम से आयोजित लिखित परीक्षा द्वारा पूरी की जाएगी। चयनित उम्मीदवारों का पुलिस और दस्तावेज वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा, ताकि पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
अप्रैल से शुरू होगी बसों की लीज प्रक्रिया
जानकारी के अनुसार, अप्रैल माह में बसों को अनुबंधित (लीज पर लेने) की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से बसों का संचालन प्रारंभ होगा। पहले चयनित रूट्स पर बसें चलाई जाएंगी, फिर धीरे-धीरे पूरे प्रदेश में सेवा का विस्तार किया जाएगा।
Indore संभाग की जिम्मेदारी AICTSL के पास
Indore संभाग में सरकारी बसों के संचालन की जिम्मेदारी एआइसीटीएसएल को सौंपी गई है। वहीं, प्रदेश के अन्य संभागों में अलग-अलग सहायक कंपनियां बस संचालन का कार्य संभालेंगी। सरकार ने पूरे सिस्टम को बेहतर और व्यवस्थित बनाने के लिए बस संचालन को चार प्रमुख फैक्टर पर आधारित करने की योजना बनाई है।
यात्रियों को मिलेगी सुरक्षित और नियमित सेवा
सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था से यात्रियों को सुरक्षित, अनुशासित और समयबद्ध बस सेवा मिलेगी। मौजूदा निजी बस व्यवस्था में अनियमितता और रेस की शिकायतें सामने आती रही हैं, जिन्हें इस नई सरकारी योजना के जरिए खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है।
एक रंग–एक पहचान की योजना
सरकारी बसों को एक समान पहचान देने के लिए “एक रंग–एक पहचान” की योजना पर काम किया जा रहा है। इसके तहत सभी सरकारी बसें एक ही रंग की होंगी। फिलहाल सफेद और नारंगी रंग को लेकर विचार किया जा रहा है, हालांकि अंतिम निर्णय अभी लिया जाना बाकी है।
नया रेवेन्यू मॉडल लागू
सरकारी बस सेवा के लिए नया कमाई मॉडल तय किया गया है। इसके तहत कुल आय का 95 प्रतिशत हिस्सा बस ऑपरेटर को और 5 प्रतिशत हिस्सा कंपनी को मिलेगा। पूरी कमाई डिजिटल सिस्टम के माध्यम से मॉनिटर की जाएगी, जिससे पारदर्शिता बनी रहेगी और किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना कम होगी।
सीसीटीवी और ट्रैकिंग सिस्टम से होगी निगरानी
यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए हर बस में सीसीटीवी कैमरे और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) लगाना अनिवार्य किया गया है। सभी बसों की निगरानी कंपनी के कंट्रोल रूम से की जाएगी। इसके अलावा, फ्लाइंग स्क्वॉड भी बनाया जाएगा, जो समय-समय पर आकस्मिक जांच करेगा।
अब रेस नहीं, तय समय पर बसें
निजी बसों पर अक्सर यात्रियों को बैठाने की होड़ में तेज रफ्तार और अनियमित संचालन के आरोप लगते रहे हैं। नई पॉलिसी के तहत इस पर पूरी तरह रोक लगेगी। इंदौर–उज्जैन जैसे व्यस्त रूट पर हर 15 मिनट में बस सेवा उपलब्ध होगी। इससे औसतन 70 प्रतिशत यात्री भराव सुनिश्चित होगा और दुर्घटनाओं की आशंका भी कम होगी।
अनुशासन तोड़ने पर सख्त कार्रवाई
बस संचालन में अनुशासन बनाए रखने के लिए सख्त नियम तय किए गए हैं। पहली, दूसरी और तीसरी बार नियम तोड़ने पर चेतावनी दी जाएगी। चौथी बार गलती करने पर संबंधित बस का अनुबंध निरस्त कर दिया जाएगा। इसके बाद वह बस दोबारा सड़क पर नहीं चल सकेगी।
यात्रियों के लिए क्यों अहम है यह योजना
यह नई सरकारी बस सेवा यात्रियों के लिए कई मायनों में फायदेमंद होगी। नियमित और तय समय पर बसें मिलेंगी, तेज रफ्तार और रेस पर रोक लगेगी, और दूरस्थ व ग्रामीण इलाकों तक बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी। इसके साथ ही, सुरक्षित यात्रा और भरोसेमंद परिवहन व्यवस्था लोगों को बड़ी राहत देगी।
