75 साल पुराना राऊ का आयुर्वेदिक अस्पताल बदहाली का शिकार, बारिश में टपक रही छत, नई बिल्डिंग का 11 करोड़ का प्रस्ताव अब भी लंबित
बारिश में खुली सरकारी आयुर्वेदिक अस्पताल की बदहाल तस्वीर
Rau : इंदौर जिले के राऊ स्थित करीब 75 साल पुराने शासकीय आयुर्वेदिक अस्पताल की जर्जर हालत एक बार फिर सामने आई है। मानसून की बारिश ने अस्पताल की खस्ताहाल इमारत की पोल खोल दी है। अस्पताल की छत से लगातार पानी टपक रहा है, कई कमरों की दीवारों का प्लास्टर उखड़ चुका है और जगह-जगह सीलन दिखाई दे रही है। इसके बावजूद मरीजों और अस्पताल के कर्मचारियों को इन्हीं परिस्थितियों में इलाज और सेवाएं जारी रखनी पड़ रही हैं।
यह अस्पताल शासकीय स्वशासी आष्टांग आयुर्वेद कॉलेज द्वारा संचालित किया जाता है और राऊ सहित आसपास के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के हजारों लोगों के लिए आयुर्वेदिक उपचार का प्रमुख केंद्र है।
ओपीडी, पैथोलॉजी लैब और वेटिंग हॉल तक पहुंचा बारिश का पानी
मानसून के दौरान अस्पताल की स्थिति और भी खराब हो गई है। अस्पताल के ओपीडी कक्ष, मरीजों के प्रतीक्षा कक्ष (वेटिंग हॉल) और पैथोलॉजी लैब में छत से पानी टपकने की समस्या बनी हुई है।
बारिश के दौरान कई स्थानों पर पानी जमा हो जाता है, जिससे मरीजों और अस्पताल स्टाफ को परेशानी का सामना करना पड़ता है। फिसलन बढ़ने से दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है। अस्पताल आने वाले मरीजों का कहना है कि इलाज कराने के लिए उन्हें मजबूरी में ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।
75 साल पुरानी इमारत अब हो चुकी है जर्जर
राऊ का यह आयुर्वेदिक अस्पताल करीब सात दशक पहले स्थानीय नागरिकों के जनसहयोग से बनाया गया था। समय के साथ भवन काफी पुराना और कमजोर हो चुका है।
दीवारों से प्लास्टर झड़ रहा है, छतों में दरारें आ गई हैं और बारिश के दिनों में सीपेज की समस्या गंभीर रूप ले लेती है। भवन की स्थिति को देखते हुए लंबे समय से नए अस्पताल भवन की मांग की जा रही है।
30 बेड का अस्पताल, हर दिन पहुंचते हैं बड़ी संख्या में मरीज
अस्पताल में लगभग 30 बिस्तरों की सुविधा उपलब्ध है। यहां सामान्य आयुर्वेदिक उपचार के साथ-साथ कई विशेष चिकित्सा सेवाएं भी दी जाती हैं।
अस्पताल में वर्तमान में दो आयुर्वेद विशेषज्ञ, चार महिला चिकित्सक और पांच पुरुष चिकित्सक कार्यरत हैं। यहां सामान्य रोगों के अलावा महिलाओं से संबंधित बीमारियों का इलाज भी किया जाता है।
इसके अलावा पंचकर्म चिकित्सा जैसी आयुर्वेद की विशेष उपचार पद्धति भी मरीजों को उपलब्ध कराई जाती है।
प्रसूति सेवाएं तो हैं, लेकिन स्टाफ नर्सों की कमी
अस्पताल में प्रसूति सेवाएं भी संचालित की जाती हैं। यहां महिला चिकित्सकों की उपलब्धता तो है, लेकिन अनुभवी स्टाफ नर्सों की कमी लंबे समय से बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार, पहले यहां कार्यरत दो स्टाफ नर्स सेवानिवृत्त हो चुकी हैं, लेकिन उनके स्थान पर अब तक नई नियुक्तियां नहीं की गई हैं।
इसके चलते महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के भरोसे ही कई सेवाएं संचालित की जा रही हैं।
जटिल मामलों में मरीजों को किया जाता है रेफर
अस्पताल प्रशासन के अनुसार यदि किसी गर्भवती महिला या अन्य मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है तो उन्हें तत्काल इंदौर के बड़े सरकारी अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है।
