गोम्मटगिरी में सामूहिक क्षमा वाणी पर्व सम्पन्न
इंदौर।
भगवान बाहुबली दिगंबर जैन ट्रस्ट, गोम्मटगिरी के तत्वावधान में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी भगवान बाहुबली की भव्य प्रतिमा के पादमूल में सामूहिक क्षमा वाणी पर्व का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुनिश्री सुयश सागर जी महाराज एवं आर्यिका शुद्ध मति माताजी सहित संघ का सानिध्य प्राप्त हुआ।
प्रवचन के दौरान मुनिश्री सुयश सागर जी महाराज ने कहा कि क्षमावाणी पर्व विश्व का एकमात्र ऐसा पर्व है जिसे केवल जैन समाज मनाता है। क्षमा मांगने और देने की परंपरा का आरंभ प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के पुत्र भरत और बाहुबली से हुआ था। आज हम सबका सौभाग्य है कि उन्हीं भगवान बाहुबली की प्रतिमा के समक्ष सामूहिक क्षमा वाणी मना रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि क्रोध, कषाय और बैर की गांठ खोलकर अंतरंग से क्षमा मांगना ही सच्ची क्षमा है और तभी क्षमा वाणी पर्व का उत्सव सार्थक बनता है।
आर्यिका शुद्ध मति माताजी ने कहा कि क्षमावाणी पर्व किसी एक दिन, महीने या वर्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शाश्वत पर्व है। प्रत्येक व्यक्ति को जीवन पर्यंत सभी जीवों के प्रति क्षमा भाव रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि वाणी में इतनी शक्ति है कि यह शत्रु भी बना सकती है और शत्रुता भी मिटा सकती है। इसलिए वाणी में सदैव क्षमा, प्रेम, करुणा और संवेदनशीलता का भाव होना चाहिए ताकि लोग आपसे जुड़ते जाएं।
कार्यक्रम की शुरुआत में संदीप मोयरा, नरेंद्र वेद और पिंकेश टोंग्या ने मुनिश्री का पाद प्रक्षालन किया। इसके पश्चात कैलाश वेद, डॉ. जैनेन्द्र जैन, प्रदीप बड़जात्या, विमल सेठी, जैनेश झांझरी, राजेश दद्दू, राजेंद्र गंगवाल एवं ट्रस्ट के अन्य सदस्यों ने मुनिश्री को श्रीफल समर्पित कर आशीर्वाद लिया।
इस अवसर पर राजेश जैन दद्दू ने बताया कि पर्यूषण पर्व के दौरान तीन, पांच, दस अथवा उससे अधिक उपवास की तपस्या करने वाले तपस्वियों को सम्मानित किया गया। उन्हें दुपट्टा पहनाकर, प्रशस्ति पत्र एवं शास्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
सभा का संचालन सौरभ पाटौदी ने किया। कार्यक्रम के अंत में मुनि संघ एवं आर्यिका संघ के सानिध्य में श्रीजी का अभिषेक एवं शांति धारा सम्पन्न हुई। शांति धारा का सौभाग्य ट्रस्टी विमल सेठी को प्राप्त हुआ।


