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Gold‑Silver Crash: गिरावट जारी, चांदी ₹16,000 सस्ती और सोने ने भी दिखाया कमजोर प्रदर्शन

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Published On: 2 February 2026
Gold‑Silver Crash
— सोना-चांदी की कीमतों में झटका! निवेशकों में चिंता, चांदी ₹16,000 सस्ती, सोने में भी गिरावट जारी

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Gold‑Silver Crash: गिरावट जारी, चांदी ₹16,000 सस्ती और सोने ने भी दिखाया कमजोर प्रदर्शन

नई दिल्ली / मुंबई: भारत के कमोडिटी बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिल रही है। बजट पेश होने और वैश्विक बाजार की अस्थिरता के बीच precious metals के भाव में लगातार दबाव दर्ज किया जा रहा है। चांदी और सोने दोनों की कीमतों में मिली गिरावट निवेशकों और ज्वेलरी खरीदारों के लिए चिंता का विषय बन गई है, जबकि कुछ विशेषज्ञ इसे निवेश के लिहाज़ से अवसर भी मान रहे हैं।

Gold‑Silver : लगातार तीसरा दिन गिरावट

Gold‑Silver 2 फरवरी 2026 को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमत में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह लगभग ₹16,000 तक सस्ता हो गया। चांदी के भाव गिरकर ₹2.65 लाख प्रति किलोग्राम के आस‑पास पहुंच गए, जो पिछले उच्च स्तरों से काफी नीचे है। वहीं सोने की कीमत में भी गिरावट का रुख जारी रहा और यह कम हो कर लगभग ₹1.38 लाख प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता पाया गया।

इस गिरावट का असर प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और हैदराबाद में भी दिखा, जहाँ दोनों कीमती धातुओं के भाव में गिरावट के संकेत मिले। निवेशक और ज्वेलरी बाजार से जुड़े व्यापारी इस गिरावट को मार्केट में अस्थिरता के संकेत के रूप में देख रहे हैं।

क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?

विश्लेषकों के मुताबिक, सोना और चांदी की कीमतों में यह तेज गिरावट कई कारकों के संयोजन का परिणाम है:

1. बजट की आशंकाएँ और आयात‑शुल्क की चर्चा:
बजट पेश होने के आस‑पास ट्रेडिंग के दौरान कमोडिटी निवेशक संभावित नियमों और शुल्क में बदलाव को लेकर सतर्क रहे। बजट 2026 के मद्देनज़र कई निवेशक भावी कर नीति के संभावित प्रभाव से बचने के लिए अपनी पोज़िशन liquidate करने लगे। (

2. वैश्विक बाजार में बिकवाली:
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। विदेशी बाजार में मजबूत अमेरिकी डॉलर और वैश्विक इक्विटी रैली के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में सोने‑चांदी की मांग में कमी आई, जिससे इन धातुओं के भाव और नीचे आए।

3. मुनाफा‑वसूली और प्रॉफिट‑बुकिंग:
पिछले कुछ महीनों में सोने और चांदी ने रिकॉर्ड स्तर तक उछाल देखा था। इसके बाद निवेशकों ने प्रॉफिट लेने शुरू कर दिए, जिससे भारी बिकवाली और भावों में गिरावट आई। विशेषज्ञों के मुताबिक, जब किसी संपत्ति की कीमतों में अत्यधिक वृद्धि होती है, तो प्रॉफिट‑बुकिंग के कारण ऐसे उतार‑चढ़ाव सामान्य हैं।

Gold-Silver Crash
Gold-Silver Crash: सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट, जानें आज का रेट

कंपनियों और ETFs पर असर

सोना और चांदी के रेट्स में भारी गिरावट का असर बुलियन ETFs (Exchange Traded Funds) पर भी देखने को मिला है। कुछ मामलों में बीएसई ने ETFs पर ±20% सर्किट लिमिट लागू की, ताकि कीमतों में अचानक तेज उतार‑चढ़ाव से निवेशकों को बचाया जा सके। यह कदम अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए अपनाया गया, लेकिन गिरती बाजार धारणा को पूरी तरह रोक नहीं सका।

निवेशकों की प्रतिक्रिया

मार्केट में इस गिरावट के बीच कुछ निवेशक निराश हैं, तो कुछ इसे खरीद का अवसर मान रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि कीमती धातुओं के भाव और गिरते हैं, तो यह उन निवेशकों के लिए एक entry point प्रदान कर सकता है जो लंबी अवधि के लिए गोल्ड‑सिल्वर में निवेश करना चाहते हैं। कुछ बाजार विशेषज्ञ यह भी सुझाव दे रहे हैं कि यदि कीमतें और नीचे जाती हैं, तो यह उन निवेशकों के लिए सही समय हो सकता है जो “डिप पर खरीद” के सिद्धांत को अपनाना चाहते हैं।

बजट 2026 का असर

विशेष रूप से Budget 2026 के दिन कमोडिटी बाजार में भावों में उतार‑चढ़ाव तेज हुआ। बजट दिवस पर सोना और चांदी दोनों में गिरावट देखी गई, बाजार धारणा यह संकेत दे रही है कि बजट में संभवतः घोषणाएँ और टैक्स/ड्यूटी में बदलाव से इनकी मांग प्रभावित हो सकती है। कुछ व्यापारी उम्मीद कर रहे हैं कि यदि आयात शुल्क और GST दरों में कटौती की घोषणा होती है, तो इससे दीर्घकाल में इन धातुओं की मांग में सुधार हो सकता है।

क्या निवेशक घबड़ाएँ या मौका पकड़े?

विश्लेषकों की राय में फिलहाल बाजार में काफी अस्थिरता बनी है और निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए। बड़े उतार‑चढ़ाव के बावजूद यह जरूरी नहीं कि आगे भी गिरावट ही जारी रहे, बल्कि तकनीकी संकेतकों और वैश्विक परिस्थितियों के आधार पर पुनर्मूल्यांकन होना चाहिए। कुछ विशेषज्ञों का सुझाव है कि जो निवेशक पहले से गोल्ड‑सिल्वर में हैं, वे भावों की दिशा स्पष्ट होने तक संयम बरतें। वहीं जो नए निवेशक हैं, वे “डिप पर खरीद” के अवसर का लाभ उठा सकते हैं, लेकिन सावधानी के साथ।

विशेषज्ञों का कहना है कि बजट के बाद आर्थिक संकेतक, डॉलर‑रुपया विनिमय दर, वैश्विक ब्याज दरें और निवेश धारणा पर नजर रखना जरूरी होगा। ये सभी कारक आगे की दिशा तय करेंगे कि सोना‑चांदी के भाव स्थिर होते हैं या गिरावट जारी रहती है।

संक्षेप में:

• सोना और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट जारी है, चांदी लगभग ₹16,000 सस्ती हुई और सोना भी गिरा है।
• बजट के दिन भावों में धड़ाम गिरावट का सिलसिला और तेज हुआ।
• गिरावट के कारणों में बजट की आशंका, वैश्विक बाजार का दबाव और प्रॉफिट‑बुकिंग शामिल हैं।

 

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