ऐसे मामलों में मरीजों को एमवाय अस्पताल या पीसी सेठी अस्पताल भेजा जाता है, जहां बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अस्पताल में पर्याप्त स्टाफ और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हों तो कई मरीजों का उपचार स्थानीय स्तर पर ही किया जा सकता है।
नई बिल्डिंग के लिए भेजा गया 11 करोड़ रुपये का प्रस्ताव
अस्पताल की खराब स्थिति को देखते हुए नए भवन के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की गई है।
जानकारी के अनुसार, लोक निर्माण विभाग (PIU) ने नए अस्पताल भवन के निर्माण के लिए करीब 11 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर आयुर्वेद विभाग को भेजा है।
यह प्रस्ताव लगभग तीन महीने पहले भेजा गया था, लेकिन अब तक इसे अंतिम स्वीकृति नहीं मिल सकी है।
स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण एजेंसी का चयन किया जाएगा और नए भवन का निर्माण कार्य शुरू होगा।
अधीक्षक ने बताई अस्पताल की स्थिति
शासकीय आयुर्वेद चिकित्सालय राऊ के अधीक्षक डॉ. जगदीश पंचोली ने बताया कि अस्पताल का भवन काफी पुराना हो चुका है।
उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान कुछ कमरों में सीपेज और छत से पानी टपकने जैसी समस्याएं सामने आती हैं। इस संबंध में समय-समय पर जनप्रतिनिधियों और शासकीय स्वशासी आष्टांग आयुर्वेद कॉलेज के माध्यम से संबंधित विभागों को जानकारी दी गई है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि नए भवन का प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा।
कॉलेज प्राचार्य ने क्या कहा?
शासकीय स्वशासी आष्टांग आयुर्वेद महाविद्यालय के प्राचार्य अजीत पाल सिंह चौहान के अनुसार नए अस्पताल भवन के निर्माण के लिए 11 करोड़ रुपये का प्रस्ताव आयुर्वेद विभाग को भेजा जा चुका है।
उन्होंने बताया कि प्रस्ताव स्वीकृत होते ही निर्माण एजेंसी तय की जाएगी और भवन निर्माण का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नए अस्पताल का निर्माण कब शुरू होगा।
मरीजों को बेहतर सुविधाओं का इंतजार
राऊ और आसपास के क्षेत्रों के लोग वर्षों से आधुनिक सुविधाओं वाले नए अस्पताल की मांग कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मानसून के दौरान अस्पताल की स्थिति और खराब हो जाती है। कई बार मरीजों और उनके परिजनों को बारिश के बीच इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है।
यदि नए भवन का निर्माण जल्द शुरू हो जाता है तो हजारों मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।
स्वास्थ्य सेवाओं पर उठ रहे सवाल
एक ओर सरकार आयुष चिकित्सा और आयुर्वेद को बढ़ावा देने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर कई पुराने आयुर्वेदिक अस्पताल आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं।
राऊ अस्पताल की स्थिति भी इसी ओर इशारा करती है कि केवल डॉक्टरों की उपलब्धता पर्याप्त नहीं है, बल्कि सुरक्षित भवन, आधुनिक चिकित्सा उपकरण, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ और बेहतर आधारभूत सुविधाएं भी उतनी ही जरूरी हैं।
निष्कर्ष
करीब 75 वर्ष पुराना राऊ का शासकीय आयुर्वेदिक अस्पताल आज जर्जर भवन, टपकती छत, सीपेज और स्टाफ की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। बारिश के मौसम में हालात और अधिक गंभीर हो जाते हैं। हालांकि नए अस्पताल भवन के लिए 11 करोड़ रुपये का प्रस्ताव संबंधित विभाग को भेजा जा चुका है, लेकिन मंजूरी का इंतजार अभी भी जारी है। ऐसे में स्थानीय लोगों और मरीजों को उम्मीद है कि सरकार जल्द प्रस्ताव को स्वीकृति देकर नए भवन का निर्माण शुरू करेगी, ताकि क्षेत्र को सुरक्षित और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
