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अच्छे संस्कारों से विकसित होते हैं सेवा और समर्पण के भाव

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Published On: 13 October 2026
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अच्छे संस्कारों से विकसित होते हैं सेवा और समर्पण के भाव

महिदपुर रोड। श्री राजेंद्र सूरि ज्ञान मंदिर में चातुर्मास के लिए विराजित परम पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब आदि ठाणा ने मंगलवार को धर्मसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अच्छे संस्कारों से ही व्यक्ति के मन में दूसरों के प्रति सेवा, सहयोग और समर्पण की भावना विकसित होती है। संस्कारवान व्यक्ति अपने आचरण से परिवार, समाज और राष्ट्र के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

साध्वीश्री ने कहा कि मनुष्य का व्यक्तित्व केवल उसकी शिक्षा या उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार और संस्कारों से भी पहचाना जाता है। जिस व्यक्ति के जीवन में अच्छे संस्कार होते हैं, वह दूसरों की भावनाओं का सम्मान करता है और जरूरत पड़ने पर सहयोग के लिए आगे आता है। सेवा और समर्पण की भावना समाज में आपसी सद्भाव तथा सहयोग को मजबूत करती है।

बचपन से अच्छे संस्कार देना जरूरी

धर्मसभा में साध्वीश्री ने बच्चों के संस्कारों पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि बचपन से ही बच्चों में अच्छे संस्कारों का बीजारोपण करना आवश्यक है। परिवार और समाज का वातावरण बच्चों के विचारों और व्यवहार को आकार देता है। इसलिए उन्हें सेवा, त्याग, सहयोग और नैतिक मूल्यों का महत्व समझाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि संस्कारवान भावी पीढ़ी परिवार और समाज के प्रति अपने दायित्वों को बेहतर ढंग से समझ सकती है। बच्चों को केवल उपदेश देने के बजाय बड़ों को अपने आचरण से भी उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। घर-परिवार में सम्मान, अनुशासन और परस्पर सहयोग का वातावरण बच्चों के व्यक्तित्व को निखारने में मदद करता है।

साध्वीश्री ने कहा कि अच्छे संस्कार व्यक्ति को सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। इससे व्यक्ति अपने व्यवहार में विनम्रता और जिम्मेदारी बनाए रखता है। समाज में सेवा और समर्पण की भावना तभी मजबूत हो सकती है, जब व्यक्ति अपने जीवन में नैतिक मूल्यों को महत्व दे और दूसरों के हितों का ध्यान रखे।

धर्म के सिद्धांतों पर चलने का संदेश

साध्वीश्री ने श्रावक-श्राविकाओं से धर्म के प्रति श्रद्धा बनाए रखने और धर्म के सिद्धांतों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि गुरुजनों द्वारा बताए गए मार्ग पर चलकर व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक बना सकता है। धर्म के सिद्धांत केवल प्रवचन सुनने तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उन्हें व्यवहार और दैनिक जीवन में भी उतारना चाहिए।

उन्होंने उपस्थित समाजजनों से अच्छे संस्कारों को अपनाने, सेवा के कार्यों में सहभागी बनने और समर्पण के भाव को मजबूत करने का आह्वान किया। धर्मसभा में प्रवचन श्रृंखला के आयोजन में समाजजनों ने उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त किया।

परिवारों ने लिया भक्ति और प्रभावना का लाभ

जैन समाज मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने बताया कि साधार्मिक भक्ति प्रभावना और पूरे दिवस का लाभ दिनेश कुमार एवं हर्ष कुमार बोथरा, बौस विधायक परिवार ने लिया। प्रभावना का लाभ महिदपुर के रमेशचंद केसरीमल मेहता परिवार और सुभाषचंद्र सागरमल चोपड़ा, चपड़ीबंद परिवार ने लिया।

इस अवसर पर समाजजनों ने साध्वीश्री के प्रवचन सुने और धर्म, संस्कार, सेवा तथा समर्पण से जुड़े संदेशों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा प्राप्त की। आयोजन के दौरान उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने धर्मसभा में सहभागिता कर प्रवचन श्रृंखला का लाभ लिया।

 

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